UP News: उत्तर प्रदेश में डॉक्टर बनने का सपना देखने वाले कई लोगों के लिए BAMS की डिग्री अब मुसीबत का कारण बन गई है. जिन डिग्रियों के आधार पर वे खुद को डॉक्टर मानकर क्लीनिक और अस्पताल चला रहे थे, जांच में उनके फर्जी होने का मामला सामने आया है. यूपी में ऐसी कथित फर्जी BAMS डिग्री हासिल करने वाले 41 लोगों का पंजीयन रद्द किया गया है. इनमें अवध और पूर्वांचल क्षेत्र के कई लोग शामिल बताए गए हैं, जिन्होंने डॉक्टर बनने की उम्मीद में अपनी जमा-पूंजी तक दांव पर लगा दी थी.
जेवर बेचे, कर्ज लिया, फिर भी हाथ लगी फर्जी डिग्री
अवध क्षेत्र की एक महिला के अनुसार, BAMS में दाखिला दिलाने के नाम पर उनसे लाखों रुपये लिए गए. कोचिंग के दौरान कानपुर में संपर्क में आए एक व्यक्ति ने हरियाणा के कॉलेज में दाखिले का भरोसा दिलाया और करीब 15 लाख रुपये की बात तय हुई. महिला ने अपने और सास के जेवर बेचकर रकम जुटाई. बाद में हाजिरी पूरी कराने के नाम पर अतिरिक्त पैसे मांगे गए, जिसके लिए कर्ज भी लेना पड़ा. वर्ष 2021 में उन्हें प्रमाणपत्र और पंजीयन से जुड़े दस्तावेज सौंपे गए, लेकिन 2025 में नोटिस मिलने के बाद कथित फर्जीवाड़े की जानकारी सामने आई.
मां के गहने और पैतृक जमीन बेचकर जुटाए 15 लाख रुपये
पूर्वांचल के एक युवक ने भी डॉक्टर बनने के लिए अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को दांव पर लगा दिया. युवक के अनुसार, एक व्यक्ति ने विभिन्न राज्यों के कॉलेजों में BAMS में दाखिला कराने का भरोसा दिलाया. करीब 15 लाख रुपये जुटाने के लिए मां के गहने बेचने के साथ गांव की पैतृक जमीन का हिस्सा भी बेचना पड़ा. वर्ष 2014 में दाखिले के बाद पढ़ाई और परीक्षा की प्रक्रिया पूरी हुई और पांच साल बाद डिग्री मिलने पर युवक ने यूपी में पंजीयन कराकर अपना अस्पताल शुरू कर दिया.
2025 के नोटिस ने खोला राज, क्लीनिक और भविष्य दोनों संकट में
अप्रैल 2025 में जांच और नोटिस की कार्रवाई शुरू होने के बाद कई डिग्रीधारकों को अपनी डिग्री के फर्जी होने की जानकारी मिली. अवध की महिला ने अपनी डिस्पेंसरी बंद कर दस्तावेज संबंधित कार्यालय में जमा कर दिए. वहीं पूर्वांचल के युवक के सामने भी बड़ा संकट खड़ा हो गया, क्योंकि जिस संस्थान और नेटवर्क के जरिए उसने पढ़ाई और डिग्री हासिल की थी, उसके बारे में सवाल उठ चुके थे. कथित बिचौलियों और संस्थानों की भूमिका सामने आने के बाद अब पीड़ितों के सामने अपना पेशा, आर्थिक भविष्य और कानूनी कार्रवाई तीनों की चिंता है.
डॉक्टर बनने की चाह में ठगे गए या फर्जीवाड़े में बने आरोपी?
इस पूरे मामले ने उन लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, जिन्होंने डॉक्टर बनने के लिए लाखों रुपये खर्च किए और अपनी पारिवारिक संपत्ति तक बेच दी. अब फर्जी डिग्री मामले में पंजीयन रद्द होने के बाद ऐसे लोगों पर कानूनी कार्रवाई की तलवार भी लटक रही है. जांच एजेंसियों के सामने यह भी अहम सवाल है कि डिग्री हासिल करने वाले लोग कथित ठगी के शिकार हैं या फिर फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल में उनकी कोई भूमिका थी. फिलहाल, 41 लोगों का पंजीयन रद्द होने के बाद इस कथित फर्जी डिग्री नेटवर्क की जांच और गंभीर हो गई है.
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