Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले के आरोपी टिन्नू यादव को लेकर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के बीच शुरू हुआ विवाद अब कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है. समाजवादी अधिवक्ता सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कृष्ण कन्हैया पाल की ओर से भेजे गए मानहानि नोटिस का जवाब देते हुए निशिकांत दुबे ने आरोपों को निराधार बताया है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनके किसी बयान से अनजाने में किसी की भावनाएं आहत हुई हों या किसी की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची हो तो उन्हें इसका खेद है और वह माफी मांगते हैं.
लीगल नोटिस का चार पेज में दिया जवाब
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने 9 जुलाई 2026 को अपने अधिवक्ता ऋषि के. अवस्थी के माध्यम से चार पन्नों का जवाब भेजा. इसमें उन्होंने नोटिस में लगाए गए सभी आरोपों को तथ्यहीन और निराधार बताया. साथ ही स्पष्ट किया कि यदि उनके किसी बयान को अपमानजनक या मानहानिकारक माना गया हो तो वह उसके लिए खेद व्यक्त करते हैं. उन्होंने यह भी लिखा कि यह माफी केवल विवाद समाप्त करने और सार्वजनिक संवाद की गरिमा बनाए रखने के उद्देश्य से है, इसे किसी कानूनी गलती या आरोप स्वीकार करने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए.
X पर माफी को लेकर शुरू हुई नई बहस
नोटिस के जवाब के बाद समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने सोमवार शाम X पर पोस्ट कर कहा कि निशिकांत दुबे को तभी माफी मिलेगी, जब वह अखिलेश यादव से भी माफी मांगेंगे. इसके बाद सोशल मीडिया पर यह चर्चा तेज हो गई कि भाजपा सांसद ने अखिलेश यादव से भी माफी मांग ली है. इन दावों पर निशिकांत दुबे ने खुद X पर सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने अखिलेश यादव से कोई माफी नहीं मांगी है. उन्होंने लिखा कि समाजवादी पार्टी के लोग अफवाह फैला रहे हैं और उनका जवाब केवल कानूनी नोटिस के संदर्भ में था.
कैसे शुरू हुआ था पूरा विवाद?
यह विवाद 5 जुलाई को शुरू हुआ था, जब भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सरवन्ना प्रसाद बालासुब्रमण्यम की एक पोस्ट साझा की थी. उस पोस्ट में पुलिस जांच और कथित कॉल रिकॉर्ड के आधार पर दावा किया गया था कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले के आरोपी टिन्नू यादव की समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव से नियमित बातचीत होती थी. इस पोस्ट को शेयर करते हुए निशिकांत दुबे ने लिखा था, "टिन्नू टीपू से ही तो बात कर रहा था?"
अखिलेश यादव ने दी थी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
पोस्ट सामने आने के बाद अखिलेश यादव ने निशिकांत दुबे को 10 मिनट के भीतर पोस्ट हटाने की चेतावनी दी थी. उन्होंने कहा था कि यदि पोस्ट नहीं हटाई गई तो उनके खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कराई जाएगी. अखिलेश ने इसे झूठा प्रचार बताते हुए कहा कि भाजपा पीडीए गठबंधन को बदनाम करने की कोशिश कर रही है. जवाब में निशिकांत दुबे ने भी X पर लिखा था कि उन्होंने केवल एक सवाल पूछा है और जरूरत पड़ी तो वह अदालत जाएंगे.
सपा ने भेजा था मानहानि का नोटिस
7 जुलाई को समाजवादी अधिवक्ता सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कृष्ण कन्हैया पाल ने भाजपा सांसद को कानूनी नोटिस भेजा. नोटिस में विवादित पोस्ट हटाने, सार्वजनिक माफी मांगने और अन्यथा कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी. इसी नोटिस के जवाब में अब निशिकांत दुबे ने अपना पक्ष रखा है.
कौन है टिन्नू यादव?
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले का आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव पहले चंपत राय का चालक रह चुका है और फिलहाल जेल में बंद है. विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट के अनुसार, उसके पास बिना किसी लिखित आदेश के मंदिर की हुंडियों की चाबियों और उनसे जुड़ी व्यवस्थाओं तक पहुंच थी. रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि टिन्नू यादव की सिफारिश पर मनीष कुमार यादव को दान की गणना के कार्य में लगाया गया था, जो बाद में चोरी के मामले में आरोपी पाया गया. एसआईटी ने इसे मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर चूक माना है.
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