UP News: गन्ना कम मिला तो चीनी मिल कैसे लगातार चलेगी? इसी सवाल पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने साफ कहा कि चीनी मिलों को उनकी अनुमानित जरूरत के अनुसार गन्ना मिलना चाहिए. इससे पेराई का काम लगातार जारी रह सकेगा और मिल समय से पहले बंद नहीं होगी.
यदु शुगर मिल की याचिका पर सुनवाई
न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने बदायूं की यदु शुगर लिमिटेड की याचिका मंजूर कर ली. कोर्ट ने गन्ना आयुक्त को 2026-27 के पेराई सत्र में बिसौली स्थित यदु शुगर मिल को उसकी अनुमानित जरूरत के अनुसार गन्ना आवंटित करने का निर्देश दिया है. मिल के लिए ऐसा पेराई कैलेंडर बनाने को भी कहा गया है, जिससे वह 180 दिन तक निर्बाध रूप से चल सके.
100.80 लाख क्विंटल जरूरत, मिला आधे से थोड़ा ज्यादा गन्ना
याचिका में बताया गया कि 2026-27 सत्र के लिए मिल की अनुमानित गन्ना जरूरत 100.80 लाख क्विंटल थी. इसके मुकाबले उसे केवल 51.30 लाख क्विंटल गन्ना आवंटित किया गया. यह उसकी अनुमानित जरूरत का 50.89 प्रतिशत था. वहीं, क्षेत्र की सात अन्य चीनी मिलों को उनकी अनुमानित जरूरत का 100 प्रतिशत से लेकर 190.92 प्रतिशत तक गन्ना आवंटित किया गया.
कम आवंटन से प्रभावित हुई मिल की पेराई
कोर्ट ने माना कि कम गन्ना आवंटन का सीधा असर मिल के संचालन पर पड़ा. पर्याप्त गन्ना नहीं मिलने के कारण मिल लगातार नहीं चल सकी. गन्ने की कमी से मिल के 786.19 घंटे प्रभावित हुए. जबकि मिल की वास्तविक पेराई अवधि 784.44 घंटे ही थी. कोर्ट ने इस स्थिति को गंभीरता से लिया.
40 प्रतिशत नुकसान को भी रखना होगा ध्यान में
कोर्ट ने गन्ना आयुक्त की 2 सितंबर 2025 की नीति का भी उल्लेख किया. इसमें परिवहन के दौरान न्यूनतम 40 प्रतिशत गन्ना नुकसान की बात स्वीकार की गई है. ऐसे में सिर्फ कागज पर दर्ज अनुमानित जरूरत के बराबर गन्ना आवंटित करना पर्याप्त नहीं होगा. कोर्ट ने कहा कि वास्तविक जरूरत तय करते समय संभावित नुकसान को भी ध्यान में रखना जरूरी है.
भुगतान में देरी को नहीं माना जिम्मेदार
हाईकोर्ट ने कहा कि मिल के समय से पहले बंद होने की मुख्य वजह कम गन्ना आवंटन और उसकी आपूर्ति में कमी थी. इसे मिल की खराब कार्यप्रणाली या किसानों के भुगतान में अनुचित देरी का नतीजा नहीं माना जा सकता. कोर्ट ने 100.80 लाख क्विंटल की अनुमानित जरूरत को आधार बनाकर 40 प्रतिशत संभावित नुकसान को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त गन्ना आवंटित करने का निर्देश दिया है. साथ ही मिल को आवंटित गन्ने की उचित खरीद और इस्तेमाल सुनिश्चित करने को कहा गया है, ताकि किसानों को समय पर भुगतान मिल सके.
