यूपी में मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी अब परिवार की जरूरतों से होगी तय, भोजन से शिक्षा-चिकित्सा तक खर्च बनेगा आधार, जानिए नया नियम

UP News: उत्तर प्रदेश सरकार ने मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी तय करने के तरीके में बड़ा बदलाव किया है. अब केवल महंगाई और काम की प्रकृति ही नहीं, बल्कि मजदूर परिवार की रोजमर्रा की सभी जरूरतें भी मजदूरी का आधार बनेंगी. जानिए इस नई नियमावली के मुख्य बिंदु.

UP News: उत्तर प्रदेश में मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी तय करने का तरीका अब बदल गया है. नई नियमावली में सिर्फ महंगाई और काम की प्रकृति ही नहीं, बल्कि मजदूर परिवार की रोजमर्रा की जरूरतों को भी आधार बनाया गया है. भोजन, कपड़ा, आवास से लेकर शिक्षा, चिकित्सा और मनोरंजन तक के खर्च को मजदूरी तय करने की गणना में शामिल किया गया है.

परिवार की जरूरतों को बनाया गया आधार

उत्तर प्रदेश मजदूरी संहिता नियमावली-2026 के तहत मानक मजदूर परिवार में कमाने वाले कर्मचारी के साथ पति या पत्नी और दो बच्चों को शामिल किया गया है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इन्हें कुल तीन वयस्क उपभोग इकाइयों के बराबर माना गया है. मजदूरी तय करते समय परिवार के लिए रोज 2700 कैलोरी भोजन और साल में 66 मीटर कपड़े की जरूरत को आधार माना जाएगा. भोजन और कपड़े के खर्च का 10 प्रतिशत आवास के लिए जोड़ा जाएगा. वहीं न्यूनतम मजदूरी का 20 प्रतिशत ईंधन और बिजली के खर्च के लिए माना जाएगा. बच्चों की शिक्षा, चिकित्सा, मनोरंजन और आकस्मिक जरूरतों के लिए न्यूनतम मजदूरी का 25 प्रतिशत आधार में शामिल किया जाएगा.

साल में दो बार महंगाई भत्ते की गणना

नई व्यवस्था में महंगाई भत्ते के पुनरीक्षण की प्रक्रिया भी तय की गई है. इसके लिए श्रम ब्यूरो के औद्योगिक कामगारों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक को आधार बनाया जाएगा. महंगाई भत्ते की गणना साल में दो बार होगी. यह प्रक्रिया एक अप्रैल और एक अक्टूबर से पहले की जाएगी.

ओवरटाइम और वेतन कटौती के नियम भी तय

साप्ताहिक अवकाश के दिन काम कराने पर कर्मचारी को ओवरटाइम की दर से भुगतान करना होगा. इसके साथ वैकल्पिक विश्राम दिवस भी देना होगा. कर्मचारी से लगातार 10 दिन से अधिक बिना अवकाश काम नहीं कराया जा सकेगा. वहीं मजदूरी से कुल कटौती 50 प्रतिशत से अधिक होने पर अतिरिक्त राशि अगली मजदूरी अवधि में किस्तों में वसूली जाएगी.

जुर्माने से लेकर वेतन पर्ची तक व्यवस्था तय

किसी कर्मचारी पर जुर्माना लगाने से पहले नियोक्ता को आरोप और उसका आधार लिखित रूप में बताना होगा. कर्मचारी को जवाब देने के लिए सात दिन का समय मिलेगा. आरोप साबित होने के बाद ही जुर्माना लगाया जा सकेगा. जुर्माने, कटौती और वसूली से मिली राशि का इस्तेमाल श्रम विभाग से अनुमोदित कल्याणकारी योजनाओं में किया जाएगा. नई व्यवस्था में वेतन पर्ची का प्रारूप भी तय किया गया है. इसमें कर्मचारी का यूएएन, बैंक खाता, मूल वेतन, महंगाई भत्ता, अन्य भत्ते, उपस्थिति, ओवरटाइम, सकल वेतन, पीएफ-ईएसआई समेत कटौतियां और हाथ में मिलने वाली शुद्ध मजदूरी दर्ज होगी. कामगारों को अकुशल, अर्धकुशल, कुशल और अतिकुशल श्रेणियों में वर्गीकृत करने का भी प्रावधान किया गया है.

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By अंजली कश्यप

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