UP News: प्रयागराज के सिविल लाइंस स्थित प्रसिद्ध श्रीहनुमत निकेतन मंदिर में चढ़ावे की राशि में अनियमितता का गंभीर मामला सामने आया है. एक दर्शनार्थी पक्ष के अधिवक्ता की आधिकारिक शिकायत और नोटरी हलफनामे के आधार पर जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच सीडीओ हर्षिका सिंह को सौंप दी है. सीडीओ ने मामले की गहनता से पड़ताल के लिए तीन प्रशासनिक अधिकारियों की एक विशेष टीम गठित कर दी है, जो जल्द ही अपनी जांच शुरू करेगी.
दानपात्र की चाबियों का विवाद
अधिवक्ता ने आरोप लगाया है कि मंदिर के पुराने 18 दानपात्रों की चाबियां किसके पास हैं, इसका किसी को कोई अता-पता नहीं है. यह आशंका जताई जा रही है कि इन्हीं पुराने दानपात्रों से चढ़ावे की धनराशि को अवैध रूप से निकाला जा रहा है. दूसरी ओर, मंदिर के रिसीवर एवं एडीएम आपूर्ति विजय कुमार शर्मा का कहना है कि उनके पास केवल नए दानपात्रों की ही चाबियां मौजूद हैं, जबकि पुराने दानपात्रों की चाबियों के संबंध में उन्हें कोई सटीक जानकारी नहीं है.
प्रबंधन और अधिकारों पर रोक
कुछ वर्षों पूर्व मंदिर के चढ़ावे, दुकानों और अन्य भवनों से प्राप्त किराए की आय को लेकर बड़ा विवाद उत्पन्न हुआ था. इसके बाद मामला न्यायालय पहुंचा, जिसने जिलाधिकारी को मंदिर का अधिकृत रिसीवर नियुक्त कर दिया. तत्पश्चात यह जिम्मेदारी एडीएम आपूर्ति को सौंपी गई और मंदिर ट्रस्ट के सदस्यों के अधिकारों को निलंबित कर दिया गया. हालांकि, शिकायतकर्ता अधिवक्ताओं का कहना है कि रिसीवर की नियुक्ति के बाद भी मंदिर का वास्तविक नियंत्रण पुराने प्रबंधन के हाथों में ही बना हुआ है.
करोड़ों के चढ़ावे में गड़बड़ी
वर्ष 2019 के कुंभ मेले के दौरान मंदिर में 70 से 80 लाख रुपये का चढ़ावा प्राप्त हुआ था. उस आधार पर अधिवक्ताओं का दावा है कि वर्ष 2020 से अब तक कुल 18 बड़े दानपात्रों में लगभग पांच करोड़ रुपये की विशाल राशि एकत्र होनी चाहिए थी, विशेषकर तब जब महाकुंभ में भी भारी संख्या में श्रद्धालु आए थे. आरोप है कि नए दानपात्रों के धन की गिनती ट्रस्टियों और दर्शनार्थियों के सामने नहीं कराई जा रही है, जिससे इस बड़ी धनराशि में भारी हेरफेर की पूरी आशंका बनी हुई है. इनपुट: शशांक मिश्रा
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