UP Politics: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चुनावी चेहरा बताए जाने के सवाल पर दिए गए जवाब और एनडीए सहयोगी निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद के बयानों ने सियासी गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है. दोनों नेताओं के बयान आगामी चुनावी रणनीति और गठबंधन की स्थिति को लेकर कई सवाल खड़े कर रहे हैं.
CM योगी के नाम पर पंकज चौधरी का जवाब बना चर्चा का विषय
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी से जब पूछा गया कि क्या 2027 विधानसभा चुनाव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लड़ा जाएगा, तो उन्होंने सीधे तौर पर 'हां' या 'ना' में जवाब नहीं दिया. उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी एक संगठन आधारित पार्टी है और परिवारवाद में विश्वास नहीं करती. उन्होंने कहा कि पार्टी के पास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह समेत कई वरिष्ठ नेता हैं. बीजेपी सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ती है और चुनाव के बाद विधायक दल मुख्यमंत्री का चयन करता है. उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में अलग-अलग तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं.
संजय निषाद बोले- 'हम बीजेपी के बरामदे में बैठे हैं'
एनडीए सहयोगी निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मंत्री संजय निषाद ने गठबंधन की राजनीति पर खुलकर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य निषाद समाज को अधिकार दिलाना है. उन्होंने बताया कि पहले वे समाजवादी पार्टी के साथ थे, लेकिन अब बीजेपी के साथ मिलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मजबूत करने का काम कर रहे हैं. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वे बीजेपी के "घर के अंदर नहीं, बल्कि बरामदे में बैठे हैं." उन्होंने संकेत दिया कि यदि बीजेपी उनके लिए दरवाजे बंद करती है और कोई अन्य दल अवसर देता है तो समाज के हित में विकल्पों पर विचार किया जा सकता है. हालांकि उन्होंने किसी नए राजनीतिक गठबंधन में जाने की घोषणा नहीं की.
ओम प्रकाश राजभर पर साधा निशाना
संजय निषाद ने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर पर भी तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि अतरौलिया विधानसभा सीट पर फैसला कोई अकेले नहीं कर सकता. सीटों का बंटवारा गठबंधन के सभी दलों की सहमति से होगा. उन्होंने यह भी कहा कि राजनीति में सही सलाहकार सफलता दिलाते हैं, जबकि गलत सलाहकार नुकसान पहुंचाते हैं. उनके मुताबिक, किसी दूसरी पार्टी का टिकट लेने भर से निषाद समाज का वोट किसी उम्मीदवार को नहीं मिल जाता. उन्होंने भरोसा जताया कि गठबंधन के भीतर सभी मुद्दों का समाधान बातचीत से निकलेगा, लेकिन साथ ही यह भी दोहराया कि उन्हें किसी भी स्थिति में "टेकन फॉर ग्रांटेड" नहीं लिया जाना चाहिए.
क्या हैं राजनीतिक मायने?
पंकज चौधरी और संजय निषाद के हालिया बयानों ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है. एक ओर बीजेपी के मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर चर्चा तेज हुई है, तो दूसरी ओर एनडीए के भीतर सहयोगी दलों की भूमिका और सीट बंटवारे को लेकर भी अटकलों का दौर शुरू हो गया है. ऐसे में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति और अधिक दिलचस्प होने के संकेत मिल रहे हैं.
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