बुंदेलखंड समेत यूपी के 27 जिलों की बदलेगी तस्वीर, किशाऊ बांध से सिंचाई के लिए मिलेगा 3.721 अरब घन मीटर पानी

UP News: किशाऊ बहुउद्देश्यीय बांध परियोजना अब उत्तर प्रदेश के 27 जिलों के लिए जीवन रेखा बनेगी. यह परियोजना प्रदेश को 3.721 अरब घन मीटर पानी उपलब्ध कराएगी, जिससे सिंचाई और पेयजल की समस्या का समाधान होगा. यह खबर पश्चिम यूपी से लेकर बुंदेलखंड तक के किसानों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है.

UP News: उत्तर प्रदेश के लिए सिंचाई और पेयजल के लिहाज से बड़ी राहत की खबर है. वर्षों से अटकी किशाऊ बहुउद्देश्यीय बांध परियोजना के आगे बढ़ने से प्रदेश के 27 जिलों को फायदा मिलने की उम्मीद है. छह राज्यों के बीच हुए समझौते के तहत उत्तर प्रदेश को परियोजना से 3.721 अरब घन मीटर पानी मिलेगा. इससे खासकर सूखे और गर्मी के मौसम में सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बेहतर हो सकेगी.

पश्चिमी यूपी से लेकर बुंदेलखंड तक पहुंचेगा फायदा

परियोजना से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों के साथ बुंदेलखंड क्षेत्र में भी जल उपलब्धता सुधारने में मदद मिलने की बात कही गई है. योजना का सबसे बड़ा लाभ उन क्षेत्रों को मिल सकता है, जहां गर्मी के दिनों में सिंचाई और पेयजल की समस्या बढ़ जाती है. बांध बनने से यमुना बेसिन में पानी के बेहतर प्रबंधन की उम्मीद है.

इन 27 जिलों को मिलेगा लाभ

किशाऊ बांध परियोजना से लाभान्वित होने वाले जिलों में प्रयागराज, कानपुर देहात, कानपुर नगर, कौशांबी, फतेहपुर, बांदा, महोबा, चित्रकूट, झांसी, ललितपुर, आगरा, अलीगढ़, औरैया, बागपत, बिजनौर, बुलंदशहर, एटा, इटावा, फिरोजाबाद, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, जालौन, हाथरस, मैनपुरी, मथुरा, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर शामिल हैं.

यमुना में पानी का बेहतर नियमन होगा

सिंचाई विभाग के अनुसार किशाऊ बांध बनने से मानसून के दौरान यमुना में आने वाले अतिरिक्त पानी को नियंत्रित तरीके से इस्तेमाल किया जा सकेगा. गर्मी और सूखे के मौसम में बांध में जमा पानी से उत्तर प्रदेश के हिस्से का पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा. इससे सिंचाई के साथ पेयजल आपूर्ति को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है.

सहारनपुर-शामली समेत कई इलाकों में मजबूत होगा सिंचाई नेटवर्क

परियोजना के तहत हथिनीकुंड बैराज से निकलने वाली पूर्वी यमुना नहर के जरिए सहारनपुर, शामली और आसपास के क्षेत्रों में सिंचाई नेटवर्क को मजबूती मिलने की संभावना है. वहीं बागपत, मेरठ और मुजफ्फरनगर जैसे कृषि प्रधान इलाकों में भी पानी की उपलब्धता बेहतर हो सकती है. गाजियाबाद, हापुड़ और गौतमबुद्ध नगर जैसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों में भी पेयजल जरूरतों को पूरा करने में परियोजना की भूमिका अहम हो सकती है.

1994 के समझौते के तहत यूपी को मिलेगा पानी

समाचार के अनुसार 1994 में हुए समझौते के तहत उत्तर प्रदेश को किशाऊ बांध से आवंटित हिस्से के मुताबिक पानी मिल सकेगा. परियोजना से जुड़ी व्यवस्था पूरी होने के बाद गर्मी और सूखे के दौरान भी यूपी अपने हिस्से के पानी का इस्तेमाल कर सकेगा. इससे यमुना बेसिन के साथ प्रदेश के कई कृषि और शहरी क्षेत्रों में जल उपलब्धता को सहारा मिलने की उम्मीद है.

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By नटवर कुमार

नटवर कुमार पत्रकारिता के क्षेत्र में दो वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले पत्रकार हैं.वे ग्राउंड रिपोर्टिंग और जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से कवर करते हैं. राजनीतिक घटनाक्रम, स्थानीय समस्याओं, प्रशासनिक गतिविधियों, अपराध, सामाजिक मुद्दों और आम लोगों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि है. उनका प्रयास खबरों को तथ्यात्मक, स्पष्ट और पाठकों के लिए उपयोगी तरीके से प्रस्तुत करना रहता है.नटवर कुमार ने इतिहास में मास्टर ऑफ आर्ट्स (M.A. History) और मास्टर इन जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की पढ़ाई पटना से की है. इतिहास और पत्रकारिता में उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें घटनाओं को व्यापक संदर्भ में समझने और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने में मदद करती है.इस दौरान उन्होंने दूरदर्शन पटना में भी समय दिया है. नटवर कुमार मूल रूप से बिहार के दिनकर की भूमि बेगूसराय जिले के रहने वाले हैं.

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