Rourkela News: राउरकेला के प्रति रेलवे की उपेक्षा लगातार बढ़ती जा रही है. दक्षिण पूर्व रेलवे के अंतर्गत चक्रधरपुर रेल मंडल के सौतेले रवैये के कारण राउरकेला के लोग बेहतर रेल सेवाओं से वंचित हैं. राउरकेला रेलवे स्टेशन का जीर्णोद्धार नहीं हो रहा है, वहीं पानपोष रेलवे स्टेशन को नया रूप नहीं दिया जा रहा है. इसी तरह राउरकेला को रेल डिवीजन बनाने की लंबे समय से चली आ रही मांग भी पूरी नहीं हो पा रही है.
शहर के लोगों को अधिकारों से किया जा रहा वंचित
राउरकेला को रेलवे डिवीजन बनाने की मांग लंबे समय से होती रही है. यह जायज मांग होने के बाद भी इसे लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है, जबकि इस अंचल से रेलवे को अच्छी-खासी आय होती है और पर्याप्त बुनियादी ढांचा भी मौजूद है, फिर भी क्षेत्र के लोगों को उनके अधिकारों से वंचित किया जा रहा है. राउरकेला और झारसुगुड़ा दक्षिण पूर्व रेलवे के अधीन हैं, जबकि क्योंझर जिला पूर्व तटीय रेलवे के अधीन है. खनन और औद्योगिक क्षेत्रों से समृद्ध ये तीनों जिले रेलवे का राजस्व बढ़ाने में योगदान करते हैं. यह बेहद जरूरी है कि इन तीनों जिलों को मिलाकर एक रेलवे डिवीजन बनाया जाये और ईस्ट कोस्ट रेलवे के नियंत्रण में लाया जाये.
राउरकेला में डिवीजन बनने से बढ़ेगा राजस्व
राउरकेला को रेलवे डिवीजन बनाने की मांग के पीछे कई वाजिब तर्क दिये जाते रहे हैं. चक्रधरपुर डिवीजन हर साल लगभग 18 करोड़ टन लौह अयस्क, कोयला, कच्चा लोहा, इस्पात, पेट्रोलियम उत्पाद, सीमेंट, खाद्यान्न का परिवहन करता है. इसमें से 60 फीसदी माल की लोडिंग केवल राउरकेला में ही होती है. इन तीन जिलों में कोयला, लौह अयस्क, मैंगनीज, क्रोमाइट, क्वार्टजाइट, बॉक्साइट, चूना पत्थर आदि की खदानें हैं. इसी प्रकार राउरकेला स्टील प्लांट (आरएसपी), ओसीएल (राजगांगपुर), टाटा रिफ्रैक्टरीज (बेलपहाड़), लिबर्टी हाउस (कुआरमुंडा), एलएंडटी (कांसबहाल), वेदांता (झारसुगुड़ा) आदि कई औद्योगिक प्रतिष्ठान हैं. इसलिए राजस्व में सबसे अधिक वृद्धि होने की संभावना है.
बंडामुंडा में पर्याप्त बुनियादी ढांचा उपलब्ध
राउरकेला से महज 10 किमी दूर बंडामुंडा में एशिया का दूसरा सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन है. चूंकि यहां पर्याप्त क्वार्टर, कार्यालय और सहायक बुनियादी ढांचा उपलब्ध है, इसलिए नये बुनियादी ढांचे के निर्माण की कोई आवश्यकता नहीं है. निकट भविष्य में बंडामुंडा में वंदे भारत ट्रेन के रखरखाव का एक डिपो और एक औद्योगिक गलियारा बनाने की योजना बनायी जा रही है. गौरतलब है कि इस मांग का न केवल शहर के बुद्धिजीवियों ने, बल्कि राज्य सरकार ने भी समर्थन किया है. तत्कालीन बीजद के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने इस संबंध में 2019 और 2022 में प्रधानमंत्री को पत्र लिखे थे. इसी तरह, अक्तूबर 2024 में केंद्रीय जनजातीय कल्याण मंत्री जुएल ओराम ने रेल मंत्री को पत्र लिखा था. वहीं पिछले साल मार्च में पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप राय ने प्रधानमंत्री से मुलाकात कर मांग दोहराई थी. लेकिन इसका नतीजा अभी तक सिफर ही है.
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