देश की सुरक्षा में सेंध? मथुरा में अवैध बांग्लादेशियों का भंडाफोड़

MATHURA: मथुरा में केंद्रीय एजेंसियों और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए 90 अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है. ये लोग बिना वैध दस्तावेजों के भारत में वर्षों से रह रहे थे और कुछ ने फर्जी आधार, राशन कार्ड आदि बनवा रखे थे. इन पर सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग करने और संदिग्ध गतिविधियों में शामिल होने का भी शक है.

MATHURA: देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और अवैध घुसपैठ पर नकेल कसने के मकसद से केंद्रीय खुफिया एजेंसियों ने मथुरा में एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है. इस संयुक्त अभियान में स्थानीय पुलिस और खुफिया विभाग की टीमों ने मिलकर मथुरा के विभिन्न इलाकों में छापेमारी करते हुए 90 अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है. यह ऑपरेशन कई दिनों तक चली खुफिया निगरानी और सूचनाओं के आदान-प्रदान का नतीजा है.

कई वर्षों से अवैध रूप से रह रहे थे भारत में

गिरफ्तार किए गए लोगों में पुरुष, महिलाएं और कुछ किशोर भी शामिल हैं. प्रारंभिक पूछताछ में यह जानकारी सामने आई है कि इनमें से कई लोग पिछले 5 से 10 वर्षों से भारत में अवैध रूप से रह रहे थे. कुछ लोगों ने उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों, खासकर मथुरा, फिरोजाबाद, आगरा और अलीगढ़ में मजदूरी, रिक्शा चलाना, घरेलू काम और निर्माण कार्य जैसे क्षेत्रों में काम करना स्वीकार किया है.

फर्जी पहचान पत्र और सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग

जांच के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने यह भी खुलासा किया है कि कुछ अवैध बांग्लादेशी नागरिकों ने फर्जी आधार कार्ड, राशन कार्ड, वोटर आईडी और पते के दस्तावेज बनवा रखे थे. इन दस्तावेजों के आधार पर वे सरकारी योजनाओं का लाभ उठा रहे थे, जिसमें सब्सिडी वाले राशन, मुफ्त चिकित्सा सेवाएं और मजदूरी योजनाएं शामिल हैं.

संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी

केंद्रीय एजेंसियों के अनुसार, यह छापेमारी सामान्य अवैध प्रवासियों की पहचान भर नहीं थी. कुछ मामलों में कट्टरपंथी संगठनों से संभावित संबंध होने की आशंका भी जताई जा रही है. इस संबंध में कुछ संदिग्ध मोबाइल नंबरों और डिजिटल उपकरणों की जांच की जा रही है, जिन्हें कब्जे में लिया गया है. यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह मामला और अधिक गंभीर हो सकता है.

मथुरा को क्यों चुना गया?

मथुरा, एक धार्मिक और पर्यटक स्थल होने के साथ-साथ दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र के निकट भी है. यह भौगोलिक स्थिति अवैध घुसपैठियों के लिए सुविधाजनक बनती है, जिससे वे यहां शरण लेकर बड़े शहरों में घुल-मिल जाते हैं. केंद्रीय एजेंसियों ने मथुरा, नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ और दिल्ली जैसे क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है.

प्रशासन का बयान

मथुरा पुलिस अधीक्षक ने प्रेस को बताया कि, “हमने केंद्रीय एजेंसियों के सहयोग से यह सफल ऑपरेशन अंजाम दिया है. गिरफ्तार किए गए सभी लोगों की पहचान और पृष्ठभूमि की गहन जांच की जा रही है. जो भी दोषी पाए जाएंगे, उन्हें डिपोर्ट करने की प्रक्रिया तेजी से पूरी की जाएगी.”

डिपोर्टेशन और कानूनी प्रक्रिया

गिरफ्तार किए गए सभी नागरिकों को संबंधित विदेशी अधिनियम और पासपोर्ट अधिनियम के तहत हिरासत में लिया गया है. विदेश मंत्रालय और बांग्लादेश दूतावास को भी सूचित किया गया है ताकि इन लोगों की पहचान की पुष्टि के बाद डिपोर्टेशन की प्रक्रिया पूरी की जा सके.

आम नागरिकों से अपील

प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि अगर उनके आस-पास कोई संदिग्ध प्रवासी, फर्जी दस्तावेजों वाला व्यक्ति या अज्ञात नागरिक रह रहा हो, तो उसकी जानकारी तुरंत पुलिस या प्रशासनिक अधिकारियों को दें. इससे न सिर्फ सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि समाज में पारदर्शिता और शांति भी बनी रहेगी. मथुरा में हुई यह कार्रवाई एक बार फिर यह दिखाती है कि सरकार और सुरक्षा एजेंसियां देश की आंतरिक सुरक्षा और सीमा पार से हो रही अवैध घुसपैठ के प्रति सजग और सख्त हैं. यह कदम न केवल कानून-व्यवस्था की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि भारत की सरजमीं पर अवैध गतिविधियों और पहचान छिपाकर रहने वालों को अब बख्शा नहीं जाएगा.

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Author: Abhishek Singh

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