UP Politics: अतीक अहमद के परिवार में सबसे छोटे बेटे अबान अहमद की मौत के बाद प्रयागराज की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है. अबान के अंतिम संस्कार में उमड़ी भारी भीड़ और जेल से पैरोल पर पहुंचे उनके बड़े भाइयों उमर और अली की मौजूदगी ने नई चर्चाओं को जन्म दिया है. दोनों भाइयों की भावुक तस्वीरों के सामने आने के बाद समर्थकों के बीच अतीक की राजनीतिक विरासत आगे बढ़ाने को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं.
क्या 2027 में चुनाव लड़ेंगे उमर?
अब सियासी गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अतीक अहमद के बड़े बेटे उमर अहमद 2027 के विधानसभा चुनाव में किस्मत आजमा सकते हैं. चर्चा सबसे ज्यादा प्रयागराज शहर पश्चिमी सीट को लेकर है, जिसे लंबे समय तक अतीक परिवार का मजबूत राजनीतिक क्षेत्र माना जाता रहा है. हालांकि उमर या उनके परिवार की ओर से चुनाव लड़ने को लेकर अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है. इसलिए फिलहाल इसे केवल राजनीतिक अटकल के तौर पर देखा जा रहा है.
AIMIM से जुड़ाव ने बढ़ाई चर्चा
अबान के जनाजे के बाद उमर और अली की मुलाकात AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली से हुई. इस दौरान दोनों भाइयों ने असदुद्दीन ओवैसी के लिए अपना सलाम और संदेश भी भेजा. इसके बाद उमर के संभावित राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं और तेज हो गईं. शौकत अली ने कहा कि अतीक का परिवार अभी भी पार्टी से जुड़ा हुआ है. हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनाव लड़ने को लेकर परिवार की ओर से फिलहाल कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई है.
पार्टी ने दिया चुनाव लड़ने का संकेत
AIMIM के प्रयागराज महानगर अध्यक्ष अफसर महमूद ने कहा है कि यदि अतीक परिवार का कोई सदस्य चुनाव लड़ना चाहता है तो पार्टी उसका स्वागत करेगी. उन्होंने बताया कि अतीक अहमद ने 2022 में AIMIM का दामन थामा था और उनकी पत्नी शाइस्ता परवीन भी पार्टी से जुड़ी थीं. बाद में शाइस्ता ने पार्टी छोड़ दी, लेकिन परिवार के अन्य सदस्यों के पार्टी से संबंध बने रहने की बात कही जाती है. इससे उमर की संभावित सियासी एंट्री को लेकर अटकलें बढ़ी हैं.
पल्लवी पटेल की मुलाकात से भी चर्चा तेज
अतीक परिवार के साथ अपना दल कमेरावादी की नेता और विधायक पल्लवी पटेल की मुलाकात ने भी राजनीतिक चर्चाओं को हवा दी है. पल्लवी पटेल प्रयागराज पहुंचीं और उन्होंने परिवार के सदस्यों से मुलाकात की. इस मुलाकात को 2027 की संभावित सियासी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है. हालांकि पल्लवी पटेल की ओर से इस मुलाकात को लेकर कोई स्पष्ट राजनीतिक बयान सामने नहीं आया है. अतीक के पुराने राजनीतिक संबंधों के कारण इस मुलाकात पर निगाहें टिक गई हैं.
प्रयागराज पश्चिम सीट क्यों अहम?
प्रयागराज शहर पश्चिमी विधानसभा सीट अतीक अहमद के राजनीतिक सफर की सबसे महत्वपूर्ण सीट रही है. उन्होंने 1989 में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर इसी सीट से चुनाव जीतकर राजनीति में मजबूत शुरुआत की थी. इसके बाद 1991 और 1993 में भी उन्होंने जीत दर्ज की. 1996 में समाजवादी पार्टी और 2002 में अपना दल के टिकट पर भी अतीक इस सीट से विधायक बने. इसी वजह से 2027 में उमर के संभावित चुनाव को इसी सीट से जोड़कर देखा जा रहा है.
अतीक के बाद परिवार की राजनीतिक पकड़ कितनी?
अतीक अहमद की हत्या के बाद प्रयागराज में उनके परिवार के राजनीतिक प्रभाव को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं. हालांकि समर्थकों और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों में आज भी उनके नाम की चर्चा होती है, लेकिन परिस्थितियां पहले जैसी नहीं हैं. अब मतदाताओं के सामने रोजगार, शिक्षा, विकास और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दे भी अहम हैं. ऐसे में केवल पारिवारिक विरासत के आधार पर चुनावी सफलता तय होना आसान नहीं माना जा सकता. 2027 का चुनाव वास्तविक प्रभाव की तस्वीर साफ कर सकता है.
अंतिम फैसला अभी बाकी
फिलहाल उमर अहमद के चुनाव लड़ने, सीट चुनने या किसी पार्टी के टिकट पर मैदान में उतरने को लेकर कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है. AIMIM की ओर से समर्थन की संभावनाओं की बात जरूर कही गई है, जबकि अन्य राजनीतिक संपर्कों ने भी अटकलों को बढ़ाया है. जेल में बंद उमर और अली के राजनीतिक भविष्य को लेकर अब प्रयागराज में चर्चाएं जारी हैं. अगर उमर चुनावी मैदान में उतरते हैं, तो 2027 में प्रयागराज पश्चिम सीट बेहद चर्चित मुकाबला बन सकती है.
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