UP Politics: उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने मथुरा दौरे के दौरान योगी सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला. बांके बिहारी कॉरिडोर परियोजना को लेकर उन्होंने आरोप लगाया कि विकास के नाम पर वृंदावन के लोगों को उजाड़ा जा रहा है. अजय राय ने कहा कि कांग्रेस धार्मिक नगरी की पहचान और स्थानीय लोगों के हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार की कार्रवाई का विरोध करेगी.
कॉरिडोर के नाम पर वृंदावन को तहस-नहस किया जा रहा
अजय राय ने आरोप लगाया कि सरकार कॉरिडोर परियोजना के नाम पर वृंदावन में बड़े बदलाव कर रही है, जिसका असर स्थानीय लोगों और क्षेत्र की मूल पहचान पर पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन इसके लिए लोगों को विस्थापित करना उचित नहीं है. कांग्रेस नेता ने सरकार से स्थानीय हितों को प्राथमिकता देने की मांग की.
मंदिर के खजाने से खर्च पर भी उठाए सवाल
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कॉरिडोर परियोजना से जुड़ी संपत्तियों की रजिस्ट्री और खर्च को लेकर भी सवाल खड़े किए. उन्होंने आरोप लगाया कि इसके लिए बांके बिहारी मंदिर के खजाने से धन खर्च किया जा रहा है. अजय राय ने इस मुद्दे पर पारदर्शिता की मांग करते हुए कहा कि सरकार को परियोजना के खर्च और प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए.
यमुना की सफाई और जलभराव पर भाजपा को घेरा
अजय राय ने मथुरा-वृंदावन की बुनियादी समस्याओं को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि लंबे समय से यमुना की सफाई के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन नदी की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ. साथ ही उन्होंने बारिश के दौरान मथुरा में होने वाले जलभराव का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सरकार को धार्मिक और पर्यटन स्थलों की बुनियादी व्यवस्थाओं पर गंभीरता से काम करना चाहिए.
2027 चुनाव में युवाओं को मौका देने का संकेत
विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी को लेकर अजय राय ने कहा कि कांग्रेस युवाओं को भी आगे बढ़ाने पर विचार कर रही है. उन्होंने संकेत दिया कि राजनीतिक क्षमता और जनाधार रखने वाले युवा नेताओं को टिकट वितरण में मौका मिल सकता है. गठबंधन के सवाल पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसी दल के साथ चुनाव लड़ेगी या अकेले, इसका अंतिम निर्णय पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व करेगा.
मथुरा-वृंदावन बना 2027 की राजनीति का नया मैदान
यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले मथुरा-वृंदावन के धार्मिक और विकास से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक टकराव तेज होता दिख रहा है. एक ओर सरकार कॉरिडोर और धार्मिक पर्यटन से जुड़ी परियोजनाओं को विकास का मॉडल बता रही है, वहीं विपक्ष स्थानीय लोगों के विस्थापन, खर्च और बुनियादी समस्याओं को लेकर सवाल उठा रहा है. ऐसे में आने वाले समय में बांके बिहारी कॉरिडोर का मुद्दा पश्चिमी यूपी की राजनीति में बड़ी बहस बन सकता है.
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