बहनजी ने BJP-SP से समर्थन लिया, सांपनाथ और नागनाथ भी कहा, 2007 के बाद घटा मायावती का सियासी कद

बहुजन समाज के हितों की राजनीति का दावा करने वाली मायावती इस बार के चुनाव में सरकार बनाने की बात कर रही हैं. उनका दावा है कि बीजेपी, सपा और कांग्रेस से उत्तर प्रदेश का भला नहीं होने वाला. उत्तर प्रदेश की जनता बसपा की तरफ देख रही है.

By Prabhat Khabar | December 20, 2021 1:34 PM

UP Election 2022: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. इसको लेकर सियासी गहमागहमी तेज है. आरोप-प्रत्यारोप भी जारी है. चुनावी मौसम में हम बात कर रहे हैं प्रदेश के उन नेताओं की, जिन्होंने ना सिर्फ यूपी, देश की सियासी दिशा-दशा को बदलने का काम किया है. इस कड़ी में बात करेंगे बसपा सुप्रीमो मायावती की. बहुजन समाज के हितों की राजनीति का दावा करने वाली मायावती इस बार के चुनाव में सरकार बनाने की बात कर रही हैं. उनका दावा है कि बीजेपी, सपा और कांग्रेस से उत्तर प्रदेश का भला नहीं होने वाला. उत्तर प्रदेश की जनता बसपा की तरफ देख रही है.

मायावती ऐसी महिला हैं, जिसने प्रदेश की राजनीति में अपना दमखम दिखाया है. बीजेपी-सपा को सांपनाथ-नागनाथ कह चुकी मायावती ने दोनों पार्टियों का सहयोग भी लिया. सूबे में मायावती और अखिलेश यादव को बुआ और बबुआ की जोड़ी कही जाती है. आज अखिलेश यादव और मायावती के बीच छत्तीस का आंकड़ा है. 1984 में बसपा (बहुजन समाज पार्टी) के गठन के बाद मायावती ने सियासी करिअर में कई उतार-चढ़ाव देखें. कांशीराम की उत्तराधिकारी बहनजी का सियासी रूतबा काफी बड़ा रहा.

उत्तर प्रदेश (देश भी) की राजनीति की बहनजी का जन्म 15 जनवरी 1956 को दिल्ली में हुआ. बहनजी का यूपी के गौतमबुद्ध नगर के छोटे से गांव बादलपुर से संबंध है. मायावती के पिता प्रभु दास डाक विभाग में थे. मायावती ने 1975 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के कालिंदी कॉलेज से ग्रेजुएशन किया. 1976 से मेरठ यूनिवर्सिटी से बीएड करने के बाद 1983 में उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से एलएलबी की पढ़ाई की. मायावती स्कूल टीचर बनना चाहती थीं. वो आईएएस की तैयारी भी कर रही थीं. किस्मत को कुछ और मंजूर था. 1977 में मायावती की मुलाकात कांशीराम से हुई और दोनों ने 1983 में बसपा की स्थापना की.

बसपा की स्थापना के बाद मायावती ने यूपी चुनाव में दमदख आजमाना शुरू किया. 1993 में मायावती ने बसपा के 164 कैंडिडेट्स को मैदान में उतारा. नतीजे निकले तो 67 कैंडिडेट्स को जीत मिली. इसी बीच मुलायम सिंह यादव और कांशीराम एकसाथ आए. नेताजी ने सीएम पद की शपथ ली. एक साल के बाद मुलायम सिंह यादव की सरकार गिर गई. मुलायम सिंह यादव ने मायावती पर सरकार गिराने का आरोप लगाया. जवाब में मायावती ने मुलायम सिंह यादव और सपा पर कई आरोप लगा डाले.

मायावती ने तीन जून 1995 में पहली बार सीएम पद की शपथ ली. 137 दिनों के बाद सरकार गिर गई. 1996 के चुनाव में मायावती ने 296 सीटों पर बसपा उम्मीदवार उतारे थे. लेकिन, 67 कैंडिडेट्स ही चुनाव जीत सके. यूपी चुनाव 2002 में मायावती ने 401 सीटों पर प्रत्याशियों को उतारा था. इस चुनाव में बसपा का प्रदर्शन थोड़ा सुधरा और 98 सीटों पर मायावती के प्रत्याशी जीतने में सफल हो सके थे.

मायावती और बहुजन समाज पार्टी के लिए साल 2007 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव सबसे बड़ी सौगात लेकर आया. 2007 के विधानसभा चुनाव में मायावती की पार्टी ने 403 सीटों पर चुनाव लड़े और 206 सीटें जीतने में सफल हुई. इसके बाद मायावती ने एक बार फिर यूपी के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली.

मुख्यमंत्री रहते हुए मायावती के कई कामों पर विपक्षी नेताओं ने हल्ला किया. मायावती आरोपों के बावजूद सरकार चलाती रहीं. समय गुजरता गया और मायावती की पार्टी कमजोर होती चली गई. 2012 के चुनाव में बसपा को 80 सीटों पर जीत हासिल हुई. 2017 के चुनाव में बसपा 403 में से केवल 19 सीटें जीतने में सफल हुई. इस बार चुनाव में मायावती करामात की फिराक में हैं. लेकिन, नतीजे अभी बाकी हैं.

Also Read: किस्सा नेताजी का: चिल्लूपार सीट पर हरिशंकर तिवारी का नाम मतलब जीत की गारंटी, BJP भी नहीं रोक सकी विजय रथ

Next Article

Exit mobile version