UP News: सरयू की कटान से तबाह हो रहे गोपालनगर टांडी में आखिरकार प्रशासन की नजर फिर पहुंची. जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह और पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह गुरुवार को बाढ़ प्रभावित गांव पहुंचे और राहत कार्यों की जमीनी हकीकत परखी. डीएम ने राहत केंद्र में पीड़ितों से बातचीत की, भोजन-पानी की व्यवस्था देखी और अधिकारियों को राहत से कोई भी पात्र व्यक्ति वंचित न रहने का निर्देश दिया. लेकिन इस दौरे के साथ एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो गया है—जब 14 जुलाई के बाद से गांव में लगातार घर और स्कूल सरयू में समाते रहे, तब डीएम दोबारा 44 दिन बाद ही क्यों पहुंचे?
14 जुलाई को आखिरी बार पहुंचे थे डीएम, फिर बढ़ती गयी तबाही
उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, डीएम मंगला प्रसाद सिंह 14 जुलाई के आसपास गोपालनगर टांडी पहुंचे थे. उस समय भी सरयू के कटान ने गांव में भारी तबाही मचा रखी थी. छह मकान नदी में समा चुके थे और करीब एक दर्जन मकान कटान के मुहाने पर थे. ग्रामीण प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जता रहे थे और प्रभावी कटानरोधी कार्रवाई की मांग कर रहे थे. इसके बाद गांव में हालात लगातार बिगड़ते गये. 19 जुलाई को तीन और मकान सरयू में समा गये. ग्रामीणों को अपने हाथों से घर तोड़कर सामान सुरक्षित स्थानों पर ले जाना पड़ा.
24 जुलाई: स्कूल भी कटान की जद में, 180 बच्चों को किया गया शिफ्ट
कटान का दायरा बढ़ता गया तो 24 जुलाई तक प्राथमिक विद्यालय भी खतरे की जद में आ गया. प्रशासन को स्कूल बंद कर वहां पढ़ने वाले करीब 180 बच्चों को दूसरे विद्यालय में शिफ्ट करना पड़ा. उस समय एसडीएम लगातार गांव का निरीक्षण कर रहे थे और लोगों को मकान खाली कर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही थी.
28 जुलाई: जिस स्कूल में बच्चे पढ़ते थे, उसका आधे से ज्यादा हिस्सा नदी में समा गया
इसके महज चार दिन बाद 28 जुलाई को प्राथमिक विद्यालय का आधे से अधिक हिस्सा सरयू में समा गया. रिपोर्ट के अनुसार तब तक एक दर्जन से अधिक रिहायशी मकान भी नदी की भेंट चढ़ चुके थे. गांव के कई अन्य मकान कटान के मुहाने पर पहुंच गये थे. यानी जुलाई के दूसरे पखवाड़े में ही गांव की तस्वीर लगातार बदल रही थी. घर उजड़ रहे थे, स्कूल नदी में जा रहा था और ग्रामीण पलायन कर रहे थे. बावजूद इसके डीएम का अगला प्रत्यक्ष दौरा अब 27 अगस्त को सामने आया है.
अगस्त में भी नहीं थमा सरयू का कहर, एक के बाद एक उजड़ते रहे आशियाने
5 अगस्त को 24 घंटे में चार पक्के मकान नदी में समा गये. इन मकानों में रहने वाले परिवार सुरक्षित स्थानों की ओर जाने लगे. कटान से बेघर हुए परिवारों के सामने रोशनी और पानी तक की समस्या सामने आयी. प्रशासन की ओर से गृह अनुदान और राहत सामग्री देने की बात कही गयी. इसके दो दिन बाद 7 अगस्त को दो और मकान सरयू में समा गये. कई परिवार अपने सामान और मवेशियों को लेकर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने को मजबूर हुए. 24 अगस्त तक भी गोपालनगर टांडी और आसपास के गांवों में सरयू की कटान गंभीर बनी हुई थी.
अब 100 लोगों को राहत, सात भूमिहीनों को पट्टा देने का निर्देश
गुरुवार को गांव पहुंचे डीएम ने प्राथमिक विद्यालय गोपालनगर टांडी में बने बाढ़ राहत केंद्र का निरीक्षण किया. पीड़ितों से भोजन, पेयजल और अन्य सुविधाओं की जानकारी ली. एसडीएम से राहत सामग्री वितरण की स्थिति पूछी गयी. अधिकारियों के अनुसार अब तक 100 लोगों को राहत सामग्री दी जा चुकी है. डीएम ने यह भी जानकारी ली कि बाढ़ पीड़ितों को मुआवजा मिला या नहीं. सात ऐसे पात्र लोगों की जानकारी सामने आयी, जिनके पास अपनी जमीन नहीं है. इस पर डीएम ने भूमिहीन बाढ़ पीड़ितों को नियमानुसार जमीन का पट्टा उपलब्ध कराने के निर्देश दिये. देवपुर मठिया में बाढ़ चौकी स्थापित करने का भी निर्देश दिया गया, ताकि जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों को तत्काल सहायता मिल सके.
29 अगस्त को बलिया आएंगे सीएम योगी, इससे पहले प्रशासन की बढ़ी सक्रियता
अब इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम हिस्सा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का 29 अगस्त को प्रस्तावित बलिया दौरा है. सीएम के कार्यक्रम को लेकर 26 अगस्त से ही जिला प्रशासन तैयारियों में जुटा है. डीएम और एसपी ने बांसडीह तहसील के गलाफरपुर स्थित कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया और सुरक्षा, यातायात, स्वागत तथा हेलीपैड की तैयारियों को समय से पूरा करने का निर्देश दिया. ऐसे में सीएम के बलिया आने से ठीक पहले 27 अगस्त को डीएम-एसपी का गोपालनगर टांडी पहुंचना सवाल खड़े करता है. गांव में 14 जुलाई के बाद घर उजड़े, स्कूल नदी में समाया, परिवार पलायन को मजबूर हुए और अगस्त में भी मकान लगातार सरयू की धारा में जाते रहे. अब प्रशासन की सक्रियता देखकर ग्रामीणों को उम्मीद है कि निरीक्षण के दौरान दिये गये निर्देश इस बार जमीन पर भी दिखाई देंगे.
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