UP News: उत्तर प्रदेश में बढ़ती मातृ मृत्यु दर के बीच गोरखपुर का एक विशेष स्वास्थ्य मॉडल उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आया है. गांव की आशा और एएनएम से लेकर महिला अस्पताल, बीआरडी मेडिकल कॉलेज और एम्स गोरखपुर के विशेषज्ञों तक को एक व्हाट्सएप नेटवर्क से जोड़कर हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं की लगातार निगरानी की जा रही है. स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि इस व्यवस्था के चलते 21 मई से 12 जुलाई तक जिले में प्रसव के दौरान किसी भी महिला की मौत नहीं हुई.
व्हाट्सएप नेटवर्क से हाई-रिस्क गर्भवतियों पर नजर
सैम्पल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) के अनुसार उत्तर प्रदेश में मातृ मृत्यु दर बढ़कर प्रति एक लाख जीवित जन्म पर 154 हो गई है, जबकि दो वर्ष पहले यह 141 थी. ऐसे समय में गोरखपुर स्वास्थ्य विभाग ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, महिला अस्पताल, बीआरडी मेडिकल कॉलेज और एम्स तक एकीकृत मातृ सेवा अभियान शुरू किया है. इस अभियान में सीएमओ, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, सीएचसी-पीएचसी प्रभारी, नर्स, सीएचओ, एएनएम, एम्बुलेंस समन्वयक और मॉनिटरिंग स्टाफ एक ही व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए आपस में जुड़े हैं.
सवा महीने में नहीं हुई किसी की मौत
सीएमओ डॉ. राजेश झा के मुताबिक यह अभियान 21 मई से शुरू हुआ था. 12 जुलाई तक की रिपोर्ट में जिले में प्रसव के दौरान किसी भी महिला की मौत दर्ज नहीं हुई. इस अवधि में 271 हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं को विभिन्न अस्पतालों से रेफर किया गया. इनमें 40 महिलाएं प्रसवोपरांत अत्यधिक रक्तस्राव, 55 का पहले सिजेरियन, 35 में गंभीर एनीमिया और 21 महिलाओं में उच्च रक्तचाप की समस्या थी. गंभीर स्थिति वाली कई महिलाओं का समय पर इलाज और रेफरल के जरिए सुरक्षित प्रसव कराया गया.
रेफरल से लेकर 42 दिन तक होता है फॉलोअप
अभियान के तहत नौवें महीने में अस्पताल पहुंचने वाली गर्भवती महिलाओं की हाई-रिस्क श्रेणी में पहचान की जाती है. जरूरत पड़ने पर उन्हें तत्काल उच्च स्वास्थ्य केंद्र भेजा जाता है. रेफरल के साथ मरीज की बीपी, हीमोग्लोबिन, शुगर, वजन, पल्स रेट और अन्य चिकित्सीय जानकारी व्हाट्सएप के माध्यम से संबंधित अस्पताल तक पहुंचाई जाती है. मातृ सेवा टीम हर घंटे मरीज की स्थिति पर नजर रखती है और प्रसव के बाद भी 7 से 42 दिनों तक नियमित फॉलोअप करती है.
शासन को भेजी जाएगी मॉडल की रिपोर्ट
स्वास्थ्य विभाग अब इस पहल में निजी अस्पतालों को भी शामिल कर उनके स्टाफ को हाई-रिस्क डिलीवरी प्रबंधन का प्रशिक्षण दे रहा है. दो महीने के ट्रायल के बाद अभियान की समीक्षा कर इसकी विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी. अधिकारियों का मानना है कि यदि यह मॉडल व्यापक स्तर पर लागू किया गया तो उत्तर प्रदेश में मातृ मृत्यु दर कम करने में यह प्रभावी साबित हो सकता है.
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