UP Police Recruitment Fraud: उत्तर प्रदेश के मेरठ में पुलिस भर्ती प्रक्रिया में कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है. आरोप है कि आगरा के एक युवक ने पुलिस भर्ती की लिखित परीक्षा से लेकर दस्तावेजों की जांच तक अपनी जगह दोस्त को बैठाया और इसी तरह भर्ती प्रक्रिया पूरी कर नौकरी हासिल कर ली. नौकरी मिलने के बाद वह पुलिस लाइन मेरठ में सिपाही के तौर पर शुरुआती ट्रेनिंग भी लेने लगा. शिकायत मिलने पर हुई जांच में फोटो, फिंगरप्रिंट और बायोमेट्रिक रिकॉर्ड के मिलान से कथित फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ.
ट्रेनिंग के दौरान मिली शिकायत
पुलिस लाइन मेरठ में सिपाही के तौर पर शुरुआती ट्रेनिंग ले रहे आगरा के मुकुल पुत्र पप्पूराम के खिलाफ कुछ महीने पहले पुलिस अधिकारियों को शिकायत मिली थी. शिकायत में आरोप लगाया गया था कि मुकुल ने पुलिस भर्ती परीक्षा में खुद शामिल होने के बजाय अपने दोस्त रामरूप पुत्र किशनचंद निषाद को अपनी जगह परीक्षा देने के लिए बैठाया था. शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मामले की जांच एसपी यातायात को सौंपी गई.
फोटो और बायोमेट्रिक रिकॉर्ड से सामने आया अंतर
जांच के दौरान भर्ती प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों और रिकॉर्ड की बारीकी से पड़ताल की गई. आरोपों की जांच के लिए फोटो, फिंगरप्रिंट और बायोमेट्रिक रिकॉर्ड का मिलान कराया गया. इसमें उम्मीदवार मुकुल और परीक्षा देने वाले युवक के बीच अंतर सामने आया. जांच में यह भी पता चला कि भर्ती के दौरान मुकुल के नाम से जमा किए गए दस्तावेजों और एडमिट कार्ड में उसकी जगह दूसरे युवक की फोटो लगी थी. शारीरिक और मेडिकल जांच से जुड़े रिकॉर्ड में भी दोनों के बीच अंतर पाया गया.
8 लाख रुपये देने का आरोप
जांच में यह आरोप भी सामने आया कि मुकुल की जगह भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने के बदले रामरूप को 8 लाख रुपये दिए गए थे. पुलिस को कथित लेनदेन से संबंधित बैंक डिटेल भी मिली है, जिसे जांच में अहम साक्ष्य माना जा रहा है. यानी भर्ती प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों में इस्तेमाल हुए रिकॉर्ड की जांच के बाद दोनों युवकों के बीच अंतर सामने आया.
जांच में जुटी पुलिस
शिकायत के आधार पर हुई जांच में फोटो, फिंगरप्रिंट, बायोमेट्रिक, दस्तावेज, एडमिट कार्ड और शारीरिक व मेडिकल जांच से जुड़े रिकॉर्ड को देखा गया. इन रिकॉर्ड में सामने आए अंतर के आधार पर पुलिस भर्ती में कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है. बैंक लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड भी जांच का हिस्सा हैं. मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी.
