कभी खेतों में करती थीं मजदूरी, अब उड़ाती हैं ड्रोन, जानिए कैसे नमो ड्रोन दीदी ने बदली UP की महिलाओं की जिंदगी

नमो ड्रोन दीदी योजना ग्रामीण महिलाओं को कृषि में आधुनिक तकनीक अपनाने का मौका दे रही है. स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन और ट्रेनिंग मिल रही है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन रही हैं. यह योजना महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खोल रही है.

Namo Drone Didi Yojana : खेती में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ने के साथ ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी खुल रहे हैं. केंद्र सरकार की नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को कृषि ड्रोन और प्रशिक्षण दिया जा रहा है. उत्तर प्रदेश प्रशिक्षित ड्रोन दीदियों की संख्या के मामले में देश में दूसरे स्थान पर है.

महिला SHGs को मिल रहे कृषि ड्रोन

नमो ड्रोन दीदी योजना का उद्देश्य दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) से जुड़े महिला स्वयं सहायता समूहों को कृषि ड्रोन उपलब्ध कराना है. इन ड्रोन की मदद से खेतों में खाद और कीटनाशकों का छिड़काव कम समय में किया जा सकता है. योजना के तहत 2023-24 से 2025-26 की अवधि के लिए 1,261 करोड़ रुपये का बजट रखा गया था. इसके तहत करीब 14,500 से 15,000 चयनित महिला स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया.

ड्रोन खरीद पर 80 प्रतिशत तक सरकारी सहायता

योजना के तहत महिला स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन और उससे जुड़े सामान की लागत पर 80 प्रतिशत तक केंद्रीय वित्तीय सहायता मिलती है. यह सहायता अधिकतम 8 लाख रुपये तक हो सकती है. बाकी रकम स्वयं सहायता समूहों के क्लस्टर लेवल फेडरेशन के माध्यम से लोन के रूप में जुटायी जा सकती है. ड्रोन पैकेज में चार अतिरिक्त बैटरी सेट, एक अतिरिक्त प्रोपेलर सेट, नोजल सेट, ड्यूल-चैनल फास्ट चार्जर, एक साल का व्यापक बीमा और दो साल का वार्षिक रखरखाव अनुबंध शामिल है.

15 दिन की ट्रेनिंग के बाद बनती हैं ड्रोन दीदी

हर चयनित स्वयं सहायता समूह से एक महिला सदस्य को प्रमाणित ड्रोन पायलट और दूसरी सदस्य को ड्रोन असिस्टेंट के रूप में प्रशिक्षित किया जाता है. इसके लिए 15 दिन की अनिवार्य ट्रेनिंग दी जाती है.ड्रोन असिस्टेंट को ड्रोन के रखरखाव और मरम्मत से जुड़ी जानकारी दी जाती है, जबकि पायलट को ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण मिलता है. इस तरह ग्रामीण महिलाओं को कृषि के साथ आधुनिक तकनीक का कौशल भी हासिल हो रहा है.

ड्रोन दीदियों के मामले में यूपी दूसरे नंबर पर

जनवरी 2026 तक संसद में दिए गए ग्रामीण विकास राज्य मंत्री के जवाब के मुताबिक, देशभर में महिला स्वयं सहायता समूहों को 1,094 ड्रोन वितरित किए जा चुके थे. इनमें उत्तर प्रदेश 128 ड्रोन दीदियों के साथ दूसरे स्थान पर रहा. कर्नाटक 145 ड्रोन दीदियों के साथ पहले स्थान पर था. वहीं आंध्र प्रदेश में 108 और हरियाणा में 102 ड्रोन दीदियां थीं.

प्रयागराज में 90 महिलाओं को मिली ट्रेनिंग

उत्तर प्रदेश में योजना के तहत प्रयागराज जिले के फूलपुर में 90 महिलाओं को ड्रोन संचालन की ट्रेनिंग दी गयी. ड्रोन निर्माता कंपनी Marut Drones ने योजना के रोलआउट के तहत इन महिलाओं को प्रशिक्षित किया.यह एक जिले में अब तक रिपोर्ट किए गए बड़े प्रशिक्षण समूहों में से एक है.

एक दिन में 20 एकड़ तक छिड़काव

एक ड्रोन टीम सामान्य तौर पर एक दिन में करीब 20 एकड़ खेत में छिड़काव कर सकती है. ड्रोन पैकेज के साथ मिलने वाली अतिरिक्त बैटरियां लगातार काम करने में मदद करती हैं.महिला स्वयं सहायता समूह स्थानीय किसानों को ड्रोन से खाद और कीटनाशक छिड़काव की सेवा किराये पर देकर आमदनी कर सकते हैं. इससे ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार और आय का एक नया जरिया तैयार हो रहा है.

DGCA-अनुमोदित लाइसेंस का भी प्रावधान

योजना के तहत महिलाओं को मान्यता प्राप्त तकनीकी कौशल देने पर भी जोर है. प्रशिक्षित महिलाओं को DGCA-अनुमोदित ड्रोन पायलट लाइसेंस दिलाने का प्रावधान है. इससे महिलाएं अपनी कृषि और घरेलू जिम्मेदारियों के साथ ड्रोन संचालन का हुनर भी हासिल कर सकती हैं. नमो ड्रोन दीदी योजना के जरिए खेती में तकनीक के इस्तेमाल के साथ ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी प्रयास किया जा रहा है.

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By रवि रंजन कुमार

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