UP News: उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा एजेंसियों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध घुसपैठ की एक गंभीर साजिश को नाकाम कर दिया. रूपईडीहा बॉर्डर पर सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में प्रतिबंधित संगठन 'वारिस पंजाब दे' के मोस्ट वांटेड आरोपी विक्रमजीत सिंह को एक विदेशी नागरिक मंजीत सिंह के साथ भारत में अवैध रूप से प्रवेश करते समय गिरफ्तार कर लिया गया. सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, दोनों नेपाल के रास्ते भारत में दाखिल होने की कोशिश कर रहे थे. गिरफ्तारी के बाद उनसे गहन पूछताछ की जा रही है.
अजनाला थाने पर हमले का आरोपी है विक्रमजीत सिंह
पुलिस के अनुसार, विक्रमजीत सिंह वर्ष 2023 में पंजाब के अमृतसर जिले के अजनाला थाने पर हुए चर्चित हमले का मुख्य आरोपियों में शामिल रहा है. उस समय 'वारिस पंजाब दे' के प्रमुख अमृतपाल सिंह के समर्थकों ने अपने साथी लवप्रीत सिंह उर्फ 'तूफान' को छुड़ाने के लिए थाने पर हमला कर दिया था. इस हिंसक घटना में कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे. भारी दबाव के बाद पुलिस को लवप्रीत सिंह को रिहा करना पड़ा था. घटना के बाद से विक्रमजीत सिंह फरार चल रहा था और फर्जी दस्तावेजों के सहारे नेपाल में छिपा हुआ था.
घुसपैठ कराने वाले स्थानीय नेटवर्क का भी खुलासा
जांच के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने नेपाल से भारत में अवैध घुसपैठ कराने वाले स्थानीय नेटवर्क का भी भंडाफोड़ किया है. इस मामले में सुरेश पाठक, दिलीप उपाध्याय और वाहन चालक राहुल कुमार को गिरफ्तार किया गया है. प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ये लोग सीमा पार कराने, वाहन उपलब्ध कराने और आरोपियों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में मदद कर रहे थे.
इंटरनेशनल नेटवर्क की जांच में जुटीं एजेंसियां
घटना के बाद खुफिया एजेंसियां, एसएसबी, इमीग्रेशन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीमें आरोपियों से लगातार पूछताछ कर रही हैं. जांच का फोकस इस बात पर है कि इस नेटवर्क के तार किन लोगों और किन देशों तक जुड़े हैं. सुरक्षा एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि नेपाल में फरार आरोपी को किसने संरक्षण दिया और भारत में उसके संपर्क कौन-कौन थे.
एसपी बोले- पंजाब पुलिस को दी गई सूचना
बहराइच के पुलिस अधीक्षक विश्वजीत श्रीवास्तव ने बताया कि मामले की जानकारी पंजाब पुलिस को दे दी गई है. सभी आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड और उनके नेटवर्क की गहन जांच की जा रही है. संबंधित एजेंसियां मिलकर पूरे मॉड्यूल का खुलासा करने में जुटी हैं.
सीमा सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
भारत-नेपाल की खुली सीमा का दुरुपयोग कर अवैध घुसपैठ और फरार आरोपियों के प्रवेश की कोशिश ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है. इस कार्रवाई को सीमा सुरक्षा के लिहाज से बड़ी सफलता माना जा रहा है, वहीं जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए लगातार कार्रवाई कर रही हैं.
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