Rourkela News: नुआगांव ब्लॉक के जामबेरना गांव से लापता एक नाबालिग गुरुवार को बेसुध हालत में मिली. जिसके बाद परिजन नाबालिग को लेकर शहर के विभिन्न अस्पतालों का चक्कर लगाते रहे, लेकिन किसी भी अस्पताल में आइसीयू बेड नहीं मिला. अंतत: नाबालिग जिंदगी की जंग हार गयी. इस घटना को लेकर परिजनों में आक्रोश देखा जा रहा है. परिजनों ने कहा कि यदि उनकी बेटी को समय पर इलाज मिलता, तो उसकी अनमोल जिंदगी बच सकती थी.
हाइटेक से आइजीएच व अपोलो से लेकर आरजीएच की दौड़ लगाते रहे परिजन
जानकारी के अनुसार, नुआगांव ब्लॉक के जामबेरना गांव की एक नाबालिग किशोरी गुरुवार सुबह अपने घर से स्कूल जाने के लिए निकली थी. शाम होने तक जब वह घर नहीं लौटी, तो परिजनों की चिंता बढ़ गयी. परिजनों और ग्रामीणों ने काफी देर तक उसकी तलाश की, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला. थक-हार कर रात में परिजनों ने बिसरा थाना पहुंचकर गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करायी. इसके बाद बिसरा पुलिस तुरंत हरकत में आयी और परिजनों व ग्रामीणों के साथ मिलकर खोजबीन शुरू की. इसी दौरान परिजनों को सूचना मिली कि नाबालिग किशोरी जंगल क्षेत्र में बेसुध हालत में पड़ी हुई है. परिजन और ग्रामीणों ने तत्काल मौके पर पहुंचकर किशोरी को बिसरा सरकारी अस्पताल पहुंचाया.
बिसरा सरकारी अस्पताल में प्राथमिक जांच के बाद कर दिया गया रेफर
बिसरा सरकारी अस्पताल में प्राथमिक जांच के बाद डॉक्टरों ने नाबालिग की हालत गंभीर बतायी और उसे राउरकेला सरकारी अस्पताल रेफर कर दिया. जहां से डॉक्टरों ने उसे हाईटेक अस्पताल रेफर किया. हाईटेक अस्पताल पहुंचने पर परिजनों को बताया गया कि आइसीयू में कोई बेड खाली नहीं है. इसके बाद परिजन किशोरी को लेकर अपोलो अस्पताल पहुंचे, लेकिन वहां भी आइसीयू बेड उपलब्ध नहीं होने की बात कहकर भर्ती करने से इनकार कर दिया गया. लगातार निराशा हाथ लगने पर परिजन किशोरी को लेकर आइजीएच पहुंचे, लेकिन वहां भी यही जवाब मिला. रातभर अस्पताल-दर-अस्पताल भटकने के बाद परिजन किशोरी को लेकर दोबारा राउरकेला सरकारी अस्पताल पहुंचे. वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया. फिलहाल बिसरा पुलिस पूरे मामले की गंभीरता से जांच पड़ताल कर रही है. शुक्रवार सुबह फॉरेंसिक दल मौके पर पहुंचा और घटनास्थल की गहन जांच-पड़ताल की.
नाबालिग की मौत को लेकर परिजनों ने लगाये संगीन आरोप
नाबालिग किशोरी की मौत के बाद परिजनों ने इलाज में भारी लापरवाही का आरोप लगाया है. मृतका की मां का कहना है कि यदि समय पर सही इलाज मिल जाता, तो उनकी बेटी की जान बच सकती थी. रातभर अस्पताल-दर-अस्पताल भटकते रहे, लेकिन किसी भी अस्पताल में उसे भर्ती नहीं किया गया. फिलहाल, मामले को लेकर क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल है.
