Bhubaneswar News: राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर स्थानीय कन्वेंशन सेंटर में दो दिवसीय राष्ट्रीय स्तरीय कार्यशाला ‘प्रज्ञा प्रेरणा’ की शुरुआत शनिवार को हुई. इसमें मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने राज्य के शैक्षिक वातावरण में ‘क्रांतिकारी परिवर्तन’ लाने का आह्वान किया. उन्होंने ओडिशा को भारत की ‘ज्ञान राजधानी’ के रूप में विकसित करने के लिए एक दूरदर्शी रोडमैप प्रस्तुत किया. कार्यक्रम का आयोजन ओडिशा सरकार के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, उच्च शिक्षा मंत्री सूर्यवंशी सूरज, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, शिक्षाविद और प्राध्यापक उपस्थित रहे. इस अवसर पर छात्रों के व्यावहारिक ज्ञान को बढ़ाने के लिए ‘इंटर्नशिप और कम्युनिटी सर्विस गाइडलाइंस’ पुस्तिका का विमोचन किया गया. साथ ही, महिला सुरक्षा और सशक्तीकरण को ध्यान में रखते हुए ‘शक्तिश्री’ मोबाइल एप का शुभारंभ भी किया गया.
शिक्षा क्षेत्र में वर्षों से चली आ रही जड़ता को समाप्त करना सरकार की प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में वर्षों से चली आ रही जड़ता को समाप्त करना सरकार की प्राथमिकता है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में तैयार यह नीति केवल एक सरकारी दस्तावेज नहीं, बल्कि भारत को वैश्विक नॉलेज कैपिटल बनाने का एक महत्वपूर्ण मिशन है. उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानव सभ्यता की प्रगति की आधारशिला है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस दिशा में प्रतिबद्ध है कि छात्र-छात्राएं ‘इंडस्ट्री-रेडी’ बनें और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हों. शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए शिक्षा क्षेत्र में 41,273 करोड़ रुपये का बड़ा बजट आवंटित किया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निवेश राज्य के युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए मजबूत आधार तैयार करेगा और शिक्षा के बुनियादी ढांचे को विश्वस्तरीय बनाने में सहायक होगा.
6,794 ग्राम पंचायतों में आधुनिक विद्यालय स्थापित किये जायेंगे
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच शैक्षिक असमानता को कम करने के लिए सरकार ने गोदावरीश मिश्र आदर्श विद्यालय योजना शुरू की है. इसके तहत 12,000 करोड़ रुपये की लागत से राज्य की 6,794 ग्राम पंचायतों में आधुनिक विद्यालय स्थापित किये जायेंगे. इन विद्यालयों में उन्नत कक्षाएं, प्रयोगशालाएं और खेल सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे ग्रामीण छात्रों को अपने क्षेत्र में ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी. उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय और समानता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार ने उच्च शिक्षा में एसइबीसी वर्ग के लिए 11.25 प्रतिशत आरक्षण लागू किया है. इसके अलावा, अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के छात्रों में ड्रॉपआउट दर को कम करने के लिए शहीद माधो सिंह हाथ खर्च योजना के तहत प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है. मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि ये पहल समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े विद्यार्थियों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेंगी और राज्य के समग्र शैक्षिक विकास को नयी दिशा देंगी.
