Sambalpur News: अनुगूल वन मंडल में वन विभाग की गाड़ी में गांजा तस्करी किये जाने की गुप्त सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम ने कटक-संबलपुर नेशनल हाइवे नंबर-55 पर वाहन जांच अभियान चलाया. इस दौरान एक बोलेरो को जांच के लिए जरपाड़ा थाना की पुलिस ने रोका. इस गाड़ी में गांजा नहीं था, लेकिन सीट के नीचे सागवान की लकड़ी मिली. इसमें सतकोशिया अभ्यारण्य के वन अधिकारी लिंगराज भोई सवार थे. उन्होंने समझाया कि सरकारी काम के लिए लकड़ी ले जायी जा रही है, जिसके बाद पुलिस ने गाड़ी को छोड़ दिया. इसे लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गयी हैं.
पीसीसीएफ ने मुख्यमंत्री ऑफिस के आधिकारिक एक्स हैंडल पर शिकायत की
इस घटना को लेकर लोगों के मन में तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं. सतकोशिया अभ्यारण्य के जिलिंडा जंगल से यह लकड़ी किस ऑफिस के काम से जा रही थी? वन विभाग की गाड़ी में सागववान की लकड़ी ले जाने से संबंधित कागजात थे क्या? जरपाड़ा पुलिस ने किस आधार पर लकड़ी और गाड़ी को छोड़ा? वन विभाग और पुलिस दोनों के काम को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं. पीसीसीएफ ने इस घटना को लेकर मुख्यमंत्री ऑफिस के आधिकारिक एक्स हैंडल पर शिकायत भी की है. जरपाड़ा पुलिस के अनुसार, गांजा ले जाये जाने की जानकारी मिलने के बाद जरपाड़ा में सभी सरकारी गाड़ियों की जांच की जा रही थी. इसी दौरान अनुगूल से संबलपुर की ओर जा रही जिलिंडा रेंज ऑफिसर लिंगराज भोई की बोलेरो गाड़ी की चेकिंग के दौरान पता चला कि गाड़ी की पिछली सीट के नीचे भारी मात्रा में सागवान की लकड़ी लदी हुई थी.
डीएफओ ने साधी चुप्पी
जब पुलिस ने इस बारे में पूछा, तो रेंज ऑफिसर ने कहा कि यह लकड़ी ऑफिस के इस्तेमाल के लिए ले जायी जा रही है. बाद में जरपाड़ा पुलिस ने गाड़ी और लकड़ी दोनों को छोड़ दिया. इस बारे में जिलिंडा रेंज ऑफिसर लिंगराज भोई का तर्क है कि लकड़ी मैं घर ले जा रहा था. जैसे सभी आम आदमी लेकर जाते हैं. यदि इसकी विभागीय जांच होगी, तो इसके कागजात भी देंगे. साथ ही सरकारी गाड़ी का किराया भी देंगे. लेकिन इस घटना के बारे में डीएफओ ने चुप्पी साध रखी है.
