डॉक्टर डेथ की वापसी: पुजारी के वेश में छिपा था 100 हत्याओं का जल्लाद

UP MURDERER: अलीगढ़ के देवेंद्र शर्मा उर्फ 'डॉक्टर डेथ' को दिल्ली पुलिस ने दौसा के आश्रम से पुजारी के वेश में गिरफ्तार किया. उस पर 100 से अधिक हत्याएं और 125 अवैध किडनी ट्रांसप्लांट के आरोप हैं. 2023 में पैरोल पर बाहर आकर वह फरार हो गया था.

UP MURDERER: उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के छर्रा थाना क्षेत्र के गांव पुरैनी का निवासी देवेंद्र शर्मा उर्फ ‘डॉक्टर डेथ’ अब एक बार फिर कानून के शिकंजे में है. 67 वर्षीय यह कुख्यात अपराधी देशभर में अपनी क्रूर हत्याओं और मानव अंग तस्करी के मामलों को लेकर कुख्यात हो चुका है. दिल्ली पुलिस ने उसे राजस्थान के दौसा जिले के एक आश्रम से पुजारी के वेश में गिरफ्तार किया. देवेंद्र पर 100 से अधिक हत्याओं और 125 से ज्यादा अवैध किडनी ट्रांसप्लांट के आरोप हैं.

शुरुआत एक आम डॉक्टर से

देवेंद्र शर्मा ने 1984 में बिहार से बीएएमएस (आयुर्वेदिक डॉक्टर) की डिग्री हासिल की थी. इसके बाद उसने राजस्थान के बांदीकुई में ‘जनता क्लीनिक’ नाम से एक क्लिनिक खोला. हालांकि, मेडिकल क्षेत्र में उसका करियर अधिक समय तक नहीं चला. 1994 में गैस एजेंसी डीलरशिप के नाम पर 11 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने के बाद उसने अपराध की दुनिया में कदम रख दिया.

अवैध किडनी रैकेट का खुलासा

1998 से 2004 के बीच देवेंद्र शर्मा ने गुरुग्राम के एक डॉक्टर अमित के साथ मिलकर एक बड़े किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट को अंजाम दिया. इस दौरान उन्होंने 125 से अधिक किडनी ट्रांसप्लांट कराए, जिनमें से अधिकतर अवैध और बिना किसी मेडिकल अनुमति के थे. हर ट्रांसप्लांट के बदले देवेंद्र को 5 से 7 लाख रुपये तक मिलते थे. पीड़ितों में अधिकतर गरीब और अशिक्षित लोग होते थे जिन्हें बहला-फुसलाकर किडनी निकाल ली जाती थी.

सीरियल किलर का खूनी खेल

2002 से 2004 के बीच देवेंद्र ने अपने गैंग के साथ मिलकर दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान में 100 से अधिक टैक्सी और ट्रक चालकों की निर्मम हत्या की. वह फर्जी सवारी बनकर ड्राइवरों को बुलाता, फिर गला घोंटकर उनकी हत्या करता था. शवों को वह कासगंज की हजारा नहर में फेंक देता, जहां मगरमच्छ उन्हें खा जाते और सबूत मिट जाते थे. चोरी की गई गाड़ियों को वह 20-25 हजार रुपये में बेच देता था. देवेंद्र ने खुद कबूल किया कि उसने 50 हत्याओं के बाद गिनती करना छोड़ दी थी.

2004 में हुआ था पहला बड़ा खुलासा

2004 में पुलिस ने देवेंद्र शर्मा को किडनी रैकेट और हत्या के मामलों में गिरफ्तार किया. उस पर दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा में सात हत्या के केस चले, जिनमें उसे आजीवन कारावास की सजा मिली. गुरुग्राम में एक मामले में उसे मौत की सजा भी सुनाई गई. गिरफ्तारी के बाद उसकी पत्नी और बच्चे उसे छोड़कर चले गए. एक बेटा अब स्विट्जरलैंड और दूसरा केरल में नौकरी कर रहा है.

पैरोल पर छूटकर फिर से फरार

2020 में देवेंद्र को 20 दिन की पैरोल मिली, लेकिन वह पैरोल खत्म होने के बाद सात महीने तक फरार रहा. फिर 2023 में उसे दो महीने की पैरोल पर दोबारा छोड़ा गया, लेकिन वह इस बार भी जेल नहीं लौटा. वह दौसा जिले के एक आश्रम में पुजारी बनकर छिप गया और साधु का जीवन जीने लगा.

पुलिस की सूझबूझ और गिरफ्तारी की योजना

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने देवेंद्र की तलाश में अलीगढ़, आगरा, जयपुर, दिल्ली और प्रयागराज में छापेमारी की. देवेंद्र की लोकेशन उसके मोबाइल रिचार्ज के माध्यम से ट्रेस की गई. पुलिस ने दौसा के आश्रम पर एक सप्ताह तक निगरानी रखी. एक जवान ने मरीज बनकर देवेंद्र से संपर्क किया और उसकी पहचान की पुष्टि होने पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया.

स्थानीय लोग हैरान, पुलिस सतर्क

गांव पुरैनी और दौसा के स्थानीय लोग देवेंद्र शर्मा के अपराधों के बारे में जानकर हैरान हैं. एक पढ़ा-लिखा व्यक्ति किस तरह अपराध की गहराइयों में उतर सकता है, यह देवेंद्र की कहानी से साफ होता है. पुलिस अब उससे जुड़े बाकी मामलों की भी जांच कर रही है.

एक डॉक्टर, जो बना मौत का सौदागर

देवेंद्र शर्मा की कहानी समाज के उस अंधेरे पक्ष को दिखाती है जहां लालच, धोखा और अमानवीयता इंसान को हैवान बना देती है. एक डॉक्टर, जिसने जीवन बचाने की शपथ ली थी, वही 100 से अधिक लोगों की जान का हत्यारा बन बैठा. अब कानून का शिकंजा उसे एक बार फिर अपने घेरे में ले चुका है.

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Author: Abhishek Singh

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