पहले सड़क धंसी, अब टोल प्लाजा डूबा, 36 हजार करोड़ के गंगा एक्सप्रेसवे में आखिर क्या हो रहा है

उत्तर प्रदेश का महत्वाकांक्षी गंगा एक्सप्रेसवे बारिश के बाद जलभराव की घटनाओं से सवालों के घेरे में है. पहले सड़क धंसने की घटना और अब टोल प्लाजा तक पानी पहुंचने से निर्माण गुणवत्ता और ड्रेनेज सिस्टम पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं. जानिए इस 36 हजार करोड़ की परियोजना की पूरी कहानी.

UP News: उत्तर प्रदेश के महत्वाकांक्षी गंगा एक्सप्रेसवे पर बारिश के बाद जलभराव की तस्वीरों ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं. उन्नाव के बशीरतगंज क्षेत्र में कुछ घंटों की बारिश के बाद एक्सप्रेसवे के एंट्री प्वाइंट और टोल प्लाजा के आसपास करीब दो फीट तक पानी भर गया. सड़क पर जलभराव के कारण वाहन चालकों को परेशानी हुई, जबकि कई दोपहिया वाहन पानी में फंसकर बंद हो गए.

एंट्री प्वाइंट से सर्विस रोड तक जलभराव

सोमवार को हुई बारिश के बाद बशीरतगंज क्षेत्र में गंगा एक्सप्रेसवे पर चढ़ने वाला मार्ग पानी में डूब गया. एक्सप्रेसवे के आसपास बनी सर्विस रोड भी जलमग्न हो गई, जिससे स्थानीय लोगों और यात्रियों की परेशानी बढ़ गई. खासकर बाइक सवारों को पानी से भरे रास्ते को पार करने में काफी मुश्किल हुई. कई बाइक बीच पानी में बंद हो गईं, जिन्हें लोगों की मदद से खींचकर बाहर निकालना पड़ा.

टोल बूथ के अंदर तक पहुंचा पानी

जलभराव की स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि टोल प्लाजा के केबिन के अंदर तक बारिश का पानी पहुंच गया. वहां तैनात कर्मचारी पानी से बचने के लिए कुर्सियों पर पैर ऊपर करके बैठे नजर आए. कर्मचारियों ने जनरेटर की मदद से पानी निकालने का काम शुरू किया. दोपहर से लेकर देर रात तक जल निकासी की कोशिश जारी रही, लेकिन कई घंटों की मशक्कत के बाद भी पानी को पूरी तरह बाहर नहीं निकाला जा सका.

कुछ दिन पहले 10 फीट तक धंस चुकी थी सड़क

गंगा एक्सप्रेसवे पर जलभराव की यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब कुछ दिन पहले ही सड़क धंसने की घटना को लेकर निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठे थे. मेरठ से प्रयागराज जाने वाली लेन पर किलोमीटर संख्या 42.1 के पास सड़क में करीब 10 फीट गहरा गड्ढा हो गया था. इसके बाद कार्यदायी संस्था ने बारिश के दौरान ही सड़क की मरम्मत और पैचवर्क कराया था, लेकिन मरम्मत के बाद फिर दरारें दिखाई देने की बात सामने आई.

सड़क के बाद अब ड्रेनेज सिस्टम पर सवाल

पहले सड़क धंसने और अब टोल प्लाजा तथा एंट्री मार्ग पर करीब दो फीट पानी भरने से एक्सप्रेसवे की ड्रेनेज व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आ गई है. कुछ घंटों की बारिश के बाद इतनी बड़ी मात्रा में पानी जमा होने से वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा. अब सवाल उठ रहे हैं कि इतनी बड़ी सड़क परियोजना में बारिश के पानी की निकासी के लिए क्या पर्याप्त और प्रभावी व्यवस्था की गई थी.

36 हजार करोड़ की परियोजना पर क्यों उठ रहे सवाल?

मेरठ से प्रयागराज तक करीब 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे को उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी और महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाओं में शामिल किया जाता है. छह लेन के इस एक्सप्रेसवे के निर्माण पर 36 हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत आई है. ऐसे में पहले सड़क धंसने और अब टोल प्लाजा तक पानी पहुंचने की घटनाओं ने निर्माण गुणवत्ता के साथ-साथ जल निकासी व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है. अब संबंधित विभाग और कार्यदायी संस्था के जवाब पर सबकी नजर रहेगी.

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By नटवर कुमार

नटवर कुमार पत्रकारिता के क्षेत्र में दो वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले पत्रकार हैं.वे ग्राउंड रिपोर्टिंग और जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से कवर करते हैं. राजनीतिक घटनाक्रम, स्थानीय समस्याओं, प्रशासनिक गतिविधियों, अपराध, सामाजिक मुद्दों और आम लोगों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि है. उनका प्रयास खबरों को तथ्यात्मक, स्पष्ट और पाठकों के लिए उपयोगी तरीके से प्रस्तुत करना रहता है.नटवर कुमार ने इतिहास में मास्टर ऑफ आर्ट्स (M.A. History) और मास्टर इन जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की पढ़ाई पटना से की है. इतिहास और पत्रकारिता में उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें घटनाओं को व्यापक संदर्भ में समझने और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने में मदद करती है.इस दौरान उन्होंने दूरदर्शन पटना में भी समय दिया है. नटवर कुमार मूल रूप से बिहार के दिनकर की भूमि बेगूसराय जिले के रहने वाले हैं.

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