वसुंधरा राजे की झालारापाटन में स्थिति मजबूत, लेकिन कांग्रेस पेश कर सकती है ये चुनौतियां, जानें पूरा समीकरण

Rajasthan Election: झालरापाटन विधानसभा सीट में बीते 35 सालों से करीब हर बार चुनाव में बीजेपी जीत दर्ज करती है. इस सीट पर दूसरे दलों के कई नेता किस्मत आजमा चुके हैं, लेकिन हर बार उन्हें मुंह की खानी पड़ती है. हालांकि एक बार फिर कांग्रेस सेंधमारी की तैयारी कर रही है.

Rajasthan Election: राजस्थान में इसी साल नवंबर अंत विधानसभा चुनाव होने की उम्मीद है. सियासी दलों ने कमर कस ली है. जीत की कवायद में हर दल ज्यादा से ज्यादा लोगों को रिझाने में जुटा हुआ है. चुनाव को लेकर राजस्थान में राजनीतिक सरगर्मी उफान पर है. राजस्थान विधानसभा में कई ऐसे सीट हैं जहां चुनाव से पहले ही प्रत्याशी की जीत तय मानी जाती है.  कोटा संभाग में झालरापाटन विधानसभा सीट का भी ऐसा कुछ समीकरण हर बार नजर आता है. इस सीट को बीजेपी का गढ़ कहा जाता है. प्रदेश की पूर्व सीएम और बीजेपी नेता वसुंधरा राजे यहां से लगातार चार बार काफी बड़े अंतर से जीत दर्ज कर चुकी हैं. यहीं नहीं बीजेपी बीते 35 सालों से इस सीट पर फतह हासिल कर रही है.

झालरापाटन से कोई नहीं टिकता बीजेपी के मुकाबले
झालरापाटन विधानसभा सीट में बीते 35 सालों से करीब हर बार चुनाव में बीजेपी जीत दर्ज करती है. इस सीट पर दूसरे दलों के कई नेता किस्मत आजमा चुके हैं, लेकिन हर बार उन्हें मुंह की खानी पड़ती है. 35 सालों में सिर्फ एक बार कांग्रेस उम्मीदवार ने इस सीट से जीत दर्ज किया था. आलम यह ह है कि इस सीट पर प्रत्याशी उतारने में भी कांग्रेस समेत अन्य दलों को काफी परेशानी होती है, क्योंकि बीजेपी का यह बहुत मजबूत किला है और वसुंधरा राजे यहां से लगातार जीतती आई हैं.

वसुंधरा राजे ने दर्ज की है बंपर जीत
झालरापाटन विधानसभा सीट से बीजेपी नेता वसुंधरा राजे ने करीब हर बार जीत दर्ज की हैं. साल 2018 में राजे ने यहां से 1 लाख 11 हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से अपने निकटतम प्रतिद्वंदी को हराया था. उन्होंने 54 फीसदी से ज्यादा वोट हासिल किये थे.

35 सालों में सिर्फ एक बार कांग्रेस ने की है जीत दर्ज
झालरापाटन विधानसभा सीट बीजेपी का गढ़ माना जाता है. पार्टी उम्मीदवार इस सीट पर लंबे समय से जीत दर्ज करते आ रहे है.  इस सीट पर बीते 35 सालों से सिर्फ एक बार छोड़कर, बीजेपी का कब्जा रहा है. साल 1998 में कांग्रेस उम्मीदवार ने एक बार इस सीट पर जीत दर्ज किया था. साल  1998 में कांग्रेस उम्मीदवार मोहनलाल ने इस सीट पर जीत का परचम लहराया था. मोहनलाल ने बीजेपी प्रत्याशी अनंग कुमार को हराकर इस सीट पर जीत दर्ज की थी.

लगातार जीत दर्ज कर रही है बीजेपी
झालरापाटन सीट पर बीजेपी सालों से लगातार जीत दर्ज कर रही है. एक बार कांग्रेस को छोड़कर किसी उम्मीदवार ने बीजेपी कैंडिडेट को इस सीट से मात नहीं दी है.

जीत         हार

2018
वसुंधरा राजे (बीजेपी)                 मानवेंद्र सिंह (कांग्रेस)

2013
वसुंधरा राजे (बीजेपी)       मीनाक्षी चंद्रावत (कांग्रेस)

2008
वसुंधरा राजे (बीजेपी)                  मोहन लाल (कांग्रेस)

2003
वसुंधरा राजे (बीजेपी)                 रामा पायलट (कांग्रेस)

1998
मोहन लाल (कांग्रेस)               अनंग कुमार (बीजेपी)

1993
अनंग कुमार (बीजेपी)                 सुजान सिंह (कांग्रेस)

1990
अनंग कुमार (बीजेपी)                 ज्वाला प्रसाद (कांग्रेस)

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लेखक के बारे में

Author: Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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