Sambalpur News: कुचिंडा और बामड़ा तहसील कार्यालय में एक बड़े फर्जीवाड़ा का मामला सामने आया है, जिसमें जमीन हड़पने की शिकायत दर्ज करायी गयी थी. शिकायत के बावजूद प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा कोई उचित कार्रवाई नहीं की गयी, जिससे पीड़ित ने सीधे राजस्व मंत्री सुरेश पुजारी से न्याय की गुहार लगायी थी. मंत्री ने उच्चस्तरीय जांच के लिए उत्तरांचल राजस्व आयुक्त (आरडीसी) को जिम्मेदारी सौंपी. आरडीसी की जांच में फर्जीवाड़ा प्रमाणित हुआ, जिसके बाद राज्य सरकार ने कुचिंडा तहसीलदार मिताली मधुष्मिता दलेई को सोमवार को निलंबित कर दिया.
10 एकड़ कीमती व 29 डिसमिल घरबाड़ी जमीन हड़पने की हुई थी शिकायत
जानकारी के अनुसार, कुचिंडा शहर के एक प्रतिष्ठित कारोबारी की 10 एकड़ कीमती जमीन और 29 डिसमिल घरबाड़ी जमीन को फर्जीवाड़ा कर हड़पने का मामला था. कारोबारी जगदीशलाल सेठ के तीन बेटे राधाकृष्ण, मुरारीलाल, बृजमोहन और बेटी नारायणी बाई अग्रवाल के निधन के बाद जमीन के हिस्से के बंटवारा को लेकर कोई सुलह नहीं होने पर मामला कोर्ट में लंबित था. इस बीच राधाकृष्ण के दो बेटों कैलाश और बजरंगलाल तथा बृजमोहन के बेटों भरत और मिथिलेश ने जमीन को हथियाने के लिए कुचिंडा तहसील के कुछ कर्मचारियों के साथ मिलीभगत कर एक बड़ा षडयंत्र रचा. इन लोगों ने 10 एकड़ जमीन और 29 डिसमिल घरबाड़ी जमीन अपने नाम करने को लेकर 30/9/24, 5/10/24 और 7/3/25 को तहसील में आवेदन दिया था. पीड़ित मुरारीलाल के बेटे राजेश ने इसका विरोध करते हुए गैरकानूनी म्यूटेशन खारिज करने का आवेदन कुचिंडा तहसीलदार को दिया था. लेकिन तहसीलदार मिताली ने राजेश का आवेदन खारिज कर 29 डिसमिल घरबाड़ी जमीन का पट्टा कैलाश, बजरंग, भरत और मिथिलेश के नाम कर दिया था.
राजस्व निरीक्षण ने सौंपी थी गलत रिपोर्ट
इस फर्जीवाड़े को लेकर राजेश ने जिला प्रशासन, राजस्व मंत्री और मुख्यमंत्री से शिकायत की था. कुचिंडा तहसीलदार मिताली मधुष्मिता दलेई ने कानूनी प्रक्रिया को ताक पर रख कर तहसील कार्यालय के कर्मचारियों की मिलीभगत से जमीन को गैरकानूनी तरीके से एक पक्ष के नाम करने को लेकर राजस्व विभाग से राजेश ने शिकायत की थी. इस मामले में राजस्व निरीक्षक ने अपनी फर्जी रिपोर्ट में जमीन के 27 दावेदार की जगह मात्र चार दावेदार होने को झूठी रिपोर्ट दी थी. सिर्फ इतना ही नहीं, राजस्व निरीक्षक ने अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि मुरारीलाल और नारायणी बाई परिवार के सदस्य नहीं थे.
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