अब खेती होगी आसान! किसानों को अगस्त से सहकारी समितियों से मिलेगा लोन

UP News: करीब 30 साल से बंद पड़ी सहकारी समितियों की ऋण वितरण व्यवस्था अगस्त से फिर से शुरू होने जा रही है. अब किसानों को खेती के लिए महंगे ब्याज पर साहूकारों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. ऑनलाइन प्रक्रिया और कड़ी निगरानी से पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी.

UP News: करीब तीन दशक बाद किसानों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है. अब खेती के लिए महंगे ब्याज पर साहूकारों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. अगस्त से सहकारी समितियों के जरिए किसानों को सस्ती ब्याज दर पर कृषि ऋण मिलना शुरू होगा. सरकार ने पहले चरण में 14 ब्लॉकों की 32 समितियों को इसके लिए तैयार कर दिया है. नई व्यवस्था से खेती की लागत घटने, उत्पादन बढ़ने और किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की उम्मीद जताई जा रही है.

अगस्त से किसानों को मिलेगा सहकारी समितियों से लोन

करीब 30 साल से बंद पड़ी सहकारी समितियों की ऋण वितरण व्यवस्था अब दोबारा शुरू की जा रही है. पहले चरण में जिले के 14 ब्लॉकों की 32 सहकारी समितियों का चयन किया गया है और इनके लिए धनराशि भी उपलब्ध करा दी गई है. अगस्त महीने से किसान इन समितियों में आवेदन कर खेती के लिए सस्ते ब्याज पर ऋण प्राप्त कर सकेंगे. इस पहल का मकसद किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और खेती के लिए समय पर पूंजी उपलब्ध कराना है.

ऑनलाइन होगी पूरी प्रक्रिया, पारदर्शिता पर रहेगा जोर

कर्ज वितरण में किसी तरह की गड़बड़ी या बिचौलियों की भूमिका खत्म करने के लिए विभाग ने पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बना दिया है. किसानों के आवेदन से लेकर ऋण वितरण तक की हर जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज होगी. विभाग सहकारी समितियों को बैंक की तर्ज पर संचालित करने की तैयारी कर रहा है, ताकि किसानों को बेहतर और पारदर्शी सेवाएं मिल सकें.

भ्रष्टाचार रोकने के लिए बनाई गई निगरानी व्यवस्था

ऋण वितरण प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए जिला मुख्यालय के साथ-साथ संबंधित ब्लॉकों में भी नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है. इन अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी कि किसानों को बिना किसी परेशानी के समय पर ऋण मिले और पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से संचालित हो. इससे किसानों को बिचौलियों और अनावश्यक दिक्कतों से राहत मिलने की उम्मीद है.

1995 के बाद बंद हो गई थी ऋण वितरण की व्यवस्था

एक समय ऐसा था जब सहकारी समितियां किसानों की सबसे बड़ी ताकत मानी जाती थीं. खाद, बीज, उर्वरक और खेती के लिए नकद ऋण यहीं से मिलता था. लेकिन वर्ष 1995 के बाद समितियों से ऋण वितरण पूरी तरह बंद हो गया. इसके बाद किसानों को खेती के लिए महंगे ब्याज पर साहूकारों या निजी स्रोतों से कर्ज लेना पड़ा, जिससे खेती की लागत लगातार बढ़ती गई और मुनाफा कम होता गया. आर्थिक दबाव बढ़ने के कारण कई किसान कर्ज के बोझ तले दब गए और बड़ी संख्या में युवाओं ने खेती छोड़कर रोजगार के लिए पलायन करना शुरू कर दिया.

खेती की लागत घटेगी, उत्पादन बढ़ने की उम्मीद

सरकार का मानना है कि सहकारी समितियों से समय पर सस्ता ऋण मिलने से किसान बेहतर गुणवत्ता वाले बीज, उर्वरक, कीटनाशक और सिंचाई की व्यवस्था कर सकेंगे. इससे खेती की लागत कम होगी और फसल उत्पादन में लगभग 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी होने की उम्मीद है. माना जा रहा है कि यह पहल किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम साबित होगी. 

प्रथम चरण में 32 सहकारी समितियों को मिलेगा फंड, फिर सभी समितियों तक पहुंचेगी सुविधा

सहकारी विभाग ने पहले चरण में चिन्हित 32 सहकारी समितियों को जल्द से जल्द धन उपलब्ध कराने की तैयारी पूरी कर ली है. इसके बाद चरणबद्ध तरीके से बाकी सभी समितियों को भी फंड जारी किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक किसान इस योजना का लाभ उठा सकें.

इस संबंध में सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक (एआर) कोऑपरेटिव सूर्यनारायण मिश्र ने बताया कि समिति सचिवों को गांव-गांव जाकर योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करने और किसानों को जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं. उन्होंने कहा कि योजना का उद्देश्य किसानों तक खेती के लिए कम ब्याज दर पर फसली ऋण समय पर पहुंचाना है, जिससे उन्हें खेती के लिए महंगे ब्याज पर कर्ज लेने की जरूरत न पड़े और कृषि कार्य आसानी से हो सके.

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Published by: Lucky Kumari

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