UP News: उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान हुए हंगामे से विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना काफी आहत नजर आए. उन्होंने बुधवार को सदन में कहा कि मंगलवार की घटना से उन्हें पीड़ा हुई है और वह इस बात पर विचार करेंगे कि वह इस पद के योग्य हैं या नहीं. इसके बाद विधानसभा की कार्यवाही तय समय से एक दिन पहले ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई.
हंगामे से आहत हुए विधानसभा अध्यक्ष
विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि सदन में मंगलवार को जो कुछ हुआ, उससे वह दुखी हैं. उन्होंने कहा कि पहली बार उन्हें लगा कि या तो उनके प्रयासों में कमी रह गई है या फिर डॉ. भीमराव अंबेडकर की यह बात सही है कि समस्या संविधान में नहीं, बल्कि उसे चलाने वाले लोगों में होती है. उन्होंने कहा कि उनकी लंबी राजनीतिक यात्रा अब अंतिम पड़ाव में है. पिछले साढ़े चार वर्षों में विधानसभा अध्यक्ष के तौर पर किए गए कार्यों को लेकर वह गंभीरता से विचार करेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें सोचना होगा कि वह इस जिम्मेदारी के योग्य हैं या नहीं और जल्द ही इस पर निर्णय लेंगे.
तीन दिन में करीब दो घंटे ही चली सदन की कार्यवाही
यूपी विधानसभा का मानसून सत्र तीन दिन में ही समाप्त हो गया. पहले दिन दिवंगत सदस्यों के लिए शोक प्रस्ताव पढ़ा गया था. दूसरे दिन समाजवादी पार्टी के विधायकों के हंगामे के बीच वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने 59,019.54 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पेश किया था. बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को विधानसभा में बोलना था, लेकिन सपा विधायकों के लगातार विरोध के कारण सदन में चर्चा नहीं हो सकी. इसके बाद बिना चर्चा के ही अनुपूरक बजट पारित कर दिया गया. संभल दंगे से जुड़ी रिपोर्ट पेश होने के बाद सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई.
सीएम योगी ने सपा पर साधा निशाना
विधानसभा की कार्यवाही स्थगित होने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि विधानसभा सत्र के दौरान एक बार फिर अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक व्यवहार देखने को मिला. सीएम योगी ने कहा कि सपा के हंगामे के कारण युवाओं, किसानों, महिलाओं और गरीबों से जुड़ी कल्याणकारी योजनाओं पर चर्चा नहीं हो सकी. उन्होंने शिक्षामित्रों का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने मानदेय को 10 हजार रुपये से बढ़ाकर 18 हजार रुपये किया है.
राम मंदिर चढ़ावा मामले को लेकर हुआ था विवाद
मंगलवार को नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर चर्चा की मांग की थी, जिसे विधानसभा अध्यक्ष ने स्वीकार नहीं किया. इसके बाद सपा विधायकों ने सदन में हंगामा शुरू कर दिया. हंगामे के दौरान सपा विधायक सचिन यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीर लहराई थी. इस पर सदन में स्थिति बिगड़ गई थी. विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना नाराज होकर अपनी कुर्सी से खड़े हो गए थे और सचिन यादव को पूरे सत्र के लिए सदन से निष्कासित कर दिया था. इस दौरान भाजपा और सपा की महिला विधायक भी आमने-सामने आ गई थीं.
सपा विधायकों ने विधानसभा के बाहर किया प्रदर्शन
मानसून सत्र शुरू होने से पहले सपा विधायकों ने 6900 शिक्षक भर्ती और राम मंदिर चढ़ावा मामले को लेकर विधानसभा के बाहर प्रदर्शन किया था. सपा विधायक अतुल प्रधान दानपेटी लेकर पहुंचे थे, जबकि निष्कासित विधायक सचिन यादव आलू लेकर धरने पर बैठे थे. सपा नेता शिवपाल यादव ने भी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा था कि बजट और चंदे से जुड़े मामलों में पक्षपात किया जा रहा है. वहीं, सत्ता पक्ष ने सपा के प्रदर्शन और सदन में किए गए विरोध को असंवैधानिक बताया.
