UP Flood: यूपी में बाढ़ का खतरा अभी टला नहीं, कहीं घट रही गंगा तो कहीं नई आफत, 5 जिलों में 11 हजार हेक्टेयर से ज्यादा डूबा

UP Flood: उत्तर प्रदेश में बाढ़ का खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है. कुछ इलाकों में गंगा का जलस्तर कम होने से राहत है, वहीं टोंस नदी के बढ़ते पानी ने नई चिंता पैदा कर दी है. शुरुआती बाढ़ में प्रदेश के पांच जिलों की 11 हजार हेक्टेयर से अधिक जमीन जलमग्न हो गई थी.

UP Flood News: उत्तर प्रदेश में बाढ़ की स्थिति को लेकर राहत और चिंता दोनों की तस्वीर सामने आ रही है. कुछ इलाकों में गंगा का जलस्तर नीचे आने लगा है, लेकिन दूसरी तरफ टोंस नदी के बढ़ते पानी ने नई चिंता पैदा कर दी है. प्रयागराज समेत कई इलाकों में प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर रख रहा है. वहीं शुरुआती बाढ़ के दौरान प्रदेश के पांच जिलों में 11 हजार हेक्टेयर से ज्यादा जमीन जलमग्न होने की बात सामने आई थी.

कहीं गंगा का पानी घटा, तो कहीं फिर बढ़ा खतरा

बाढ़ प्रभावित इलाकों में पिछले कुछ दिनों से जलस्तर में उतार-चढ़ाव जारी है. ताजा अपडेट के मुताबिक गंगा का जलस्तर दो स्थानों पर घटा है, जिससे कुछ इलाकों को राहत मिली है. हालांकि टोंस नदी के बढ़ते जलस्तर ने नई चुनौती खड़ी कर दी है. ऐसे में प्रशासन ने निगरानी और राहत व्यवस्था बनाए रखी है.

प्रयागराज में गंगा-यमुना फिर बढ़ने लगीं

प्रयागराज में भी गंगा और यमुना के जलस्तर में दोबारा बढ़ोतरी दर्ज की गई है. हालांकि दोनों नदियां अभी खतरे के निशान से काफी नीचे हैं और जिले के सभी तटबंध सुरक्षित बताए गए हैं. कछारी इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता जरूर बढ़ी है. छतनाग में गंगा का जलस्तर 81.09 मीटर और नैनी में यमुना का स्तर 81.60 मीटर दर्ज किया गया था.

टोंस और मंदाकिनी ने बढ़ाई चिंता

इससे पहले टोंस और मंदाकिनी में आए उफान का असर गंगा और यमुना पर भी पड़ा था. प्रयागराज के कछारी इलाकों के अलावा कोरांव और मेजा के कई गांव प्रभावित हुए. कुछ जगहों पर घरों में पानी तक पहुंच गया था. ताजा स्थिति में गंगा के कुछ स्थानों पर पानी घटने के बावजूद टोंस को लेकर प्रशासन सतर्क है.

वाराणसी में अभी भी घाटों पर असर

वाराणसी में गंगा का जलस्तर लंबे समय से सामान्य स्थिति में नहीं लौट पाया है. बढ़ते जलस्तर को देखते हुए शहर के सभी 84 घाटों पर नौका संचालन बंद रखा गया है. श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुरक्षा को देखते हुए नावों के संचालन पर रोक लगाई गई है.

गाजीपुर में गंगा का पानी घटा, लेकिन चेतावनी बिंदु से ऊपर

गाजीपुर में भी गंगा का जलस्तर घटने की खबर है. आठ सितंबर को शाम के समय जलस्तर 62.970 मीटर दर्ज किया गया था, जो चेतावनी बिंदु 62.100 मीटर से ऊपर था. बाढ़ प्रभावित परिवारों को प्रशासन की ओर से राहत सामग्री दी गई और 551 राहत किट वितरित की गईं.

कानपुर में पांडु नदी से अभी परेशानी

जहां पूर्वांचल के कुछ हिस्सों में पानी घटने से राहत के संकेत हैं, वहीं कानपुर में पांडु नदी की वजह से परेशानी बनी हुई है. कई बस्तियों में पानी घुसा था और 500 से ज्यादा घर प्रभावित बताए गए. करीब एक हजार लोगों को घरों की छत या ऊपरी मंजिल पर रहने के लिए मजबूर होना पड़ा.

चित्रकूट में राहत और बचाव पर जोर

चित्रकूट में भीषण बाढ़ के बाद प्रशासन की ओर से राहत और पुनर्वास का काम जारी है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने छह सितंबर को बाढ़ की स्थिति, राहत-बचाव और प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास की समीक्षा की. इसी दौरान बाढ़ प्रभावित 800 परिवारों को राहत सामग्री भी वितरित की गई.

11 हजार हेक्टेयर से ज्यादा जमीन हुई थी जलमग्न

बाढ़ के शुरुआती दौर में गंगा-यमुना समेत कई नदियों के उफान से प्रदेश के पांच जिलों में 11 हजार हेक्टेयर से ज्यादा जमीन जलमग्न होने की रिपोर्ट सामने आई थी. खेतों में पानी भरने से फसलों को भी नुकसान पहुंचा. अब कुछ क्षेत्रों में जलस्तर कम होने लगा है, लेकिन नदियों के उतार-चढ़ाव के कारण खतरा पूरी तरह खत्म नहीं माना जा रहा है.

प्रशासन की नजर, लोगों को सतर्क रहने की सलाह

उत्तर प्रदेश में बाढ़ की स्थिति फिलहाल एक जैसी नहीं है. कुछ इलाकों में पानी कम होने से राहत मिल रही है, तो कुछ जगह नई नदियों के बढ़ते जलस्तर ने चिंता बढ़ा दी है. ऐसे में प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी कर रहा है और राहत-बचाव व्यवस्था को तैयार रखा गया है. यूपी राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण भी बाढ़ से जुड़ी तैयारी और आपदा प्रबंधन व्यवस्था की निगरानी करता है.

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By लक्की कुमारी

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