दिसंबर में थी काजल की शादी, चाय की चुस्की के बीच गिरी छत, कानपुर में उठी पिता और तीन बेटियों की एक साथ अर्थी

कानपुर में एक दिल दहला देने वाली घटना में, बारिश के दौरान एक मकान की छत गिरने से पिता और उनकी तीन बेटियों की मौत हो गई. जिस घर में कुछ महीने बाद बेटी की शादी के गीत गूंजने थे, वहां अब मातम पसरा है.

UP News: जिस घर में कुछ महीनों बाद बेटी की शादी के गीत गूंजने थे, वहां अब मातम पसरा है. दिसंबर में काजल की शादी होनी थी. घर में शादी की तैयारियों और आने वाले सुखद दिनों के सपने संजोए जा रहे थे. लेकिन बारिश के बीच एक ऐसा हादसा हुआ, जिसने पूरे परिवार की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं. चाय की चुस्कियों के बीच अचानक मकान की छत भरभराकर नीचे आ गिरी. देखते ही देखते पिता और उनकी तीन बेटियां मलबे में दब गईं. कुछ देर पहले तक जिस घर में अपनों की आवाजें थीं, वहां हादसे के बाद सिर्फ चीख-पुकार और अपनों को खोने का दर्द रह गया. आज उसी घर से एक साथ चार अर्थियां उठीं, जहां कुछ घंटे पहले तक बेटियों की हंसी और दिसंबर में होने वाली शादी की खुशियां गूंज रही थीं.

एक झटके में उजड़ गया परिवार

कानपुर के घाटमपुर क्षेत्र में बारिश के दौरान दो मंजिला मकान भरभराकर गिर गया. हादसा इतना अचानक हुआ कि घर के अंदर मौजूद लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला. छत और मकान का मलबा नीचे आ गिरा और उसके नीचे परिवार के लोग दब गए. हादसे की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और मलबा हटाने में जुट गए. घटना की तस्वीर में भी बड़ी संख्या में लोगों को राहत और बचाव में जुटे देखा जा सकता है.

चाय की चुस्की के बीच मौत बनकर गिरी छत

हिरनी गांव में पिछले कई दिनों से बारिश हो रही थी, इसी बीच रविवार को मुकेश अपने परिवार के साथ कच्चे मकान में मौजूद थे. अचानक दो खंड का मकान भरभराकर ढह गया. छत और दीवारों के मलबे में मुकेश और उनकी चारों बेटियां दब गईं. मकान गिरने की आवाज सुनकर आसपास के लोग दौड़कर पहुंचे. किसी को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर एक परिवार को कैसे बचाया जाए. ग्रामीणों ने बिना देर किए मलबा हटाना शुरू कर दिया और पुलिस-प्रशासन को सूचना दी.

दिसंबर में होनी थी काजल की शादी

इस हादसे की सबसे दर्दनाक बात यह है कि मृतकों में काजल भी शामिल थी, जिसकी शादी दिसंबर में होनी थी. जिस बेटी के हाथ पीले करने की तैयारी होनी थी, वही बेटी अब इस दुनिया में नहीं रही. परिवार के लिए आने वाला दिसंबर खुशियों का महीना बनने वाला था, लेकिन बारिश से हुए इस हादसे ने उन तमाम सपनों को मलबे में दबा दिया. काजल के साथ उसकी दो बहनों की भी मौत हो गई. पिता की मौत ने इस त्रासदी को और गहरा कर दिया.

जिस घर में दिसंबर की शादी की तैयारी थी, वहीं छा गया मातम

काजल परिवार की सबसे बड़ी बेटी है. परिजनों के मुताबिक उसकी शादी दिसंबर में होनी थी. शादी सामूहिक विवाह सम्मेलन के जरिए तय हुई थी. परिवार के लिए यह समय खुशियों से भरा होना था, लेकिन किस्मत ने ऐसा दर्द दिया कि शादी के सपने देखने वाला परिवार ही उजड़ गया. पिता मुकेश मजदूरी करके परिवार का पालन-पोषण करते थे. अब उनकी तीन बेटियां दुनिया छोड़ चुकी हैं.

मलबे में दबे अपनों को निकालने में जुटे लोग

मकान गिरने की खबर के बाद आसपास के लोग घटनास्थल पर पहुंचे. मलबे के बीच अपनों की तलाश और उन्हें बाहर निकालने की कोशिश शुरू हुई. हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल रहा. लोग अपने स्तर पर राहत-बचाव में जुटे रहे. इस दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया. जिस घर में कुछ समय पहले तक परिवार साथ बैठकर चाय पी रहा था, वहीं कुछ ही देर बाद मलबे के ढेर के बीच जिंदगी तलाशनी पड़ी.

चार मौतों ने छोड़ दिया जिंदगी भर का दर्द

एक ही परिवार के पिता और तीन बेटियों की मौत ने हर किसी को स्तब्ध कर दिया. बेटियों के चले जाने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. खासकर काजल की शादी को लेकर परिवार ने जो सपने देखे थे, वे हादसे के साथ ही बिखर गए. दिसंबर में जिस घर से बेटी की विदाई होनी थी, वहां अब उसकी अर्थी उठने की कल्पना ही दिल दहला देने वाली है. बारिश थम गई, मलबा हट गया, लेकिन परिवार के लिए यह हादसा जिंदगी भर का ऐसा जख्म छोड़ गया, जो शायद कभी नहीं भर सकेगा.

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लेखक के बारे में

By राधेश्याम कुशवाहा

राधेश्याम कुशवाहा को पत्रकारिता की क्षेत्र में 13 साल का अनुभव है. इस सफर की शुरुआत उन्होंने राज एक्सप्रेस न्यूज पेपर भोपाल से की. यहां से आगे बढ़ते हुए समय जगत, राजस्थान पत्रिका, हिंदुस्तान न्यूज पेपर के बाद वर्तमान में प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में यूपी डेस्क का नेतृत्व कर रहे हैं. इन्हें धर्म-अध्यात्म, ज्योतिष, राजनीति, अपराध और सकारात्मक खबरों की रिपोर्टिंग व लेखन में विशेष रुचि रखते हैं.

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