UP News: गोरखपुर नगर निगम में उपसभापति पद के चुनाव की प्रक्रिया अगस्त के पहले सप्ताह तक पूरी होने की संभावना है. भाजपा में इस पद को लेकर मंथन तेज है. 36 वर्षों में पहली बार किसी दलित पार्षद को उपसभापति बनाने की संभावना पर गंभीर चर्चा चल रही है. हालांकि महिला पार्षदों की दावेदारी भी मजबूत मानी जा रही है. अंतिम निर्णय भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की सहमति के बाद होगा.
दलित चेहरे पर मंथन तेज
नगर निगम के उपसभापति पद के लिए अब तक 19 बार चुनाव हो चुके हैं, लेकिन किसी भी दलित जनप्रतिनिधि को यह जिम्मेदारी नहीं मिली. ऐसे में दलित पार्षद संगठन और पार्टी नेतृत्व से इस बार दलित प्रतिनिधि को अवसर देने की मांग कर रहे हैं. भाजपा भी इस विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रही है.
महिला पार्षदों की भी मजबूत दावेदारी
मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, उपसभापति पद की दौड़ में पिछड़ा वर्ग और सामान्य वर्ग की महिला पार्षदों के नाम भी प्रमुखता से चर्चा में हैं. दोनों वर्गों की महिला पार्षदों को कई पार्षदों का समर्थन प्राप्त बताया जा रहा है. ऐसे में उम्मीदवार के चयन को लेकर पार्टी के भीतर कई स्तरों पर मंथन जारी है.
सामाजिक संतुलन साधने की रणनीति
हाल ही में नगर निगम कार्यकारिणी के चुनाव में भाजपा ने नए चेहरों को मौका देते हुए सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश की थी. कार्यकारिणी में दो ओबीसी, दो दलित और एक सामान्य वर्ग के पार्षद को शामिल किया गया था. माना जा रहा है कि उपसभापति के चुनाव में भी पार्टी इसी सामाजिक समीकरण को आगे बढ़ा सकती है. वहीं संख्या बल कम होने के कारण समाजवादी पार्टी इस चुनाव में प्रभावी भूमिका में नजर नहीं आ रही है, इसलिए चुनाव का परिणाम भाजपा के संगठनात्मक फैसले पर ही निर्भर माना जा रहा है.
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