UP Politics: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आज़म खान की मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को मिले डिमोलिशन नोटिस पर उत्तर प्रदेश की राजनीति तेज हो गई है। गुरुवार को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने रामपुर पहुंचकर योगी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार राम मंदिर से जुड़े विवादों और अन्य मुद्दों से लोगों का ध्यान हटाने के लिए जौहर यूनिवर्सिटी पर कार्रवाई कर रही है। वहीं, सरकार ने साफ किया कि पूरी कार्रवाई कानून के दायरे में की जा रही है।
अजय राय ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) की ओर से जौहर ट्रस्ट को जारी नोटिस पर प्रतिक्रिया देते हुए अजय राय ने कहा कि सरकार जनता का ध्यान दूसरे मुद्दों से हटाने की कोशिश कर रही है। उनका आरोप था कि राम मंदिर से जुड़े चढ़ावे, दान और जमीन के मामलों से ध्यान भटकाने के लिए जौहर यूनिवर्सिटी को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जौहर यूनिवर्सिटी पर डिमोलिशन नोटिस और किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में नॉनवेज पर रोक जैसे फैसले राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा हैं।
बीफ निर्यात और गाय संरक्षण का भी उठाया मुद्दा
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने गाय संरक्षण को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य द्वारा गाय को 'राष्ट्रीय माता' घोषित करने के प्रस्ताव पर सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। अजय राय ने यह भी आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश से बड़े पैमाने पर बीफ का निर्यात होता है, लेकिन इस पर रोक लगाने के लिए सरकार प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रही है।
हिंदू-मुस्लिम की राजनीति कर रही सरकार
अजय राय ने आरोप लगाया कि सरकार समाज को हिंदू-मुस्लिम के आधार पर बांटने की राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि जौहर यूनिवर्सिटी पर कार्रवाई भी इसी रणनीति का हिस्सा है और इसका उद्देश्य वास्तविक मुद्दों से जनता का ध्यान हटाना है।
सरकार का जवाब- कानून से ऊपर कोई नहीं
वहीं, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि राज्य सरकार कानून के शासन में विश्वास करती है। उन्होंने कहा कि जहां भी नियमों का उल्लंघन होगा, वहां बिना किसी भेदभाव के कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। सरकार किसी भी अवैध निर्माण या गैरकानूनी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं करेगी।
RDA ने 38 इमारतों को लेकर जारी किया नोटिस
रामपुर विकास प्राधिकरण ने जौहर ट्रस्ट को 15 दिन का नोटिस जारी कर विश्वविद्यालय परिसर में बनी 38 कथित अवैध इमारतों को हटाने के निर्देश दिए हैं। प्राधिकरण का दावा है कि करीब 82,309.80 वर्ग मीटर क्षेत्र में बिना स्वीकृत नक्शे के निर्माण किया गया। जांच में केवल दो इमारतों के निर्माण की अनुमति वैध पाई गई, जबकि बाकी भवनों के लिए आवश्यक मंजूरी नहीं ली गई। RDA ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय के भीतर कार्रवाई नहीं हुई तो प्रशासन स्वयं ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू करेगा।
आज़म खान का ड्रीम प्रोजेक्ट है जौहर यूनिवर्सिटी
मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को आज़म खान का ड्रीम प्रोजेक्ट माना जाता है। विश्वविद्यालय पिछले कई वर्षों से जमीन, निर्माण और अन्य कानूनी विवादों को लेकर चर्चा में रहा है। फिलहाल आज़म खान विभिन्न मामलों में न्यायिक हिरासत में हैं। इसी वर्ष मई में एक मामले में अदालत ने उन्हें दो वर्ष की सजा भी सुनाई थी।
सियासत के केंद्र में जौहर यूनिवर्सिटी
जौहर यूनिवर्सिटी पर कार्रवाई अब कानूनी विवाद के साथ-साथ बड़ा राजनीतिक मुद्दा भी बन गई है। विपक्ष इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह कानून के अनुसार की जा रही है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जौहर ट्रस्ट अदालत से राहत हासिल कर पाता है या प्रशासन निर्धारित समय के बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई आगे बढ़ाता है।
'हिंदू-मुस्लिम की राजनीति कर रही सरकार'
अजय राय ने आरोप लगाया कि सरकार समाज को हिंदू-मुस्लिम के आधार पर बांटने की राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि जौहर यूनिवर्सिटी पर कार्रवाई भी इसी रणनीति का हिस्सा है और इसका उद्देश्य वास्तविक मुद्दों से जनता का ध्यान हटाना है।
सरकार का जवाब- कानून से ऊपर कोई नहीं
वहीं, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि राज्य सरकार कानून के शासन में विश्वास करती है। उन्होंने कहा कि जहां भी नियमों का उल्लंघन होगा, वहां बिना किसी भेदभाव के कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। सरकार किसी भी अवैध निर्माण या गैरकानूनी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं करेगी।
आज़म खान का ड्रीम प्रोजेक्ट है जौहर यूनिवर्सिटी
मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को आज़म खान का ड्रीम प्रोजेक्ट माना जाता है। विश्वविद्यालय पिछले कई वर्षों से जमीन, निर्माण और अन्य कानूनी विवादों को लेकर चर्चा में रहा है। फिलहाल आज़म खान विभिन्न मामलों में न्यायिक हिरासत में हैं। इसी वर्ष मई में एक मामले में अदालत ने उन्हें दो वर्ष की सजा भी सुनाई थी।
सियासत के केंद्र में जौहर यूनिवर्सिटी
जौहर यूनिवर्सिटी पर कार्रवाई अब कानूनी विवाद के साथ-साथ बड़ा राजनीतिक मुद्दा भी बन गई है। विपक्ष इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह कानून के अनुसार की जा रही है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जौहर ट्रस्ट अदालत से राहत हासिल कर पाता है या प्रशासन निर्धारित समय के बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई आगे बढ़ाता है।
