16 लाख रुपये देकर पिता ने लगवाई बेटी की नौकरी, वेतन नहीं मिला तो खुली ठगी की पूरी कहानी, जाने पूरा मामला

सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर एक पिता से 16 लाख रुपये की ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है. ठगों ने बेटी को फर्जी नियुक्ति पत्र देकर करीब ढाई महीने तक सरकारी कार्यालय में नौकरी भी कराई, जिसके बाद पूरा फर्जीवाड़ा सामने आ गया.

Government Job Fraud : आगरा में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर एक पिता से 16 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है. आरोप है कि ठगों ने बेटी को फर्जी नियुक्ति पत्र देकर करीब ढाई महीने तक सरकारी कार्यालय में नौकरी भी कराई. जब वेतन नहीं मिला और तबादले के नाम पर उसे रायबरेली भेजा गया, तो वहां पहुंचने पर पूरा फर्जीवाड़ा सामने आ गया. मामले में भाजपा विधायक के भाई और भाभी समेत छह लोगों के खिलाफ लोहामंडी थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है.

बेटी को नौकरी मिली तो परिवार को लगा सपना सच हो गया

लोहामंडी थाना क्षेत्र के तोता का ताल निवासी अमर सिंह कुशवाह ने पुलिस आयुक्त दीपक कुमार से शिकायत कर पूरे मामले की जानकारी दी. उन्होंने आरोप लगाया कि 12 जनवरी को उनके बेटे पीयूष और बेटी वैशाली को सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा दिया गया था. आरोप है कि इस पूरे मामले में मंजू कुशवाह और उनके पति विजयपाल सिंह कुशवाह की भूमिका रही. विजयपाल सिंह स्थानीय भाजपा विधायक भगवान सिंह कुशवाह के भाई बताए गए हैं. शिकायत के मुताबिक, मंजू खुद को सरकारी अध्यापिका बताती थीं, जबकि सिरसागंज निवासी राजेश कुमार बघेल ने खुद को सरकारी महाविद्यालय का प्रधानाचार्य बताते हुए लखनऊ सचिवालय तक पहुंच होने का दावा किया था.

20 लाख से शुरू हुआ सौदा, 16 लाख में हुई बात

अमर सिंह के मुताबिक, दोनों बच्चों को सरकारी नौकरी दिलाने के लिए पहले 20 लाख रुपये में सौदा तय किया गया था. बाद में रकम घटाकर 16 लाख रुपये कर दी गई. बेटी की शादी के लिए रखे जेवर और पुश्तैनी आभूषण गिरवी रखकर उन्होंने रकम जुटाई. आरोप है कि 15 जनवरी को सात लाख रुपये और 25 जनवरी को 6.50 लाख रुपये नकद दिए गए. इसके बाद नौकरी दिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई.

लखनऊ ले जाकर दिया गया नियुक्ति पत्र

शिकायत के अनुसार, 21 जनवरी को राजेश कुमार बघेल वैशाली को लखनऊ के इंदिरा भवन ले गया. वहां उसे नियुक्ति पत्र दिया गया. इसके अगले ही दिन उसकी ड्यूटी हाथरस जिला पंचायत कार्यालय में लगा दी गई. वैशाली ने वहां करीब ढाई महीने तक काम किया. परिवार को लगा कि बेटी की सरकारी नौकरी लग गई है और अब भविष्य सुरक्षित हो गया है. लेकिन जल्द ही उन्हें नौकरी के फर्जी होने का शक होने लगा.

वेतन मांगा तो तबादले की बात कहकर टाल दिया

करीब ढाई महीने काम करने के बावजूद जब वैशाली को वेतन नहीं मिला तो उसने आरोपियों से जानकारी मांगी. शिकायत के मुताबिक, आरोपियों ने स्पष्ट जवाब देने के बजाय उसका तबादला रायबरेली किए जाने की बात कही. इसके बाद 24 मार्च को वैशाली को लखनऊ के गोमती नगर स्थित एक केंद्र पर ले जाया गया. वहां उसकी फर्जी सर्विस बुक भी तैयार कराई गई.

रायबरेली पहुंचते ही खुल गया पूरा खेल

10 अप्रैल को जब वैशाली रायबरेली पहुंची तो वहां उसे कोई नौकरी ही नहीं मिली. संबंधित कार्यालय में उसके नाम पर ऐसी कोई नियुक्ति नहीं होने की जानकारी सामने आई. इसके बाद परिवार को समझ आया कि जिस सरकारी नौकरी के लिए उन्होंने अपनी जमा-पूंजी और जेवर तक गिरवी रख दिए थे, वह पूरी तरह फर्जी थी.

बेटे को RBI में नौकरी दिलाने के नाम पर भी ठगी

अमर सिंह का आरोप है कि आरोपियों ने उनके बेटे पीयूष को भारतीय रिजर्व बैंक में नौकरी दिलाने का भी भरोसा दिया था. इसके लिए उनसे 2.10 लाख रुपये नकद और 40 हजार रुपये यूपीआई के माध्यम से लिए गए. इस तरह परिवार से नौकरी दिलाने के नाम पर बड़ी रकम वसूली गई.

विधायक के भाई-भाभी समेत छह पर FIR

पीड़ित की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मंजू कुशवाह, विजयपाल सिंह कुशवाह, राजेश कुमार बघेल, योगेंद्र प्रताप सिंह बघेल, सुदेश कुमार और कुमारी अनुज के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है. मामला सामने आने के बाद आरोपी पक्ष ने भी खुद को ठगी का शिकार बताया है. विधायक के भाई विजयपाल सिंह और उनकी पत्नी का कहना है कि मुख्य आरोपी राजेश बघेल और उसके साथियों ने उनके साथ भी एक करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की है. उनका दावा है कि सामने आए पैसों के लेन-देन का संबंध ठगी की रकम वापस मांगने से है और वे खुद भी इस पूरे मामले में पीड़ित हैं.

पुलिस ने शुरू की मामले की जांच

एसीपी लोहामंडी गौरव सिंह के मुताबिक, शिकायत के आधार पर प्रारंभिक जांच के बाद प्राथमिकी दर्ज की गई है. पुलिस टीम मामले की विस्तृत जांच कर रही है. जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. सरकारी नौकरी के नाम पर फर्जी नियुक्ति पत्र, नकली सर्विस बुक और महीनों तक सरकारी कार्यालय में काम कराने का यह मामला अब पुलिस जांच के दायरे में है. जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस फर्जीवाड़े में किसकी कितनी भूमिका थी और नौकरी के नाम पर जुटाई गई रकम का पूरा नेटवर्क कितना बड़ा है.

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By रवि रंजन कुमार

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