Kashi Tamil Sangamam: वाराणसी में पीएम मोदी ने काशी-तमिल संगमम् कार्यक्रम का किया उद्घाटन

Kashi Tamil Sangamam: पीएम नरेंद्र मोदी ने आज वाराणसी में काशी तमिल संगमम् (Kashi Tamil Sangamam) कार्यक्रम का उद्घाटन किया. इस कार्यक्रम का आयोजन बीएचयू के एम्फी थिएटर ग्राउंड में किया गया. कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे.

Varanasi News: वाराणसी में काशी तमिल संगमम् (Kashi Tamil Sangamam) का आज पीएम नरेंद्र मोदी ने उद्घाटन किया. इस दौरान काशी तमिल संगमम् के माध्यम से द्रविण संस्कृति के केंद्र बिंदु तमिलनाडु की संस्कृति, खान-पान, गीत-संगीत का काशी में सीधे साक्षात्कार हुआ. साथ ही भगवान विश्वेश्वर की धरती पर रामेश्वर की संस्कृति प्रकाशमान हुई. कार्यक्रम में प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे.

काशी आगमन से पहले पीएम मोदी ने किया ट्वीट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज वाराणसी आगमन से पहले ट्वीट कर अपनी उत्सुकता जाहिर की. काशी आगमन से पहले पीएम ने ट्वीट कर लिखा, ‘वाराणसी में होने वाले काशी तमिल संगमम् कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर बहुत उत्सुक हूं. यह एक ऐसा भव्य और ऐतिहासिक अवसर होगा, जिसमें भारत के सांस्कृतिक जुड़ाव और तमिल भाषा की सुंदरता का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा.

बीएचयू के एम्फी थिएटर ग्राउंड में होगा कार्यक्रम

काशी तमिल संगमम् कार्यक्रम के लिये वाराणसी में बीएचयू के एम्फी थिएटर ग्राउंड में तमिलनाडु की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाने के लिए 75 स्टॉल लगाए गए हैं. इनमे तमिलनाडु के हैंडीक्राफ्ट और हैंडलूम से बने उत्पादों को प्रदर्शित किया जाएगा. इसके अलावा फ्रीडम फाइटर्स पर आधारित एक प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी. नेशनल बुक ट्रस्ट की प्रदर्शनी, सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ़ लैंग्वेज की ओर से प्रदर्शनी और पब्लिक कन्वर्सेशन का भी आयोजन होगा. 30 दिन तक चलने वाले काशी तमिल संगमम् में 51 सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा. इसमे तमिलनाडु के करीब-करीब सभी रंग दिखेंगे.

तमिलनाडु की संस्कृति से जुड़े सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे

तमिलनाडु की संस्कृति से जुड़े सांस्कृतिक कार्यक्रमों में मुख्यतः मीनाक्षी चितरंजन का भरतनाट्यम, तमिलनाडु का फोक म्यूजिक, इरुला व अन्य ट्राइबल नृत्य, विल्लुपाट्ट एक प्राचीन संगीतमय कथा-कथन, पौराणिक ऐतिहासिक ड्रामा, शिव पुराण, रामायण और महाभारत पर आधारित कठपुतली शो देखने को मिलेंगे. ये आयोजन दर्शाएंगे कि काशी और तमिलनाडु की भाषा, खान-पान, रहन सहन भले ही अलग हो, लेकिन अभिव्यक्ति का तरीका और इसकी आत्मा एक ही है.

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By Sohit Kumar

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