हेयर ट्रांसप्लांट बना मौत का कारण: डेंटिस्ट ने किया ऑपरेशन, इंजीनियर ने मां की गोद में तोड़ा दम

KANPUR NEWS: कानपुर के ‘द एम्पायर क्लिनिक’ में हेयर ट्रांसप्लांट कराने के बाद 37 वर्षीय इंजीनियर विनीत कुमार दुबे की मौत हो गई. ऑपरेशन डॉ. अनुष्का तिवारी द्वारा किया गया, जो पेशे से डेंटल सर्जन हैं और हेयर ट्रांसप्लांट की विशेषज्ञता नहीं रखतीं. मृतक की पत्नी ने बताया कि इंजेक्शन लगते ही विनीत की हालत बिगड़ने लगी और चेहरा सूज गया. रातभर दर्द से तड़पने के बाद सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया. घटना के बाद से डॉक्टर फरार हैं. पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है.

KANPUR NEWS: कानपुर से एक बार फिर दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है. हेयर ट्रांसप्लांट कराने के बाद एक इंजीनियर की संदिग्ध हालात में मौत हो गई. मृतक की मां का कहना है कि ऑपरेशन के बाद उसके बेटे का चेहरा बुरी तरह सूज गया था और वह पूरी रात असहनीय दर्द से कराहता रहा. सुबह होते-होते उसने अपनी मां की गोद में दम तोड़ दिया.

मौत के पीछे डॉक्टर की बड़ी लापरवाही?

इस गंभीर लापरवाही भरे मामले में जिस डॉक्टर ने हेयर ट्रांसप्लांट किया, वह डॉ. अनुष्का तिवारी थीं. सूत्रों की जानकारी के अनुसार, डॉ. तिवारी पेशे से एक डेंटल सर्जन (B.D.S., MIDA) हैं. उनके पास हेयर ट्रांसप्लांट जैसी जटिल सर्जरी की कोई विशेषज्ञ योग्यता नहीं है. इसके बावजूद उन्होंने ‘द एम्पायर क्लिनिक’ में यह प्रक्रिया करी.

मृतक का विवरण

मृतक का नाम विनीत दुबे था और वह कानपुर के पनकी पावर हाउस में सहायक अभियंता के पद पर कार्यरत था. बताया जा रहा है कि वह बाल झड़ने की समस्या से परेशान था और आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए हेयर ट्रांसप्लांट कराने का निर्णय लिया था. सोशल मीडिया और विज्ञापनों के प्रभाव में आकर उसने कानपुर के एक क्लीनिक में ट्रांसप्लांट करवाया.

मृतक की मां की आपबीती

मां ने रोते हुए बताया, “ऑपरेशन के बाद जब वो घर आया तो उसका चेहरा पूरी तरह सूज गया था. रातभर दर्द से तड़पता रहा. हमने कई बार डॉक्टर से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन कोई सहायता नहीं मिली. सुबह 4 बजे उसने मेरी गोद में अंतिम सांस ली.”

परिवार वालों के आरोप

परिवार वालों ने क्लीनिक और डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि बिना पर्याप्त टेस्ट किए और सही मेडिकल सुपरविजन के बिना ही ट्रांसप्लांट किया गया. इतना ही नहीं, ऑपरेशन के बाद सही फॉलो-अप या मेडिकल गाइडेंस भी नहीं दी गई.

मृतक की पत्नी का आरोप

मृतक की पत्नी जया  दुबे ने एफआईआर दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि ऑपरेशन के दौरान विनीत को जो इंजेक्शन लगा था उससे विनीत के चेहरे पर तेजी से सूजन आ गई और वह गहरे दर्द से तड़पने लगा. डॉक्टर से संपर्क करने की कई कोशिशें की गईं लेकिन कोई सहायता नहीं मिली. सुबह होते-होते विनीत ने दम तोड़ दिया.

पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई

पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है. क्लीनिक के डॉक्टरों से पूछताछ की जा रही है. स्वास्थ्य विभाग ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए एक जांच कमेटी गठित कर दी है. घटना के बाद से डॉ. अनुष्का तिवारी फिलहाल फरार चल रही हैं. कानपुर पुलिस ने उनके खिलाफ चिकित्सा लापरवाही के गंभीर आरोप की धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर लिया है और उनकी तलाश की जा रही है. वहीं एक तरफ पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिससे मौत के कारणों की पुष्टि की जा सके.

पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं

यह पहली बार नहीं है जब हेयर ट्रांसप्लांट के कारण किसी की जान गई हो. इससे पहले भी देशभर में इस तरह की लापरवाही और बिना लाइसेंस क्लीनिकों के चलते कई लोगों की जान जा चुकी है.

विशेषज्ञों की सलाह

डर्मेटोलॉजिस्ट और प्लास्टिक सर्जन विशेषज्ञों का कहना है कि हेयर ट्रांसप्लांट एक सर्जिकल प्रक्रिया है जिसे केवल अनुभवी और सर्टिफाइड डॉक्टर ही करें. इसके पहले मरीज की पूरी मेडिकल हिस्ट्री जानना और एलर्जी टेस्ट करना बेहद जरूरी होता है.

द एम्पायर क्लिनिक’ आया शक के घेरे में

इस गंभीर हादसे के बाद से ‘द एम्पायर क्लिनिक’ की भूमिका भी जांच के दायरे में है. यह क्लिनिक वर्ष 2018 में कानपुर के कल्याणपुर में स्थापित किया गया था और इसका दावा है कि यह हेयर रिस्टोरेशन व कॉस्मेटिक प्रक्रियाओं में विशेषज्ञ है. हालांकि, शुरुआती जांच में पता चला है कि क्लिनिक के पास हेयर ट्रांसप्लांट के लिए आवश्यक सभी कानूनी दस्तावेज और विशेषज्ञ मौजूद नहीं थे. स्वास्थ्य विभाग द्वारा क्लिनिक की जांच शुरू कर दी है और लाइसेंस, स्टाफ की योग्यता एवं मेडिकल प्रोटोकॉल का पूरा रिकॉर्ड  खंगाला जा रहा है.

नोट -: यह घटना एक बार फिर इस बात की चेतावनी देती है कि किसी भी मेडिकल या कॉस्मेटिक प्रक्रिया को हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है. सिर्फ विज्ञापन देखकर या कम दाम के लालच में आकर बिना प्रमाणित जगहों पर इलाज कराना जानलेवा साबित हो सकता है. प्रशासन को भी इस मामले में सख्त कदम उठाने की जरूरत है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोहराई न जाएं.

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Author: Abhishek Singh

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