UP Fish Farming: उत्तर प्रदेश में किसान अब सिर्फ पारंपरिक खेती पर निर्भर नहीं रहना चाहते. आमदनी बढ़ाने के लिए वे खेती के साथ दूसरे कामों की तरफ भी रुख कर रहे हैं. ऐसे में मछली पालन यानी फिश फार्मिंग ग्रामीण इलाकों में कमाई का अच्छा जरिया बनता जा रहा है. प्रदेश में ताजी मछली की मांग लगातार बनी हुई है और बढ़ते दामों की वजह से इसका कारोबार किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकता है. सरकार भी किसानों और ग्रामीण युवाओं को इस कारोबार से जोड़ने के लिए आर्थिक मदद दे रही है.
निजी तालाब हो या ग्राम सभा का पट्टा, मिल सकती है मदद
मछली पालन शुरू करने के लिए आपके पास निजी तालाब हो या ग्राम सभा का पट्टा, दोनों स्थितियों में सरकारी योजनाओं का फायदा लिया जा सकता है. यहां तक कि छोटे स्तर से शुरुआत करने वाले लोगों के लिए भी सहायता का प्रावधान है. सही तकनीक, सरकारी योजनाओं और बेहतर मार्केटिंग को अपनाकर किसान अपनी आय को बढ़ा सकते हैं. सरकार का फोकस किसानों के साथ ग्रामीण युवाओं को भी इस क्षेत्र में स्वरोजगार का मौका देने पर है.
तालाब की खुदाई से बायोफ्लॉक तक मिल रही सब्सिडी
अगर आप मछली पालन शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं तो सरकार कई स्तरों पर आर्थिक मदद दे रही है. नए तालाब की खुदाई, पुराने तालाब की मरम्मत, सोलर पंप लगाने और आधुनिक बायोफ्लॉक यूनिट तैयार करने जैसे कामों पर 40 से 60 फीसदी तक सब्सिडी दी जा रही है. सामान्य वर्ग के लाभार्थियों को परियोजना लागत का 40 फीसदी और महिलाओं तथा एससी-एसटी वर्ग के लोगों को 60 फीसदी तक वित्तीय सहायता मिलने का प्रावधान है.
मछली के बीज और फीड पर भी मिलती है मदद
मछली पालन शुरू करने के बाद शुरुआती खर्च भी कम नहीं होता. मछलियों के अच्छे बीज यानी फिंगरलिंग्स, प्रोटीन युक्त फीड और जरूरी दवाइयों पर भी सरकार की ओर से इनपुट सब्सिडी दी जाती है. वहीं, अगर कारोबार के लिए वर्किंग कैपिटल की जरूरत पड़ती है तो किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए कम ब्याज दर पर लोन लिया जा सकता है. इससे किसान जरूरी खर्च संभालते हुए अपना मछली पालन कारोबार आगे बढ़ा सकते हैं.
मछली की ढुलाई के लिए 25 हजार रुपये तक की मदद
मछली पालन में सिर्फ उत्पादन ही नहीं, उसे सही समय पर बाजार तक पहुंचाना भी जरूरी है. तालाब से मंडी तक मछली ले जाने में देरी होने पर उसके खराब होने का खतरा रहता है और किसान को कम कीमत पर बेचने की मजबूरी हो सकती है. इसी परेशानी को देखते हुए सरकार मछली की ढुलाई और मार्केटिंग के लिए 25 हजार रुपये तक का वित्तीय अनुदान दे रही है. यह सहायता आइस बॉक्स युक्त साइकिल या टू-व्हीलर सेटअप की खरीद के लिए दी जाती है.
आइस बॉक्स से मछली रहेगी ताजी, बाजार में मिलेगा बेहतर दाम
आइस बॉक्स की सुविधा होने से तालाब से बाजार तक मछलियों को ताजा रखने में मदद मिलती है. इससे किसान जल्दबाजी में कम कीमत पर मछली बेचने के बजाय उसे बेहतर बाजार तक पहुंचा सकते हैं. इस योजना से ट्रांसपोर्ट का खर्च कम करने में भी मदद मिलती है. साथ ही, ग्रामीण युवाओं के लिए मछली की सप्लाई और डिलीवरी से जुड़ा अपना छोटा कारोबार शुरू करने का रास्ता भी खुलता है.
ऐसे करें सरकारी योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन
सरकारी योजना और सब्सिडी का लाभ लेने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के आधिकारिक मत्स्य विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है. आवेदन के लिए आधार कार्ड, बैंक पासबुक, पासपोर्ट साइज फोटो, मोबाइल नंबर और जमीन या तालाब के पट्टे से जुड़े दस्तावेज जैसे कागजात की जरूरत पड़ती है. पोर्टल पर लॉगिन करने के बाद विभागीय योजनाओं में जाकर अपनी पात्रता के अनुसार संबंधित योजना चुनें और मांगी गई जानकारी भरकर आवेदन जमा करें.
आधिकारिक मत्स्य विभाग पोर्टल: fisheries.up.gov.in
दस्तावेजों की जांच के बाद खाते में आएगी सब्सिडी
ऑनलाइन आवेदन जमा होने के बाद जिला मत्स्य अधिकारी कार्यालय की ओर से दस्तावेजों की जांच की जाती है. इसके बाद जरूरत के अनुसार जमीनी सत्यापन भी किया जाता है. आवेदन और सत्यापन में सब कुछ सही पाए जाने पर स्वीकृत सब्सिडी की रकम लाभार्थी के बैंक खाते में डीबीटी के जरिए सीधे ट्रांसफर की जाती है. इसलिए आवेदन करते समय सभी जानकारी और दस्तावेज सही तरीके से देना जरूरी है.
