UP News: उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश में आयुष क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए नई आयुष नीति लाने की तैयारी में है. प्रस्तावित नीति के तहत राज्य में नए आयुष अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और आयुर्वेदिक दवा निर्माण इकाइयों की स्थापना को प्रोत्साहन दिया जाएगा. सरकार का मानना है कि इससे स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार होगा, निजी निवेश बढ़ेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे. नई नीति में निजी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कई तरह की रियायतें देने का प्रस्ताव है. इसमें रियायती दर पर जमीन उपलब्ध कराना, स्टांप शुल्क और बिजली शुल्क में छूट जैसी सुविधाएं शामिल हैं. इसके बदले निवेशकों को स्थानीय लोगों को रोजगार देने और आम नागरिकों को किफायती दर पर उपचार उपलब्ध कराने की शर्त पूरी करनी होगी.
तीन श्रेणियों में होगा विकास
प्रस्तावित नीति के तहत आयुष क्षेत्र का विकास तीन स्तरों पर किया जाएगा. पहले स्तर पर पीपीपी मॉडल के माध्यम से आयुष कॉलेज और 400 बेड वाले आधुनिक अस्पताल स्थापित किए जाएंगे. दूसरे स्तर पर 50 से 100 बेड वाले आयुष अस्पताल विकसित किए जाएंगे. वहीं तीसरे स्तर पर आयुष पर्यटन ग्राम बनाए जाएंगे, जहां पंचकर्म, कायाकल्प, मर्म चिकित्सा, तनाव प्रबंधन, स्लिमिंग और वेलनेस जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी.
औषधीय खेती को मिलेगा बढ़ावा
प्रदेश के विभिन्न जलवायु क्षेत्रों के अनुसार औषधीय फसलों की खेती को बढ़ावा देने की योजना है. दवा निर्माण कंपनियों को स्थानीय किसानों से अधिक से अधिक कच्चा माल खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा. इससे किसानों की आय बढ़ने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी विकसित होंगे.
पिछड़े जिलों पर रहेगा विशेष फोकस
नई नीति में उन जिलों को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी, जहां अभी आयुष क्षेत्र का पर्याप्त विकास नहीं हुआ है. ऐसे क्षेत्रों में अस्पताल, कॉलेज और दवा निर्माण इकाइयां स्थापित करने वाले निवेशकों को अधिक अनुदान देने का प्रस्ताव है. वहीं बड़े शहरों में अनुदान की दर अपेक्षाकृत कम रहेगी.
आयुष मंत्री ने बताई नई नीति की बड़ी योजना
आयुष मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. दयाशंकर मिश्र 'दयालु' ने कहा कि सरकार का उद्देश्य उत्तर प्रदेश को आयुष चिकित्सा, औषधीय खेती और स्वास्थ्य पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनाना है.
Input- Ravi Ranjan Kumar
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