UP Politics: समाजवादी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए पूर्व मंत्री नारद राय एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं. इस बार वजह उनका कोई नया बयान नहीं, बल्कि सपा में रहते हुए दिया गया उनका एक पुराना बयान है. भाजपा से जुड़ीं सुप्रीम कोर्ट की वकील स्मृति सिंह चंदेल की ओर से की गयी सोशल मीडिया पोस्ट के बाद इस पुराने बयान को लेकर सियासी बहस तेज हो गयी है. स्मृति सिंह चंदेल ने अपनी पोस्ट में लिखा है कि “ये सपा से भाजपा में जबरदस्त नेताओं की घुसपैठ हुई है, जो अपनी ही पार्टी के नेताओं का, भाइयों का विरोध लगातार कर रहे हैं. भाजपा को ले डूबेंगे ऐसे लोग.” इसके साथ उन्होंने नारद राय का सपा के दौर का वीडियो भी साझा किया है.
जब सपा में थे नारद राय, तब योगी पर दिया था बयान
दरअसल, दिसंबर 2018 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भगवान हनुमान को लेकर दिये गये बयान के बाद नारद राय ने बलिया में एक कार्यक्रम के दौरान तीखी प्रतिक्रिया दी थी. उस समय वह समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता थे. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक नारद राय ने कहा था कि भगवान को जाति की सीमा और जातिसूचक शब्दों से जोड़ना भाजपा का “रोजगार” है. उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपनी जाति और गोत्र के बारे में माता-पिता से पूछने की बात कही और डीएनए टेस्ट कराने की टिप्पणी की थी. नारद राय ने यह भी कहा था कि पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि योगी आदित्यनाथ किस जाति और गोत्र के हैं, उसके बाद डीएनए टेस्ट कराया जाए. उसी भाषण में उन्होंने भाजपा पर तीखी राजनीतिक टिप्पणी भी की थी.
अब तस्वीर बदली, नारद राय भाजपा में
राजनीतिक समय के साथ नारद राय का सियासी ठिकाना बदल चुका है. मई 2024 में उन्होंने सपा छोड़कर भाजपा का रुख किया था. इसके बाद वह भाजपा में सक्रिय हैं और बलिया में पार्टी के कार्यक्रमों में लगातार नजर आते रहे हैं. हाल की रिपोर्टों में भी उन्हें भाजपा नेता के तौर पर दर्ज किया गया है. मई 2026 में नारद राय ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात भी की थी.
उपेंद्र तिवारी को लेकर बयान के बाद नया विवाद
अब बलिया की सियासत में नारद राय और भाजपा के पूर्व मंत्री उपेंद्र तिवारी के बीच बयानबाजी भी चर्चा में है. इसी पृष्ठभूमि में स्मृति सिंह चंदेल की पोस्ट ने नारद राय के पुराने बयान को फिर सामने ला दिया है. यानी सवाल सिर्फ पुराने बयान का नहीं, बल्कि सियासी पाला बदलने के बाद पुराने बयानों के नए संदर्भ में लौटने का भी है. सोशल मीडिया पर समर्थक और विरोधी अपने-अपने तर्क के साथ इसे साझा कर रहे हैं. एक तरफ भाजपा में नारद राय की सक्रियता बढ़ रही है, तो दूसरी तरफ उनके सपा कार्यकाल के पुराने बयान अब उन्हीं के लिए सोशल मीडिया पर सवाल खड़े कर रहे हैं.
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