Indian Railway News : भारतीय रेलवे अपने यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए लगातार प्रयास करता है. इसके बावजूद ट्रेनों की बोगियों में कूड़ा-कचरा जमा होने की समस्या लंबे समय से बनी हुई है. अब रेलवे ने इससे निपटने के लिए नई योजना तैयार की है. इसकी शुरुआत उत्तर प्रदेश के पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन से की जा रही है. रेलवे ने अधिकांश ट्रेनों में अल्ट्रा मॉडर्न सुविधाओं से लैस LHB कोच (Linke-Hofmann-Busch Coach) लगाए हैं. हालांकि, इन प्रीमियम कोचों में लगे कूड़ेदानों की क्षमता कम होने के कारण लंबी दूरी की ट्रेनों में कचरे का ढेर लग जाता है. अब इस समस्या के समाधान के लिए बड़ी क्षमता वाला कूड़ादान लगाने की तैयारी है.
100 ट्रेनों से रोज निकलता है करीब 3 टन कचरा
लंबी दूरी की ट्रेनों में यात्रियों की बढ़ती संख्या के बीच कचरा प्रबंधन की चुनौती भी बढ़ी है. पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन से रोजाना करीब 100 यात्री ट्रेनें गुजरती हैं, जिनसे लगभग 3 टन कूड़ा निकलता है. मौजूदा LHB कोचों में लगे कूड़ेदानों की क्षमता सीमित होने के कारण सफाई कर्मचारियों को बार-बार कचरा उठाना पड़ता है. इसमें देरी होने पर प्रीमियम ट्रेनों की बोगियों में कूड़े का ढेर लग जाता है. इस समस्या के समाधान के लिए झांसी स्थित वैगन रिपेयर वर्कशाप ने हाई कैपेसिटी कूड़ा इकट्ठा करने वाले सिस्टम का प्रोटोटाइप तैयार किया है. नई व्यवस्था में कचरा संग्रह करने की क्षमता 18 लीटर से बढ़कर 367.4 लीटर हो जाएगी. यानी क्षमता में करीब 20.4 गुना तक की वृद्धि होगी.
क्या है मौजूदा समस्या
LHB कोच से लैस ट्रेनों के सीमित क्षमता वाले डस्टबिन यात्रियों के कचरे से जल्दी भर जाते हैं. इसके बाद कचरा बाहर फैलने लगता है, जिससे कोच की स्वच्छता प्रभावित होती है. साथ ही सफाई कर्मचारियों को सफर के दौरान बार-बार कचरा उठाना पड़ता है. नई प्रणाली में ज्यादा मात्रा में कचरा जमा हो सकेगा. इससे यह समस्या काफी कम हो जाएगी. कचरा टैंक को ट्रेन के रखरखाव के दौरान खाली किया जा सकेगा, जिससे सफाई व्यवस्था बेहतर होगी.
गुरुत्वाकर्षण बल से टैंक तक पहुंचेगा कचरा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नई व्यवस्था की खासियत यह है कि कचरे को टैंक तक पहुंचाने के लिए किसी अलग मशीन की जरूरत नहीं होगी. कोच के फर्श पर यात्रियों की पहुंच में एक कूड़ादान लगाया जाएगा. इसके नीचे सेंट्रल कनेक्टर के जरिये कचरा कोच में लगे स्टील बॉक्स तक पहुंचेगा और वहां से सीधे संग्रह टैंक में गिर जाएगा. इसके लिए ग्रैविटेशनल फोर्स यानी गुरुत्वाकर्षण बल का इस्तेमाल किया जाएगा.
राजधानी, दुरंतो और वंदे भारत समेत कई ट्रेनों को फायदा
पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन से रोजाना बड़ी संख्या में लंबी दूरी की LHB ट्रेनें गुजरती हैं. इनमें राजधानी, दुरंतो, नेताजी, विभूति, वंदे भारत और हिमगिरी जैसी प्रमुख ट्रेनें शामिल हैं. नई प्रणाली को मंजूरी मिलने पर डीडीयू होकर गुजरने वाली इन सभी ट्रेनों में भी इसे लागू किए जाने की उम्मीद है.
