UP Politics: भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान कर दिया है. इस टीम में उत्तर प्रदेश को खास महत्व मिला है. 2027 विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश से जुड़े आठ नेताओं को संगठन के अहम पदों पर जिम्मेदारी दी गई है. रेखा वर्मा और प्रो. तारिक मंसूर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, स्मृति ईरानी और हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया है. वहीं डॉ. भोला सिंह और संगीता यादव को राष्ट्रीय सचिव बनाया गया है.
मोदी और नितिन नवीन ने दी नई टीम को बधाई
बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम के ऐलान के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने नई जिम्मेदारियां पाने वाले नेताओं को बधाई दी. दोनों नेताओं ने उम्मीद जताई कि नई टीम संगठन को और मजबूत करने के साथ देशभर में पार्टी के विस्तार के लिए प्रभावी ढंग से काम करेगी. उत्तर प्रदेश से शामिल नेताओं को भी नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दी गईं. पार्टी नेतृत्व ने सभी नेताओं से संगठन को जमीनी स्तर तक मजबूत करने की अपेक्षा जताई.
रेखा वर्मा और तारिक मंसूर को उपाध्यक्ष पद
नई टीम में यूपी की सामाजिक और क्षेत्रीय राजनीति का संतुलन साधने की कोशिश दिखाई देती है. रेखा वर्मा को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है, जो कुर्मी समाज से आती हैं और संगठनात्मक काम का अनुभव रखती हैं. उनके साथ प्रो. तारिक मंसूर को भी उपाध्यक्ष पद मिला है. पार्टी के लिए यह नियुक्ति इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि उत्तर प्रदेश में अलग-अलग सामाजिक समूहों को साधना 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठन की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है.
स्मृति ईरानी और हरीश द्विवेदी को बड़ी जिम्मेदारी
राष्ट्रीय महामंत्री के पद पर उत्तर प्रदेश से दो बड़े नाम शामिल किए गए हैं. पूर्व केंद्रीय मंत्री और अमेठी से सांसद रह चुकीं स्मृति ईरानी को नई जिम्मेदारी मिली है. उनके साथ बस्ती से सांसद रह चुके हरीश द्विवेदी को भी राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया है. दोनों नेताओं के पास संगठन और राजनीतिक गतिविधियों का अनुभव है. राष्ट्रीय महामंत्री का पद पार्टी के केंद्रीय संगठन में महत्वपूर्ण माना जाता है, इसलिए यूपी से दो नेताओं की नियुक्ति चर्चा में है.
राष्ट्रीय सचिवों में भी यूपी का दबदबा
राष्ट्रीय सचिवों की सूची में भी उत्तर प्रदेश को प्रतिनिधित्व मिला है. बुलंदशहर से सांसद डॉ. भोला सिंह और आजमगढ़ से जुड़ीं संगीता यादव को इस पद की जिम्मेदारी दी गई है. डॉ. भोला सिंह दलित समुदाय से आते हैं और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उनकी राजनीतिक पकड़ मानी जाती है. वहीं संगीता यादव को महिला और यादव चेहरे के तौर पर देखा जा रहा है. इन नियुक्तियों के जरिए पार्टी ने अलग-अलग सामाजिक समीकरणों को साधने का संदेश दिया है.
ओबीसी और अल्पसंख्यक मोर्चे की कमान भी यूपी को
बीजेपी की नई टीम में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व राष्ट्रीय मोर्चों तक भी पहुंचा है. अमरपाल मौर्य को राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चा अध्यक्ष बनाया गया है. वह कुशवाहा समाज से आते हैं और राज्यसभा सदस्य हैं. इसके अलावा कुंवर बासित अली को अल्पसंख्यक मोर्चे की कमान सौंपी गई है. दोनों नेताओं का संबंध उत्तर प्रदेश से है. ओबीसी और अल्पसंख्यक मोर्चों की जिम्मेदारी यूपी के नेताओं को मिलना सामाजिक विस्तार और संगठनात्मक रणनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है.
मीडिया और सोशल मीडिया में भी यूपी कनेक्शन
नई राष्ट्रीय टीम में मीडिया और सोशल मीडिया से जुड़े स्तर पर भी उत्तर प्रदेश का कनेक्शन दिखाई देता है. शिवानंद द्विवेदी को मीडिया और सोशल मीडिया की जिम्मेदारी दी गई है. सूची में उनका स्थान दिल्ली बताया गया है, लेकिन उनका संबंध उत्तर प्रदेश से बताया जाता है. चुनावी राजनीति में डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका लगातार बढ़ी है. ऐसे में मीडिया और सोशल मीडिया की जिम्मेदारी संभालने वाले चेहरे का यूपी कनेक्शन 2027 के चुनावी अभियान के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
आठ नेताओं को मिली अहम जिम्मेदारियां
उत्तर प्रदेश से नेताओं को मिली जिम्मेदारियों पर नजर डालें तो पार्टी ने संगठन के कई स्तरों पर प्रतिनिधित्व दिया है. उपाध्यक्ष पद पर रेखा वर्मा और प्रो. तारिक मंसूर, महामंत्री पद पर स्मृति ईरानी और हरीश द्विवेदी, सचिव पद पर डॉ. भोला सिंह और संगीता यादव शामिल हैं. वहीं अमरपाल मौर्य और कुंवर बासित अली को मोर्चों की जिम्मेदारी मिली है. इससे साफ है कि नई टीम में यूपी की हिस्सेदारी व्यापक रखी गई है.
2027 चुनाव से पहले रणनीतिक संदेश
2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए बीजेपी के लिए उत्तर प्रदेश सबसे महत्वपूर्ण राज्यों में शामिल है. ऐसे में राष्ट्रीय संगठन में प्रदेश से जुड़े नेताओं को प्रमुख जिम्मेदारियां मिलना राजनीतिक तौर पर अहम माना जा रहा है. नई टीम में राजस्थान की वसुंधरा राजे, राम माधव, तीरथ सिंह रावत और बैजयंत जय पांडा जैसे नेताओं को भी जगह मिली है. हालांकि, यूपी के आठ नेताओं की मौजूदगी ने संगठन और आगामी चुनावी रणनीति को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज कर दी है.
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