Allahabad High Court : इलाहाबाद हाई कोर्ट में अधिकारियों की पेशी को लेकर सरकार ने सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं. अब कोर्ट की कार्रवाई में व्यक्तिगत रूप से या वर्चुअल माध्यम से शामिल होने वाले अधिकारियों को निर्धारित ड्रेस कोड का पालन करना अनिवार्य होगा. यह निर्देश अधिकारियों के कोर्ट में पेश होने और हलफनामा दाखिल करने के दौरान लागू होगा.
कोर्ट की गरिमा और प्रोटोकॉल का रखना होगा ध्यान
इलाहाबाद हाई कोर्ट की ओर से अधिकारियों के ड्रेस कोड में पेश होने को लेकर सख्त आदेश जारी किया गया था. इसके बाद चीफ स्टैंडिंग काउंसिल मनोज कुमार सिंह की ओर से चीफ सेक्रेटरी और प्रमुख सचिव न्याय को पत्र भेजा गया. पत्र में कहा गया कि कोर्ट के आदेशों के क्रम में जब अधिकारी व्यक्तिगत रूप से पेश होते हैं या हलफनामा दाखिल करते हैं, तो कई बार निर्धारित प्रोटोकॉल और कोर्ट की गरिमा का पालन नहीं किया जाता है. इसके बाद सरकार की ओर से अधिकारियों के लिए नई गाइडलाइन जारी की गयी.
कोर्ट ने मुख्य स्थायी वकील को किया था तलब
इस मामले को गंभीरता से लेते हुए हाई कोर्ट ने मुख्य स्थायी वकील को तलब किया था. कोर्ट ने राज्य सरकार को तत्काल आवश्यक दिशा-निर्देश और सर्कुलर जारी करने को कहा. इसके बाद मनोज कुमार सिंह के पत्र के आधार पर न्याय विभाग के माध्यम से नियुक्ति अनुभाग ने प्रदेश के सभी आईएएस अधिकारियों, डीएम, पुलिस आयुक्तों और मंडलायुक्तों के लिए आदेश जारी कर दिए.
वर्चुअल पेशी में भी ड्रेस कोड अनिवार्य
सरकार की ओर से जारी गाइडलाइन के अनुसार, कोर्ट में अधिकारी चाहे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हों या वर्चुअल माध्यम से, उन्हें निर्धारित ड्रेस कोड में ही पेश होना होगा. हलफनामे के साथ लगायी जाने वाली अधिकारी की फोटो भी हाल की होनी चाहिए. फोटो में अधिकारी शालीन कपड़ों में नजर आने चाहिए. फोटो में आधुनिक या भड़कीले कपड़े, खुले बाल और रंगीन चश्मे की अनुमति नहीं होगी.
शपथ पत्र में सिर्फ नीली स्याही का इस्तेमाल
नई गाइडलाइन में हलफनामे को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं. शपथ पत्र दाखिल करने वाले अधिकारी, शपथ आयुक्त या नोटरी के हस्ताक्षर और मोहर में केवल नीली स्याही का इस्तेमाल किया जाएगा. इनमें लाल, काली, हरी या किसी अन्य रंग की स्याही के इस्तेमाल पर रोक लगायी गयी है. सरकार ने सभी संबंधित अधिकारियों को जारी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया है.
