Up News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई भी नागरिक संविधान के अनुच्छेद उन्नीस के तहत प्राप्त अपने मौलिक अधिकार का उपयोग करते हुए सार्वजनिक हित से जुड़ी किसी भी गलती या अनियमितता को उजागर करता है, तो उसे केवल इसी आधार पर कदाचार मानकर दंडित नहीं किया जा सकता. जब तक यह अभिव्यक्ति कानून या सेवा नियम का उल्लंघन न करे, कदाचार नहीं है.
प्राथमिक विद्यालय भदाना के शिक्षक का निलंबन आदेश निरस्त
इस अहम टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकलपीठ ने फिरोजाबाद जिले के विकास खंड एका स्थित प्राथमिक विद्यालय भदाना में तैनात एक सहायक शिक्षक प्रदीप प्रताप सिंह का निलंबन आदेश अवैध मानते हुए पूरी तरह निरस्त कर दिया है. याची शिक्षक ने बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा चार जुलाई को जारी किए गए निलंबन आदेश को अदालत में चुनौती दी थी और यह मांग की थी कि उन्हें स्कूल में अपना कार्य करने से बिल्कुल न रोका जाए.
सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर कार्रवाई को माना मनमाना
न्यायालय ने कहा कि निलंबन का एकमात्र कारण याची द्वारा इंटरनेट पर भाजपा के जिला अध्यक्ष का कथित आचरण उजागर करना था. इस मामले में शिक्षक का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक खरे तथा अधिवक्ता कमलेंद्र पाल सिंह ने मजबूती से रखा. न्यायालय को यह बताया गया कि शिक्षक पर इंटरनेट मीडिया पर भाजपा नेता उदय प्रताप सिंह की गलतियों से जुड़ी पोस्ट साझा करने का आरोप है. कोर्ट ने इस निलंबन आदेश को पूरी तरह मनमाना व अवैध माना है.
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