UP News: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब मथुरा के विश्व प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर से चांदी का रथ, सिंहासन और कई बहुमूल्य सामान गायब होने के आरोपों ने सनसनी फैला दी है. संत समाज ने इसे आस्था से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए सीबीआई या एसआईटी जांच की मांग उठाई है. आरोप है कि वर्षों से श्रद्धालुओं द्वारा दान की गई कीमती वस्तुएं रहस्यमयी तरीके से गायब होती रहीं, जिससे मंदिर प्रशासन पर भी सवाल खड़े हो गए हैं.
सीएम योगी को पत्र लिखकर CBI या SIT जांच की मांग
इस पूरे मामले को लेकर संत फलाहारी महाराज ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजा है. उन्होंने मांग की है कि मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी, जैसे सीबीआई (CBI) या एसआईटी (SIT) से कराई जाए. उनका कहना है कि अगर निष्पक्ष जांच होगी तो मंदिर से गायब हुए बहुमूल्य सामान और इसके जिम्मेदार लोगों का पता लगाया जा सकेगा.
20 साल से निकलने वाला चांदी का रथ इस बार नहीं दिखा
संत फलाहारी महाराज का कहना है कि पिछले करीब 20 वर्षों से ठाकुर बांके बिहारी जी रथ यात्रा के दौरान चांदी के रथ पर विराजमान होकर श्रद्धालुओं को दर्शन देते रहे हैं, लेकिन इस वर्ष वह रथ दिखाई नहीं दिया. उनका आरोप है कि सिर्फ रथ ही नहीं, बल्कि चांदी का सिंहासन, चार चांदी के पलंग और ठाकुर जी के उपयोग में आने वाली कई अन्य कीमती वस्तुएं भी मंदिर से गायब हैं. यही वजह है कि श्रद्धालुओं और संत समाज के बीच चिंता बढ़ गई है.
श्रद्धालुओं के दान की सुरक्षा पर उठे सवाल
फलाहारी महाराज ने अपने पत्र में कहा है कि देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालु भगवान बांके बिहारी की सेवा के लिए सोने-चांदी के आभूषण, बर्तन और अन्य बहुमूल्य वस्तुएं दान करते हैं. श्रद्धालुओं की भावना होती है कि उनका दान केवल ठाकुर जी की सेवा और पूजा में उपयोग हो. लेकिन आरोप है कि वर्षों से यह बहुमूल्य सामान धीरे-धीरे गायब होता जा रहा है. ऐसे में दान की सुरक्षा और मंदिर की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं.
सीसीटीवी फुटेज की जांच कराने की उठी मांग
संत फलाहारी महाराज का कहना है कि अगर पिछले कई वर्षों के सीसीटीवी फुटेज की निष्पक्ष तरीके से जांच कराई जाए तो पूरे मामले का सच सामने आ सकता है. उनका मानना है कि जांच के जरिए यह पता लगाया जा सकता है कि मंदिर का सामान कब और कैसे गायब हुआ तथा इसके लिए जिम्मेदार कौन लोग हैं.
सनातन आस्था से जुड़ा मामला बताया
उन्होंने कहा कि यह सिर्फ चोरी का मामला नहीं, बल्कि करोड़ों सनातनी श्रद्धालुओं की आस्था और धार्मिक परंपराओं से जुड़ा विषय है. उनके मुताबिक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ही इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करा सकते हैं. उन्होंने मांग की कि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों.
संत समाज में बढ़ा आक्रोश
उधर, बांके बिहारी मंदिर के सेवायत गोस्वामी और बांके बिहारी हाई पावर्ड कमेटी के पूर्व सदस्य ने भी इस मामले पर चिंता जताई है. उनका कहना है कि इस बार ठाकुर जी को परंपरा के अनुसार चांदी के घोड़े पर सवार नहीं कराया गया, जिससे वर्षों पुरानी धार्मिक परंपरा टूटती दिखाई दी. इसे लेकर साधु-संतों में नाराजगी है. वहीं साध्वी इंदुलेखा ने भी मंदिर से दान में मिली बहुमूल्य वस्तुओं के कथित रूप से गायब होने पर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आए और यदि कोई दोषी है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाए.
