UP News: पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब उत्तर प्रदेश के निर्यात कारोबार पर भी दिखने लगा है. समुद्री परिवहन में बढ़ी अनिश्चितता के कारण यूरोप के कई आयातकों ने प्रदेश से भेजे जाने वाले माल की खेप फिलहाल रोक दी है. इसका असर करीब 6 हजार करोड़ के निर्यात ऑर्डरों पर पड़ा है, जिससे कई प्रमुख उद्योगों के कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है.
यूरोप के खरीदारों ने फिलहाल रोकी शिपमेंट
निर्यातकों के मुताबिक जर्मनी, फ्रांस, इटली और स्पेन सहित कई यूरोपीय देशों के आयातकों ने अगली सूचना तक नई खेप स्वीकार करने से इनकार कर दिया है. अगस्त और सितंबर में भेजे जाने वाले बड़े पैमाने के ऑर्डर फिलहाल गोदामों में ही रखे हुए हैं. कारोबारियों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो तय समय पर आपूर्ति प्रभावित होगी, जिससे कई ऑर्डर रद्द होने का खतरा भी बढ़ सकता है.
प्रदेश के कई उद्योगों पर सीधा असर
उत्तर प्रदेश से हर महीने लगभग तीन हजार से 3,200 करोड़ का सामान यूरोप भेजा जाता है. कानपुर का लेदर और इंजीनियरिंग उद्योग, आगरा का फुटवियर कारोबार, नोएडा का गारमेंट और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर, मुरादाबाद का ब्रास हैंडीक्राफ्ट और वाराणसी के कालीन व हस्तशिल्प उत्पाद यूरोपीय बाजार में बड़ी मात्रा में निर्यात किए जाते हैं. मौजूदा स्थिति में इन सभी उद्योगों की तैयार खेप गोदामों में रुकी हुई है.
देरी से डिलीवरी पड़ सकती है भारी
काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट्स (CLE) के पूर्व रीजनल चेयरमैन असद इराकी का कहना है कि यूरोपीय बाजार में समय पर माल पहुंचाना सबसे अहम माना जाता है. यदि तय समय सीमा के भीतर शिपमेंट नहीं पहुंचती है तो आर्थिक जुर्माना लग सकता है. साथ ही वर्षों से बने कारोबारी संबंधों पर भी इसका असर पड़ सकता है. उनका कहना है कि यदि तनाव लंबा चला तो समुद्री मालभाड़ा, बीमा प्रीमियम और कंटेनरों की उपलब्धता जैसी चुनौतियां भी बढ़ेंगी.
त्योहारी सीजन के कारोबार पर भी असर संभव
भारतीय निर्यात परिषद के प्रमुख आलोक श्रीवास्तव के अनुसार अगस्त और सितंबर के लिए तय लगभग 6 हजार करोड़ के ऑर्डर फिलहाल रुके हुए हैं. यदि शिपमेंट समय पर रवाना नहीं हो सकी तो त्योहारी सीजन के लिए मिलने वाले नए ऑर्डर भी प्रभावित हो सकते हैं. इससे वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा पर भी असर पड़ने की आशंका है.
लंबा खिंचा तनाव तो बढ़ सकती हैं ये मुश्किलें
- समय पर माल नहीं पहुंचने पर ऑर्डर रद्द होने की आशंका.
- तैयार माल गोदामों में रुके रहने से कंपनियों की पूंजी फंस सकती है.
- समुद्री मालभाड़ा और बीमा खर्च बढ़ने से निर्यात लागत में इजाफा होगा.
- विदेशी खरीदारों से भुगतान मिलने में देरी हो सकती है.
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