राउरकेला: सरकार की ओर से कुपोषण मुक्त राज्य बनाने के लिए कई योजनाएं चलायी जा रही हैं. गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और बच्चों को पोषण उपलब्ध कराने के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से अंडे समेत कई खाद्य सामग्री देने का प्रावधान है. लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है. आरोप है कि लाभुकों को तय मात्रा से कम अंडे दिये जा रहे हैं.
आंगनबाड़ी केंद्रों में तय मात्रा से कम अंडे देने का आरोप
नियम के अनुसार गर्भवती और धात्री महिलाओं को सप्ताह में छह अंडे दिये जाने हैं. वहीं तीन साल तक के बच्चों को भी तय मात्रा में अंडा उपलब्ध कराने का प्रावधान है. छह साल तक के बच्चों और किशोरियों के लिए भी पोषण आहार की व्यवस्था की गयी है. इसके बावजूद कई जगहों से कम अंडे मिलने की शिकायत सामने आ रही है.
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कागजों में लाभुकों को पूरा पोषण देने की बात दर्ज हो रही है, लेकिन हकीकत में उनकी थाली तक पूरी मात्रा में पोषण आहार नहीं पहुंच रहा है. इससे सरकार के कुपोषण मुक्त राज्य के लक्ष्य पर सवाल उठ रहे हैं.
कम अंडे मिलने से पोषण पर असर
पोषण योजना के तहत अंडे को बच्चों और महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण खाद्य सामग्री माना जाता है. इसमें प्रोटीन समेत कई जरूरी पोषक तत्व होते हैं. ऐसे में तय मात्रा से कम अंडे मिलने पर लाभुकों को मिलने वाले पोषण पर असर पड़ सकता है.
मामले में निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं. यदि केंद्रों पर लाभुकों को निर्धारित मात्रा में अंडे नहीं मिल रहे हैं, तो इसकी नियमित जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जरूरत है. सरकार का लक्ष्य तभी पूरा हो सकता है, जब योजनाओं का लाभ कागजों के बजाय वास्तव में बच्चों और महिलाओं तक पहुंचे.
