Prayagraj भगवान शिव की उपासना का पावन श्रावण मास गुरुवार से प्रारंभ हो गया है. पहले ही दिन प्रयागराज के प्रसिद्ध श्री मनकामेश्वर मंदिर में भक्तों का तांता लग गया. भोर में महंत श्रीधरानंद जी महाराज ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ महादेव का विशेष अभिषेक व श्रृंगार किया. इसके बाद कपाट खोल दिए गए. भक्तों ने 'हर-हर महादेव' के जयघोष के साथ जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि की प्रार्थना की. पूरे माह रुद्राभिषेक व विशेष आरती आयोजित की जाएगी.
मंदिर में सख्त ड्रेस कोड शालीन और पारंपरिक वस्त्र अनिवार्य
श्रद्धालुओं की सुविधा और मंदिर की मर्यादा बनाए रखने के लिए इस वर्ष विशेष नियम लागू किए गए हैं. गर्भगृह में प्रवेश और जलाभिषेक के लिए पारंपरिक वेशभूषा अनिवार्य की गई है. पुरुषों से धोती और महिलाओं से साड़ी या सलवार-सूट पहनने की अपील की गई है. जींस, टी-शर्ट और छोटे कपड़ों में प्रवेश पूरी तरह वर्जित है. इसके अलावा पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए प्लास्टिक के पात्रों में जल या दूध लाने पर रोक लगाई गई है. मंदिर द्वारा नियम का पालन न करने वाले भक्तों को पूजा करने की अनुमति नहीं दी जा रही है.
सुरक्षा और प्रशासन की तैयारी कांवड़ियों के लिए विशेष व्यवस्थाएं
सावन के दौरान त्रिवेणी संगम से पवित्र गंगाजल लेकर आने वाले कांवड़ियों की भारी भीड़ को देखते हुए जिला और पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है. सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और मंदिर परिसर तथा कांवड़ मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात है. श्रद्धालुओं की सुगम आवाजाही के लिए मजबूत बैरिकेडिंग, यातायात प्रबंधन, चिकित्सा सुविधा और सफाई की विशेष व्यवस्था की गई है, ताकि सभी भक्त शांतिपूर्ण ढंग से दर्शन और पूजन कर सकें.
त्रिवेणी संगम और कांवड़ यात्रा प्रयागराज में भक्तिमय माहौल
सावन माह में प्रयागराज का माहौल पूरी तरह से शिवभक्ति के रंग में रंग गया है. त्रिवेणी संगम पर प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु और कांवड़िए पवित्र गंगाजल लेने पहुँच रहे हैं. यहाँ से जल भरकर भक्त न केवल मनकामेश्वर महादेव, बल्कि क्षेत्र के अन्य प्राचीन शिवालयों की ओर प्रस्थान कर रहे हैं. कांवड़ियों के उत्साह और 'बम-बम भोले' के निरंतर गूंजते जयकारों से पूरा शहर भक्तिरस में सराबोर नजर आ रहा है.
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