UP News: पूर्व केंद्रीय और राज्य मंत्री आजम खां तथा उनके जौहर ट्रस्ट पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है. जांच एजेंसियों का दावा है कि विश्वविद्यालय निर्माण में व्यापक पैमाने पर अनधिकृत धन, फर्जी दानदाताओं तथा डमी ट्रस्टियों का इस्तेमाल हुआ है. ट्रस्ट ने परिसर की इमारतों हेतु केवल 45 करोड़ रुपये व्यय की बात कही थी, परंतु आयकर जांच में यह लागत 494 करोड़ रुपये के आसपास पाई गई. इसी आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई को आगे बढ़ाया है.
सरकारी बजट का मनमाना और गलत इस्तेमाल
जांच सूत्रों के अनुसार, विश्वविद्यालय के ढांचागत कार्यों में करीब आठ सरकारी विभागों का 110 करोड़ रुपये से अधिक का बजट खपाया गया. आयकर आंकड़ों के अनुसार यह राशि लगभग 150 करोड़ रुपये बैठती है. इसमें लोक निर्माण, सिंचाई, जल निगम और सीएंडडीएस जैसे प्रमुख विभाग शामिल रहे। अकेले सीएंडडीएस और जल निगम के 75 करोड़ रुपये खर्च किए गए. इसके अतिरिक्त, राजनीतिक प्रभाव के माध्यम से सांसद-विधायक निधि के 4.57 करोड़ रुपये का उपयोग किया गया, जिसे बाद में अदालत के हस्तक्षेप के बाद लौटाया गया था.
बैंक खातों में संदिग्ध नकदी और ईडी के छापे
वर्ष 2020-21 से 2024-25 के दौरान ट्रस्ट के खातों में घोषित आय से अधिक भारी मात्रा में नकदी जमा कराई गई थी. आरोप है कि कई लोगों से जबरन चंदा लिया गया तथा अघोषित संपत्ति को दान के रूप में दिखाया गया. बुधवार को ईडी टीमों ने रामपुर, सहारनपुर और दिल्ली स्थित 10 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की. सीए दीपक गुप्ता के परिसरों की तलाशी ली गई तथा महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य जुटाए गए. संभावना है कि अवैध निर्माणों को जब्त करने की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी.
