UP News: उत्तर प्रदेश में रविवार को राज्यव्यापी महापौधरोपण अभियान के तहत 35 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सुबह करीब 8:30 बजे गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे के पास 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान का शुभारंभ किया. इस दौरान उन्होंने नीम, पीपल और बरगद के पौधे लगाए. पौधरोपण के बाद मुख्यमंत्री ने आसमान में गुब्बारे छोड़े और पौधों के साथ सेल्फी भी ली.
पर्यावरण संरक्षण को बताया समय की सबसे बड़ी जरूरत
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष मानसून करीब एक महीने की देरी से आया, जिससे खेती प्रभावित हुई है. उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन का असर पूरी दुनिया महसूस कर रही है. गर्मी और सर्दी दोनों अपने चरम पर पहुंच रही हैं, जबकि ग्लोबल वार्मिंग लगातार गंभीर चुनौती बनती जा रही है. मुख्यमंत्री ने कहा कि अंधाधुंध पेड़ों की कटाई और जल स्रोतों के नष्ट होने का परिणाम पूरी मानवता भुगत रही है. समुद्र तटीय शहरों पर खतरा बढ़ रहा है और कई शहर गैस चैंबर में बदलते जा रहे हैं. उन्होंने लोगों से केवल पौधे लगाने ही नहीं, बल्कि उनकी देखभाल करने और सिंगल यूज प्लास्टिक से दूरी बनाने की भी अपील की.
नौ वर्षों में 242 करोड़ पौधे लगाने का दावा
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में पिछले नौ वर्षों के दौरान 242 करोड़ पौधे लगाए जा चुके हैं. पिछले वर्ष अकेले 35 करोड़ पौधों का रोपण किया गया था और इस बार भी उतने ही पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है. उन्होंने कहा कि जब वह कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे, तब तक प्रदेश में करीब 5 करोड़ पौधे लगाए जा चुके थे और दिनभर अभियान जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाना है. प्रत्येक व्यक्ति को अपनी मां, परिवार या पूर्वजों की स्मृति में कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए.
कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए सरकार के प्रयास
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 के बाद प्रदेश में 16 लाख एलईडी स्ट्रीट लाइटें लगाई गईं, जिससे ऊर्जा की बचत हुई और कार्बन उत्सर्जन में कमी आई. उन्होंने उज्ज्वला योजना का भी उल्लेख करते हुए कहा कि देशभर में 10 करोड़ परिवारों को मुफ्त गैस कनेक्शन मिले हैं, जबकि उत्तर प्रदेश के करीब 2 करोड़ परिवार इससे लाभान्वित हुए हैं. इससे महिलाओं को धुएं से राहत मिली और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं कम हुईं. उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस शासन के दौरान गैस कनेक्शन ब्लैक में 50 हजार से एक लाख रुपये तक में बिकते थे. मुख्यमंत्री के अनुसार, पिछले वर्षों में लगाए गए पौधों के कारण बड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण हुआ है और ऑक्सीजन उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. उन्होंने कहा कि विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को समान प्राथमिकता देना आवश्यक है.
वानिकी विश्वविद्यालय और मिशन छाया पर जोर
वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अरुण सक्सेना ने कहा कि रविवार शाम तक प्रदेश में 35 करोड़ पौधे लगाए जाने का लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा. उन्होंने दावा किया कि पिछले दस वर्षों में प्रदेश में कुल 275 करोड़ पौधे लगाए जा चुके होंगे, जो एक रिकॉर्ड है. उन्होंने बताया कि गोरखपुर में जल्द ही वानिकी विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी. साथ ही 'मिशन छाया' के तहत सड़कों के किनारे छायादार और फूलदार पौधे, घरों के आसपास फलदार वृक्ष तथा बंदरों और अन्य वन्यजीवों के लिए 'कपि वन' विकसित किए जाएंगे. उन्होंने रक्षाबंधन पर 'एक पेड़ बहन के नाम' और शिक्षक दिवस पर 'एक पेड़ गुरु के नाम' लगाने की भी अपील की.
रवि किशन बोले- मुख्यमंत्री के विजन से बदल रहा पूर्वांचल
सांसद रवि किशन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि उनके विजन के कारण पूर्वांचल में तेजी से विकास हो रहा है. उन्होंने कहा कि गोरखपुर में बड़े उद्योग आ रहे हैं और प्रदेश एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ रहा है. उन्होंने लोगों से अपने जन्मदिन और अन्य विशेष अवसरों पर पौधे लगाने का संकल्प लेने की अपील की.
बच्चों ने भेंट किया मुख्यमंत्री का चित्र
कार्यक्रम के दौरान अटल आवासीय विद्यालय के बच्चों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपने हाथों से बनाया गया उनका चित्र भेंट किया. मुख्यमंत्री ने बच्चों के हाथों में लिखे पर्यावरण संरक्षण के स्लोगन भी पढ़े और उन्हें मन लगाकर पढ़ाई करने के लिए प्रोत्साहित किया.
गोरखपुर में 55 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य
गोरखपुर के प्रभागीय वनाधिकारी शुभम सिंह ने बताया कि जिले को इस अभियान के तहत 55 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य मिला है. इसके लिए सभी पौधशालाओं में गुणवत्तायुक्त पौधों की व्यवस्था कर ली गई है. रोपण स्थलों पर गड्ढों की खुदाई, मिट्टी की तैयारी, पौध संरक्षण और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं पहले ही पूरी कर ली गई हैं ताकि पौधों की उत्तरजीविता सुनिश्चित की जा सके.
-कोमल अग्रवाल की रिपोर्ट
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