UP News : मां-बेटे का रिश्ता दुनिया के सबसे मजबूत रिश्तों में गिना जाता है, लेकिन लखनऊ से सामने आई एक कहानी इस रिश्ते की संवेदनशीलता पर कई सवाल खड़े कर रही है. मानसिक रूप से अस्वस्थ लल्ली देवी पिछले करीब पांच साल से एक आश्रय गृह में रह रही थीं. परिवार को उनकी सुरक्षित होने की जानकारी भी थी, लेकिन उन्हें घर ले जाने कोई नहीं पहुंचा. अब जब उनकी LIC बीमा पॉलिसी पूरी हुई और करीब एक लाख रुपये की राशि मिलने का समय आया, तो परिवार के लोग उन्हें लेने आश्रय गृह पहुंच गए. इस घटनाक्रम ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर इतने साल तक मां की सुध क्यों नहीं ली गई?
2014 में घर से बिछड़कर लखनऊ पहुंचीं लल्ली देवी
लल्ली देवी मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं. वर्ष 2014 में वह आगरा स्थित अपने घर से भटककर लखनऊ पहुंच गई थीं. इसके बाद पीजीआई पुलिस ने उन्हें वृंदावन कॉलोनी सेक्टर-9 स्थित पाल मर्सी होम पहुंचाया. यह संस्था लंबे समय से मानसिक रूप से अस्वस्थ, बेसहारा और घर से बिछड़े लोगों को आश्रय देने और उनके परिवार तक पहुंचाने का काम कर रही है. लल्ली देवी की भी यहां लगातार देखभाल की गई. साथ ही संस्था की ओर से उनके परिवार की तलाश भी जारी रही. काफी समय तक उनके परिजनों का पता नहीं चल सका था.
2021 में परिवार का पता चला, फिर भी लेने नहीं आया कोई
पाल मर्सी होम के संचालक ओवी पाल के मुताबिक, वर्ष 2021 में काफी प्रयासों के बाद लल्ली देवी के आगरा स्थित सैनिक नगर, भगवत बाग के घर का पता चला. इसके बाद उनकी बड़ी बहन राजवती से संपर्क किया गया और परिवार को बताया गया कि लल्ली देवी लखनऊ में सुरक्षित हैं. संस्था की ओर से परिवार से उन्हें घर ले जाने की अपील भी की गई. परिवार के लोग वीडियो कॉल के जरिए लल्ली देवी के बारे में जानकारी लेते रहे, लेकिन इसके बावजूद करीब पांच साल तक उन्हें लेने कोई नहीं पहुंचा. संस्था का कहना है कि लल्ली देवी के बेटे को भी अपनी मां के सुरक्षित होने की जानकारी थी.
LIC की रकम मिलने का समय आया तो आश्रय पहुंचे परिजन
मामला तब अचानक बदल गया, जब लल्ली देवी की LIC बीमा पॉलिसी पूरी हो गई और उसकी राशि मिलने की स्थिति बनी. बताया गया कि बीमा राशि करीब एक लाख रुपये है. इसके बाद करीब एक सप्ताह पहले उनकी बड़ी बहन राजवती और बेटा शीलू पीजीआई थाने पहुंचे. परिवार की पहचान और दस्तावेजों की जांच की गई. आधार कार्ड समेत अन्य जरूरी दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया. पुलिस ने जांच के बाद परिवार की पुष्टि की और लल्ली देवी को उनकी बड़ी बहन और बेटे के सुपुर्द कर दिया.
पति की पहले ही हो चुकी है मौत
लल्ली देवी के पति का पहले ही निधन हो चुका है. उनके तीन बेटे हैं, जिनके नाम विनोद, शिवा और शीलू हैं. परिवार में एक बेटे की शादी भी हो चुकी है. ऐसे में जिस मां के सुरक्षित होने की जानकारी परिवार को कई साल पहले ही मिल चुकी थी, उनका इतने लंबे समय तक आश्रय गृह में रहना और फिर बीमा राशि पूरी होने के समय परिवार का उन्हें लेने पहुंचना कई सवाल खड़े कर रहा है. यही वजह है कि यह मामला अब रिश्तों की संवेदनशीलता और प्राथमिकताओं को लेकर चर्चा में है.
2010 से बिछड़ों को परिवार तक पहुंचा रहा पाल मर्सी होम
वृंदावन कॉलोनी सेक्टर-9 स्थित पाल मर्सी होम वर्ष 2010 से मानसिक रूप से अस्वस्थ और घर से बिछड़े लोगों की मदद कर रहा है. संस्था की ओर से ऐसे लोगों की देखभाल के साथ-साथ उनके परिवारों की तलाश भी की जाती है. संस्था के मुताबिक, अब तक 245 लोगों को उनके परिवार तक पहुंचाया जा चुका है. लल्ली देवी की कहानी भी इसी प्रयास का हिस्सा रही, लेकिन उनके मामले में परिवार का पता चलने के बावजूद लंबे समय तक उन्हें लेने कोई नहीं आया. अब बीमा राशि पूरी होने के बाद परिवार के उन्हें घर ले जाने की घटना ने इस पूरे मामले को चर्चा में ला दिया है.
