‘अस्पताल’ में ही मौत ने दी दस्तक! 10 साल के उमेर पर गिरा छत का प्लास्टर, ICU में इलाज के दौरान मौत

UP News: आगरा के SN मेडिकल कॉलेज में एक दर्दनाक हादसा हुआ, जहां छत का प्लास्टर गिरने से 10 वर्षीय बच्चे की मौत हो गई. अस्पताल की जर्जर बिल्डिंग और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

UP News: आगरा के SN मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी के बच्चा वार्ड में शुक्रवार को बड़ा हादसा हो गया. छत का प्लास्टर गिरने से 10 वर्षीय उमेर गंभीर रूप से घायल हो गया. प्लास्टर उसके सिर और गर्दन पर गिरा, जिसके बाद उसे तत्काल ICU में भर्ती कराया गया. सीटी स्कैन कराने के बाद उसका इलाज शुरू किया गया, लेकिन देर रात उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई. हादसे के बाद वार्ड में भर्ती सभी बच्चों को आनन-फानन में बाल रोग विभाग में शिफ्ट कर दिया गया.

बच्चा वार्ड में भर्ती थे 15 मरीज, अचानक गिरा प्लास्टर

शुक्रवार को इमरजेंसी के बच्चा वार्ड में कुल 15 मरीज भर्ती थे. दोपहर करीब दो बजे खंदारी के नसीराबाद निवासी आमिर खान के 10 वर्षीय बेटे उमेर के ऊपर छत से करीब एक फीट चौड़ाई का प्लास्टर टूटकर गिर पड़ा. घटना के बाद वार्ड में चीख-पुकार मच गई. अन्य बच्चों के परिजन भी घबरा गए. स्टाफ ने तत्काल प्राचार्य और एसआईसी को घटना की जानकारी दी. इसके बाद सभी बच्चों को इमरजेंसी के पीछे स्थित बाल रोग विभाग में शिफ्ट कराया गया.

निमोनिया के इलाज के लिए दो दिन पहले भर्ती हुआ था उमेर

उमेर को निमोनिया की शिकायत थी और वह दो दिन पहले ही अस्पताल में भर्ती हुआ था. प्लास्टर गिरने से उसके सिर और गर्दन में चोट आई. गंभीर हालत को देखते हुए उसे ICU में भर्ती किया गया और सीटी स्कैन कराया गया. इलाज के दौरान देर रात उसकी मौत हो गई. बच्चे की मौत की खबर मिलते ही परिजनों में चीख-पुकार मच गई. इसके बाद परिजन शव लेकर घर चले गए. पास के बेड पर भर्ती एक अन्य बच्चे के परिजन राजा खान ने बताया कि प्लास्टर गिरने की तेज आवाज सुनकर वह घबरा गए और अपने बच्चे को तुरंत गोद में उठा लिया.

बाल रोग विभाग में भी गिरा प्लास्टर, जर्जर भवन पर सवाल

इमरजेंसी के पीछे स्थित बाल रोग विभाग के वार्ड में भी रात के समय प्लास्टर गिरने की घटना सामने आई. हालांकि, बच्चों के बेड उससे दूर होने के कारण किसी तरह का हादसा नहीं हुआ. बताया गया कि यह भवन भी जर्जर हालत में है और यहां आए दिन प्लास्टर गिरने की घटनाएं होती रहती हैं. इससे अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं.

1980 में बनी इमरजेंसी बिल्डिंग, कई बार हो चुकी मरम्मत

जानकारी के मुताबिक, SN मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी की इमारत 1980 में बनाई गई थी. भवन में 2004, 2014 और 2018 में मरम्मत का काम कराया गया था. इसके बावजूद इमारत की स्थिति खराब बताई जा रही है और कई जगहों पर टाइल्स भी उखड़ चुकी हैं. बच्चे की मौत के बाद अस्पताल के जर्जर भवनों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल और गंभीर हो गए हैं.

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By कोमल अग्रवाल

कोमल अग्रवाल पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और वर्तमान में प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. वे डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और विभिन्न विषयों पर समाचार एवं लेख लिखती हैं. इससे पहले उन्होंने प्रिंट और डिजिटल मीडिया में इंटर्नशिप एवं कार्य अनुभव प्राप्त किया है, जहां उन्होंने रिपोर्टिंग, कंटेंट राइटिंग, सोशल मीडिया मैनेजमेंट और वीडियो एडिटिंग जैसे क्षेत्रों में काम किया. उन्होंने पटना विमेंस कॉलेज से जनसंचार एवं पत्रकारिता की पढ़ाई की है. कोमल तथ्यपरक, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित पत्रकारिता में विश्वास रखती हैं तथा सरल, सटीक और प्रभावी समाचार लेखन को प्राथमिकता देती हैं.

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