UP News: उत्तर प्रदेश में सिंचाई विभाग के 5 इंजीनियरों पर FIR दर्ज की गई है, इसके साथ ही एक ठेकेदार के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया गया है. यह कार्रवाई 16.69 करोड़ के कथित डीवॉटरिंग घोटाले में हुई है. लखनऊ स्थित विजिलेंस थाना में सिंचाई विभाग के पांच इंजीनियरों और एक निजी ठेकेदार के खिलाफ भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश का मामला दर्ज किया गया है. आरोप है कि विभागीय निर्धारित दर से अधिक भुगतान की मंजूरी देकर सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया और ठेकेदार को अनुचित आर्थिक लाभ दिलाया गया.
निर्धारित दर से ज्यादा भुगतान का आरोप
एफआईआर के अनुसार, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता कौशल कुमार, सहायक अभियंता संजय कुमार, यशवंत सिंह और मनोज कुमार अग्रवाल, जूनियर इंजीनियर सुखबीर सिंह तथा मुजफ्फरनगर के ठेकेदार राजबीर सिंह को आरोपी बनाया गया है. आरोप है कि डीवॉटरिंग कार्य के लिए विभाग द्वारा निर्धारित दर से अधिक भुगतान की मंजूरी दी गई, जिससे ठेकेदार को अनुचित आर्थिक लाभ पहुंचा और राज्य सरकार को करीब 16.69 करोड़ का नुकसान हुआ.
2022 की जांच के बाद दर्ज हुई एफआईआर
हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, विजिलेंस निरीक्षक रतन लाल कनौजिया की ओर से दर्ज एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता लागू होने से पहले के मामले के कारण भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश) और 420 (धोखाधड़ी) के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की संबंधित धाराएं लगाई गई हैं. यह कार्रवाई सितंबर 2022 में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कराई गई खुली जांच में प्रथम दृष्टया भ्रष्टाचार के साक्ष्य मिलने के बाद की गई. सरकार ने 19 जून 2026 को अभियोजन की स्वीकृति देने के बाद विजिलेंस ने मामला दर्ज किया.
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