रात होते ही तेंदुए-बाघ का खौफ, यूपी के 124 गांवों में दूर होगा अंधेरा, अब सोलर-एलईडी लाइटों से रोशन होंगी पंचायतें...

शाम ढलते ही जंगल से सटे गांवों में जंगली जानवरों का डर अब कम होगा. यूपी के 124 गांवों में जल्द ही सोलर और एलईडी लाइटें लगेंगी, जिससे अंधेरा दूर होगा और सुरक्षा बढ़ेगी. यह पहल मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में मदद करेगी.

UP News: शाम ढलते ही जंगल से सटे गांवों में पसरा अंधेरा और जंगली जानवरों का डर अब कम होगा. बाघ और तेंदुए के खौफ के बीच रहने वाले कतर्नियाघाट क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए राहत की पहल शुरू हो गई है. बहराइच में जंगल से सटे गांव अब सोलर और एलईडी लाइटों की रोशनी से जगमग होंगे. इससे रात में ग्रामीणों की आवाजाही आसान होगी और वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखना भी संभव होगा.

पहले चरण में चमकेगी 124 ग्राम पंचायतें

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार वन विभाग के आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस विशेष अभियान के पहले चरण में कुल 124 गांवों का चयन किया गया है. कतर्नियाघाट रेंज से सटे इन संवेदनशील इलाकों में 1500 हाई-टेक सोलर और एलईडी स्ट्रीट लाइटें लगाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है. प्रमुख चौराहों, मुख्य रास्तों और जंगली रास्तों से सटी आबादी वाले हिस्सों में लाइटें लगने से रात के अंधेरे का फायदा उठाकर रिहायशी इलाकों का रुख करने वाले वन्यजीवों के मूवमेंट पर आसानी से नजर रखी जा सकेगी.

सरकारी खजाना नहीं, इस फंड से हो रहा काम

आमतौर पर ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए सरकारी बजट या पंचायत फंड पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे परियोजनाओं में समय लगता है. लेकिन इस बार बहराइच वन विभाग ने अलग रास्ता चुना है. प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) के अनुसार, इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए सरकारी बजट की जगह निजी क्षेत्र का सहयोग लिया गया है. सिग्नीफाई इनोवेशन इंडिया लिमिटेड (पूर्व नाम फिलिप्स लाइटिंग) कंपनी अपने सीएसआर (Corporate Social Responsibility) फंड के जरिए इस सामाजिक सरोकार के काम को धरातल पर उतार रही है.

मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने की कोशिश

कतर्नियाघाट क्षेत्र में इंसानों और वन्यजीवों के बीच टकराव की घटनाएं सामने आती रही हैं. ऐसे में गांवों में रोशनी बढ़ाना इस समस्या को कम करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है. उम्मीद है कि रोशनी बढ़ने से ग्रामीणों को सुरक्षा का एहसास होगा और रात के समय वन्यजीवों की गतिविधियों पर भी नजर रखना आसान होगा.

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By अंजली कश्यप

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